{"_id":"5dc71f168ebc3e5b3a7f03bd","slug":"religion-bareilly-news-bly383402478","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुल की रस्म के साथ उर्स-ए-सुल्तानी का समापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुल की रस्म के साथ उर्स-ए-सुल्तानी का समापन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीबीगंज। परसाखेड़ा स्थित सुल्तानी मैदान में चल रहे सात दिवसीय सालाना उर्स ए सुल्तानी का शनिवार को कुल के साथ समापन हो गया। कुल में हजारों की संख्या में जायरीनों की भीड़ जुटी। इस दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
परसाखेड़ा स्थित सुल्तान शाह बाबा की दरगाह पर उर्स ए सुल्तानी गत 3 नवंबर से शुरू हुआ था 3 व 4 नवंबर को तकरीर हुई। जिसके बाद 5 नवंबर से 8 नवंबर तक उर्स में जबरदस्त जवाबी कव्वाली मुकाबला हुआ। गत शुक्त्रस्वार को सुल्तान शाह बाबा की दरगाह पर चादरपोशी हुई। शनिवार को दोपहर 2:40 बजे कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन हो गया। इस दौरान कुल में हजारों की संख्या में जायरीनों की भीड़ जुटी।
अयोध्या मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले के मद्देनजर शांति व्यवस्था के लिए उर्स में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। उर्स को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने व उर्स के आयोजन में मुख्य रूप से मेला सदर नाजिम उद्दीन, मास्टर गुलाम मोहम्मद, मुंशी रजा खान एडवोकेट, शाकिर हुसैन, अशरफ अली खान, महबूब रजा खान, फारूक उद्दीन, तस्लीम रजा खान रफीकुद्दीन, नत्थू बक्श, मुस्ताक हुसैन, मसीत खां आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
परसाखेड़ा स्थित सुल्तान शाह बाबा की दरगाह पर उर्स ए सुल्तानी गत 3 नवंबर से शुरू हुआ था 3 व 4 नवंबर को तकरीर हुई। जिसके बाद 5 नवंबर से 8 नवंबर तक उर्स में जबरदस्त जवाबी कव्वाली मुकाबला हुआ। गत शुक्त्रस्वार को सुल्तान शाह बाबा की दरगाह पर चादरपोशी हुई। शनिवार को दोपहर 2:40 बजे कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन हो गया। इस दौरान कुल में हजारों की संख्या में जायरीनों की भीड़ जुटी।
विज्ञापन
अयोध्या मामले में शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले के मद्देनजर शांति व्यवस्था के लिए उर्स में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। उर्स को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने व उर्स के आयोजन में मुख्य रूप से मेला सदर नाजिम उद्दीन, मास्टर गुलाम मोहम्मद, मुंशी रजा खान एडवोकेट, शाकिर हुसैन, अशरफ अली खान, महबूब रजा खान, फारूक उद्दीन, तस्लीम रजा खान रफीकुद्दीन, नत्थू बक्श, मुस्ताक हुसैन, मसीत खां आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा।
विज्ञापन