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पीलीभीत हाईवे भी बदहाल- साहब मालामाल! बाकी हो रहे ‘हलाल’
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बरेली। लखनऊ हाईवे की तरह पीलीभीत हाईवे भी एनएचएआई अफसरों की लापरवाही से बदहाल हो गया है। दो दिन पहले इस हाईवे पर हुए हादसे में छह मौतों के बाद एनएचएआई के अफसर अब अपना बचाव करने में जुट गए हैं। इसके लिए ठेकेदार की गर्दन नापने की तैयारी हो रही है। करीब पौने तीन अरब का यह काम अधूरा छोड़कर बैठी वीआईएल कंपनी से काम छीनकर उसकी 21 करोड़ की जमानत जब्त करने के लिए लिखापढ़ी तेज कर दी गई है। एनएचएआई अधिकारियों की ओर से दिल्ली मुख्यालय भी संपर्क किया गया है ताकि ठेकेदार पर जल्द से जल्द एक्शन ले लिया जाए।
एनएचएआई ने 2.79 अरब से वीआईएल नाम की एक कंपनी को बरेली से सितारगंज वाया पीलीभीत तक करीब 74 किलोमीटर हाईवे को टू-लेन बनाने का काम दिया था। कंपनी को दो साल के अंदर हाईवे को चौड़ा करने के साथ नई पुलियों का निर्माण भी करना था। कंपनी ने शुरूआत में तेजी दिखाई लेकिन बाद में काम की गति धीमी होती चली गई और फिर यह प्रोजेक्ट अधूरा ही छोड़ दिया। रिठौरा, नवाबगंज, खमरिया पुल, ललौरीखेड़ा समेत कई जगह निर्माणाधीन हाईवे के किनारे मिट्टी फैली हुई है। अधूरी पड़ी पुलिया और सड़क हादसों की वजह बन रही है। डिवाइडर भी टूट रहे है। रोड सेफ्टी के काम भी नहीं कराए गए हैं।
हाईवे पर निर्माण कार्य वैसे तो करीब डेढ़ साल से नहीं हो रहा है लेकिन पिछले तीन महीनों से एजेंसी ने काम को पूरी तरह रोक दिया है। इससे जगह-जगह मिट्टी बारिश में कीचड़ बन चुकी है। अधूरी पुलिया के पास हादसों में आए दिन कोई न कोई मौत के मुंह में जा रहा है। एनएचएआई अधिकारी कंपनी को कई नोटिस तो दे चुके हैं लेकिन उसे अब तक न ब्लैक लिस्ट किया गया न उसकी जमानत राशि जब्त करने की कार्रवाई हुई। कुछ दिन पहले कार से जा रहे अलीगढ़ के एक ही परिवार के छह लोगों की मौत इस हाईवे पर होने के बाद अब ठेकेदार से काम छीनने की कार्रवाई हो रही है। एनएचएआई अफसरों का कहना है कि कंपनी से काम छीनकर नए ठेकेदार को यह काम दे दिया जाए।
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एस्टीमेट कम बताकर पीछे हटा ठेकेदार
बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट को लेने वाले ठेकेदार ने जिस लागत पर काम लिया था, उसे अब कम बताते हुए आगे का काम करने से हाथ खींच लिए हैं। जबकि अफसरों का कहना है कि हाईवे का काम ठेकेदार ने ही समय से पूरा नहीं किया। इसलिए प्रोजेक्ट कास्ट उसकी लापरवाही से ही बढ़ी है।
वीआईएल कंपनी इस हाईवे का काम ठीक ढंग से नहीं कर रही है। दिल्ली मुख्यालय से संपर्क कर जल्द से जल्द ठेकेदार पर कार्रवाई की पैरवी की जा रही है ताकि नए ठेकेदार को यह काम दिया जा सके। -एनपी सिंह, पीडी, एनएचएआई
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एनएचएआई ने 2.79 अरब से वीआईएल नाम की एक कंपनी को बरेली से सितारगंज वाया पीलीभीत तक करीब 74 किलोमीटर हाईवे को टू-लेन बनाने का काम दिया था। कंपनी को दो साल के अंदर हाईवे को चौड़ा करने के साथ नई पुलियों का निर्माण भी करना था। कंपनी ने शुरूआत में तेजी दिखाई लेकिन बाद में काम की गति धीमी होती चली गई और फिर यह प्रोजेक्ट अधूरा ही छोड़ दिया। रिठौरा, नवाबगंज, खमरिया पुल, ललौरीखेड़ा समेत कई जगह निर्माणाधीन हाईवे के किनारे मिट्टी फैली हुई है। अधूरी पड़ी पुलिया और सड़क हादसों की वजह बन रही है। डिवाइडर भी टूट रहे है। रोड सेफ्टी के काम भी नहीं कराए गए हैं।
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हाईवे पर निर्माण कार्य वैसे तो करीब डेढ़ साल से नहीं हो रहा है लेकिन पिछले तीन महीनों से एजेंसी ने काम को पूरी तरह रोक दिया है। इससे जगह-जगह मिट्टी बारिश में कीचड़ बन चुकी है। अधूरी पुलिया के पास हादसों में आए दिन कोई न कोई मौत के मुंह में जा रहा है। एनएचएआई अधिकारी कंपनी को कई नोटिस तो दे चुके हैं लेकिन उसे अब तक न ब्लैक लिस्ट किया गया न उसकी जमानत राशि जब्त करने की कार्रवाई हुई। कुछ दिन पहले कार से जा रहे अलीगढ़ के एक ही परिवार के छह लोगों की मौत इस हाईवे पर होने के बाद अब ठेकेदार से काम छीनने की कार्रवाई हो रही है। एनएचएआई अफसरों का कहना है कि कंपनी से काम छीनकर नए ठेकेदार को यह काम दे दिया जाए।
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एस्टीमेट कम बताकर पीछे हटा ठेकेदार
बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट को लेने वाले ठेकेदार ने जिस लागत पर काम लिया था, उसे अब कम बताते हुए आगे का काम करने से हाथ खींच लिए हैं। जबकि अफसरों का कहना है कि हाईवे का काम ठेकेदार ने ही समय से पूरा नहीं किया। इसलिए प्रोजेक्ट कास्ट उसकी लापरवाही से ही बढ़ी है।
वीआईएल कंपनी इस हाईवे का काम ठीक ढंग से नहीं कर रही है। दिल्ली मुख्यालय से संपर्क कर जल्द से जल्द ठेकेदार पर कार्रवाई की पैरवी की जा रही है ताकि नए ठेकेदार को यह काम दिया जा सके। -एनपी सिंह, पीडी, एनएचएआई