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मन, वचन, कर्म से भगवत भजन का संदेश
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बरेली। त्रिवटीनाथ मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन कथाव्यास डॉ. पं. सुरेश शास्त्री ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर किया। कहा, जब नंद बाबा को पुत्र की प्राप्ति हुई तो उन्होंने दो लाख गायों का दान किया। घर पर जो याचक आता था उसे फिर कहीं मांगने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
बताया कि बाल कृष्ण जब राक्षसों के दोषों को भूलकर उद्धार कर सकते हैं तो फिर भक्तों का दोष क्यों नहीं क्षमा करेंगे। माखन चोरी लीला से उच्च, निमभन के भाव को और मिट्टी खाकर भूमि तत्व को पवित्र किया। इन लीलाओं पर ब्रह्मा भी मोहित हुए और ग्वाल बाल और बछड़ों का हरण कर ले जाते हैं। ब्रहमा जी कहते हैं कि जीवन जीने के तीन सूत्र मनसा, वाचा, कर्मणा से भगवान के श्री चरणों में आत्म समर्पण करने वाला मुक्तिपद प्राप्त करता है। फिर प्रसाद वितरण से कथा का विश्राम हुआ। यहां प्रताप चंद्र सेठ, संजीव औतार अग्रवाल व अन्य मौजूद रहे।
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बताया कि बाल कृष्ण जब राक्षसों के दोषों को भूलकर उद्धार कर सकते हैं तो फिर भक्तों का दोष क्यों नहीं क्षमा करेंगे। माखन चोरी लीला से उच्च, निमभन के भाव को और मिट्टी खाकर भूमि तत्व को पवित्र किया। इन लीलाओं पर ब्रह्मा भी मोहित हुए और ग्वाल बाल और बछड़ों का हरण कर ले जाते हैं। ब्रहमा जी कहते हैं कि जीवन जीने के तीन सूत्र मनसा, वाचा, कर्मणा से भगवान के श्री चरणों में आत्म समर्पण करने वाला मुक्तिपद प्राप्त करता है। फिर प्रसाद वितरण से कथा का विश्राम हुआ। यहां प्रताप चंद्र सेठ, संजीव औतार अग्रवाल व अन्य मौजूद रहे।
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