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ताजुश्शरिया का उर्स- इस्लामिया ग्राउंड से टेंट उखड़ा पूरे दिन पुलिस को रखा अलर्ट
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बरेली। लखनऊ से पेच कसे जाने के बाद पुलिस और प्रशासन के अफसर अब ताजुश्शरिया मुफ्ती मोहम्मद अख्तर रजा खां अजहरी मियां के उर्स के मामले में कोई ढिलाई करने के मूड में नहीं हैं। पुलिस-प्रशासन की सख्ती की वजह से उर्स के लिए सजाया जा रहा इस्लामिया ग्राउंड सुनसान हो गया है। रविवार को यहां लगा टेंट पूरी तरह उखाड़ दिया गया। पुलिस-प्रशासन पूरे दिन सजग रहा। शहर के तीनों सीओ और इंस्पेक्टर घंटों एसपी सिटी कार्यालय पर जमे रहे तो दंगा नियंत्रण के उपकरणों के साथ पुलिस फोर्स को भी अलर्ट रखा गया। इसके साथ आरआरएफ और पीएसी को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने कह दिया गया था।
दो महीने पहले ताजुश्शरिया के उर्स को प्रशासन ने ही अनुमति दी थी। इस्लामिया ग्राउंड पर यह उर्स पहली बार आयोजित होना था, लिहाजा शासन की गाइड लाइन की मुताबिक इस नई परंपरा की अनुमति दिए जाने से पहले शासन को रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए थी लेकिन अफसरों ने स्थानीय स्तर पर ही पूरा मामला निपटा दिया। हाल ही में उर्स को नई परंपरा बताते हुए हिंदू संगठनों ने इसका विरोध शुरू करते हुए यह मामला शासन और हाईकोर्ट तक पहुंचा दिया तो अफसरों को अपनी चूक का अहसास हुआ। शासन से जवाबतलब होने के बाद अफसर बैकफुट पर आए गए। उर्स की अनुमति निरस्त करने के साथ उसकी तैयारियों पर रोक लगा दी गई। इसके साथ इंस्पेक्टर कोतवाली की रिपोर्ट को इस चूक के लिए जिम्मेदार मानते हुए उन्हें लाइन हाजिर कर दिया। हालांकि इंस्पेक्टर का कहना है कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था कि यह उर्स बरेली में पहली बार होने जा रहा है।
उर्स को लेकर रविवार को भी शहर में तमाम अफवाहें उड़ती रहीं। खुफिया विभाग के लोग पल-पल की रिपोर्ट शासन और जिला प्रशासन को देते रहे। पुलिस प्रशासन किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहा। उधर, इस्लामिया ग्राउंड पर दिन भर लोग यह जायजा लेने पहुंचते रहे कि यहां अब उर्स होगा या नहीं। कुछ लोग पुलिस-प्रशासन की गतिविधियों को भांपने के लिए कोतवाली और एसपी सिटी कार्यालय भी पहुंचे लेकिन अफसरों ने उनसे बात नहीं की। इस सब के बीच रविवार को दिनभर शहर का माहौल आम दिनों की तरह सामान्य रहा।
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दो महीने पहले ताजुश्शरिया के उर्स को प्रशासन ने ही अनुमति दी थी। इस्लामिया ग्राउंड पर यह उर्स पहली बार आयोजित होना था, लिहाजा शासन की गाइड लाइन की मुताबिक इस नई परंपरा की अनुमति दिए जाने से पहले शासन को रिपोर्ट भेजी जानी चाहिए थी लेकिन अफसरों ने स्थानीय स्तर पर ही पूरा मामला निपटा दिया। हाल ही में उर्स को नई परंपरा बताते हुए हिंदू संगठनों ने इसका विरोध शुरू करते हुए यह मामला शासन और हाईकोर्ट तक पहुंचा दिया तो अफसरों को अपनी चूक का अहसास हुआ। शासन से जवाबतलब होने के बाद अफसर बैकफुट पर आए गए। उर्स की अनुमति निरस्त करने के साथ उसकी तैयारियों पर रोक लगा दी गई। इसके साथ इंस्पेक्टर कोतवाली की रिपोर्ट को इस चूक के लिए जिम्मेदार मानते हुए उन्हें लाइन हाजिर कर दिया। हालांकि इंस्पेक्टर का कहना है कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था कि यह उर्स बरेली में पहली बार होने जा रहा है।
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उर्स को लेकर रविवार को भी शहर में तमाम अफवाहें उड़ती रहीं। खुफिया विभाग के लोग पल-पल की रिपोर्ट शासन और जिला प्रशासन को देते रहे। पुलिस प्रशासन किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहा। उधर, इस्लामिया ग्राउंड पर दिन भर लोग यह जायजा लेने पहुंचते रहे कि यहां अब उर्स होगा या नहीं। कुछ लोग पुलिस-प्रशासन की गतिविधियों को भांपने के लिए कोतवाली और एसपी सिटी कार्यालय भी पहुंचे लेकिन अफसरों ने उनसे बात नहीं की। इस सब के बीच रविवार को दिनभर शहर का माहौल आम दिनों की तरह सामान्य रहा।
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