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Bareilly News: सड़क बनाई, सेतु का प्रावधान नहीं किया, अब इंजीनियरिंग पर सवाल

Mon, 26 Feb 2024 01:47 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:47 AM IST
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Road built, no provision for bridge, now question on engineering
बरेली। बल्लिया-शीशगढ़ मुख्य मार्ग से ढकिया डैम होते नगरिया पुल को जोड़ने के लिए बनाई गई करीब आठ किलोमीटर लंबी नई सड़क जिम्मेदारों की अनदेखी का शिकार हो गई है। प्रधानमंंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 4.59 करोड़ रुपये खर्च करके बनी इस सड़क के बीच में पड़ने वाले डैम पर लघु सेतु का कोई प्रावधान ही इंजीनियरों ने नहीं किया। इसके चलते कुल्ली डैम रेगुलेटर के स्ट्रक्चर की छत से होकर वाहन गुजरते हैं। ये स्ट्रक्चर 100 साल पुराना है और वाहनों के लिए नहीं बल्कि पानी को रेगुलेट करने के लिए बना है।
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ऐसे में बीस गांवों के एक लाख से अधिक लोग वाहनों से खतरे भरा सफर करने को मजबूर हैं। क्षेत्रीय विधायक डीसी वर्मा ने कुल्ली नदी पर लघु सेतु का मुद्दा शनिवार को प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च करके जब सड़क बनाई गई तो लघु सेतु क्यों नहीं बनाया? डैम के दोनों ओर सड़क बनी है। वाहन चल रहे हैं, लेकिन डैम की छत कमजोर और सकरी होने से भारी वाहन नहीं गुजर पाते। भरी हुईं ट्रैक्टर-ट्रॉली गुजरने से डैम की कमजोर छत को खतरा है। लघु सेतु की जरूरत है। प्रभारी मंत्री ने सेतु के लिए एस्टीमेट तैयार करने के आदेश दिए हैं।
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कोट-
सड़क निर्माण का एस्टीमेट था, उसके हिसाब से सड़क बनी। अब अगर लघु सेतु बनाया जाना है तो इसके लिए लोक निर्माण विभाग एस्टीमेट बनाएगा।-राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
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कोट-

विधानसभा में उठा सवाल, एस्टीमेट दो बार बने, नतीजा शून्य
विधायक डीसी वर्मा ने इस मुद्दे पर दो बार विधानसभा में सवाल उठाया। लोक निर्माण विभाग ने छह करोड़ व सिंचाई विभाग ने नौ करोड़ रुपये खर्च का एस्टीमेट बनाया। पांच साल से मुद्दे को उठा रहे विधायक वर्मा का कहना है कि सिंचाई विभाग ने रेगुलेटर के स्थान पर लघु सेतु बनाने का प्रस्ताव किया। रेगुलेटर तोड़ना पड़ेगा और लघु सेतु के साथ नया रेगुलेटर बनाना पड़ेगा। क्योंकि कुल्ली नदी के पानी को रोककर रेगुलेटर के माध्यम से नहर की ओर डायवर्ट किया जाता है, इसीलिए रेगुलेटर जरूरी है। वहीं पीडब्ल्यूडी, रेगुलेटर से कुछ दूरी पर सेतु बनाएगा। इसलिए उसकी लागत कम है। दोनों एस्टीमेट शासन स्तर तक गए हैं। अब मंजूरी का इंतजार है।



कोट-
यदि लोक निर्माण विभाग लघु सेतु बनाए तो रेगुलेटर से आगे बना सकते हैं। सिंचाई विभाग उसके लिए एनओसी दे देगा। -नरेंद्र सिंह, एसडीओ, रुहेलखंड नहरखंड, बरेली
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