फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   religion

संतानों को दीर्घायु बनाने के लिए आज माताएं रखेंगी अखंड व्रत

Mon, 13 Jan 2020 02:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 13 Jan 2020 02:43 AM IST
विज्ञापन
religion
ganesh visarjan - फोटो : अमर उजाला
सूर्योदय से शुरू होकर निर्जला अखंड व्रत का चंद्र दर्शन के साथ होगा पारण
विज्ञापन

बरेली। संतान को कष्ट से दूर रखने और उनकी दीर्घायु के लिए सोमवार (13 जनवरी) को माताएं सकट चौथ का अखंड व्रत धारण करेंगी। इस दिन धारण किए जाने वाले व्रत में सूर्योदय के बाद से चंद्रोदय तक अन्न, जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाएगा। चंद्रोदय के बाद भगवान श्री गणेश की विधि विधान से पूजा के बाद व्रत पारण किया जा सकेगा।
ज्योतिषाचार्य पं. सौरभ शंखधार के मुताबिक, सकट चौथ को अलग-अलग राज्यों में अन्य नामों से पुकारा जाता है। इसे व्रत संकष्टी चौथ, वक्रकुंडी चतुर्थी, तिलकुटा नाम से भी मनाने की परंपरा है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन यह व्रत रखा जाता है। बताया कि साल में 12 संकष्ठी चतुर्थी व्रत आते हैं, लेकिन सभी में माघ कृष्ण पक्ष में आने वाले इस व्रत का खास महत्व माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। बताया कि चतुर्थी तिथि 13 जनवरी को शाम 5.32 से शुरू होकर 14 जनवरी की दोपहर 2.49 तक होगी। हालांकि, उदयातिथि की मान्यता के कारण व्रत 13 जनवरी सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय के समय रात 8.38 बजे रहेगा।
विज्ञापन

सबसे बड़े संकट से निकले थे गणपति
मान्यता है कि एक बार मां पार्वती स्नान के लिए गईं तो उन्होंने द्वार पर गणेश को खड़ा कर दिया। जब भगवान शिव आए तो गणपति ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया, क्रोधित होकर उन्होंने त्रिशूल से गणेशजी का सिर धड़ से अलग कर दिया। मां पार्वती के हठ पर भगवान शिव ने मृत बालक गणेश पर हाथी का सिर लगाकर दूसरा जीवन दिया। यहां से गणेश गजानन कहलाए जाने लगे। भगवान शिव ने भगवान गणपति को प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया। मान्यता है कि सकट चौथ के दिन ही भगवान गणेश को 33 कोटि देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। तभी से यह तिथि गणपति पूजन की तिथि बन गई। कहते हैं कि इस दिन गणपति किसी को खाली हाथ नहीं जाने देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

सकट चौथ के पूजन और व्रत का विधान
सुबह स्नान कर लाल रंग का वस्त्र धारण करें।
मिट्टी से गौरी, गणेश और चंद्रमा बनाकर पूजा करें।
पूजा के समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें।
दुर्वा, पुष्प, रोली, फल सहित मोदक व पंचामृत को पूजन में शामिल करें।
गौरी गणेश के पूजन के बाद अग्नि की सात बार परिक्रमा करें।
पूजा के दौरान गणपति की पीठ के दर्शन न करें। मोदक भोग लगाएं।
विधि विधान से पूजा के बाद गणेश मंत्र ‘ऊं गणेशाय नम:’ का 108 बार जाप करें।
इस दिन तिल के लड्डू चढ़ाने का विशेष महत्व है। इन्हें भी पूजन में अर्पित करें।
पूजा के समय संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा अवश्य सुनें और गणपति की आरती भी करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed