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उर्स-ए-ताजुश्शरिया में मोहब्बत का नजराना
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बरेली। अकीदत भरे माहौल में संपन्न हुए दो रोजा उर्स-ए-ताजुश्शरिया में देश-विदेश से आए तमाम जायरीन ने शिरकत कर मोहब्बत का नजराना पेश किया।
दस्तूर के मुताबिक उर्स की तकरीब दूसरे रोज भी सुबह कुरान ख्वानी से शुरू हुई। नातो मनकबद की महफिल के बाद दरगाह शरीफ पर जायरीन पहुंचने शुरू हो गए। बीच-बीच में चादरों के जुलूस भी आते रहे। दोपहर बाद जायरीन की भीड़ मथुरापुर रवाना होने लगी और दोपहर बाद तक वहां जायरीन का भारी मजमा इकट्ठा हो गया। मथुरापुर के जामियतुर्रजा इस्लामिक स्टडी सेंटर पर मोहद्दिसे कबीर मुफ्ती जियाउल मुस्तफा की सरपरस्ती और जानशीन ताजुश्शरिया एवं काजी उल कुज्जात मुफ्ती असजद रजा खां कादरी की सदारत में उर्स का जलसा मनाया गया। जलसे में उलमा की तकरीर के बाद ताजुश्शरिया के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें असजद मियां ने मुल्क और अवाम की सलामती और खैर के लिए दुआएं की गईं।
इस मौके पर मुफ्ती अफजाल कासिमी (लंदन), अल्लामा सैयद गयासे मिल्लत (कालपी शरीफ), मौलाना जाहिद (इंग्लैंड), मौलाना बशीर (इंग्लैंड), मुफ्ती जाकिर खैरासी आदि ने तकरीर की। निजामत मुफ्ती गुलजार की रही। यह आयोजन जमात रजा मुस्तफा के उपाध्यक्ष सलमान हसन खान की निगरानी में पूरा हुआ। कुल के बाद दरगाह शरीफ पर हाजिरी देते हुए जायरीन घर लौटने लगे।
शहर के काफी लोग नहीं पहुंचे सके मथुरापुर
ताजुश्शरिया के उर्स में शहर के तमाम लोग मथुरापुर नहीं पहुंच सके। एक तो दूरी वजह रही, दूसरे वाहनों से निकले तमाम लोग रूट डायवर्जन के कारण बैरियर से ही लौट गए क्योंकि इसके आगे काफी पैदल भी चलना था। इन लोगों ने दरगाह पर हुए कुल में शिरकत की।
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जायरीन के लिए लगाई गईं बसें
जायरीन को मथुरापुर तक लाने और ले जाने के लिए उर्स कमेटी की ओर से 40 बसों का इंतजाम किया गया था, जो निशुल्क सेवा दे रही थीं। सुबह से मथुरापुर के लिए बसों का संचालन शुरू हो गया था, जो दोपहर बाद तक जारी रहा।
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दस्तूर के मुताबिक उर्स की तकरीब दूसरे रोज भी सुबह कुरान ख्वानी से शुरू हुई। नातो मनकबद की महफिल के बाद दरगाह शरीफ पर जायरीन पहुंचने शुरू हो गए। बीच-बीच में चादरों के जुलूस भी आते रहे। दोपहर बाद जायरीन की भीड़ मथुरापुर रवाना होने लगी और दोपहर बाद तक वहां जायरीन का भारी मजमा इकट्ठा हो गया। मथुरापुर के जामियतुर्रजा इस्लामिक स्टडी सेंटर पर मोहद्दिसे कबीर मुफ्ती जियाउल मुस्तफा की सरपरस्ती और जानशीन ताजुश्शरिया एवं काजी उल कुज्जात मुफ्ती असजद रजा खां कादरी की सदारत में उर्स का जलसा मनाया गया। जलसे में उलमा की तकरीर के बाद ताजुश्शरिया के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें असजद मियां ने मुल्क और अवाम की सलामती और खैर के लिए दुआएं की गईं।
इस मौके पर मुफ्ती अफजाल कासिमी (लंदन), अल्लामा सैयद गयासे मिल्लत (कालपी शरीफ), मौलाना जाहिद (इंग्लैंड), मौलाना बशीर (इंग्लैंड), मुफ्ती जाकिर खैरासी आदि ने तकरीर की। निजामत मुफ्ती गुलजार की रही। यह आयोजन जमात रजा मुस्तफा के उपाध्यक्ष सलमान हसन खान की निगरानी में पूरा हुआ। कुल के बाद दरगाह शरीफ पर हाजिरी देते हुए जायरीन घर लौटने लगे।
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शहर के काफी लोग नहीं पहुंचे सके मथुरापुर
ताजुश्शरिया के उर्स में शहर के तमाम लोग मथुरापुर नहीं पहुंच सके। एक तो दूरी वजह रही, दूसरे वाहनों से निकले तमाम लोग रूट डायवर्जन के कारण बैरियर से ही लौट गए क्योंकि इसके आगे काफी पैदल भी चलना था। इन लोगों ने दरगाह पर हुए कुल में शिरकत की।
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जायरीन के लिए लगाई गईं बसें
जायरीन को मथुरापुर तक लाने और ले जाने के लिए उर्स कमेटी की ओर से 40 बसों का इंतजाम किया गया था, जो निशुल्क सेवा दे रही थीं। सुबह से मथुरापुर के लिए बसों का संचालन शुरू हो गया था, जो दोपहर बाद तक जारी रहा।