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सुकर्मा योग के शुभ संयोग में मनेगी अनंत चतुर्दशी
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बरेली। भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा अर्चना के लिए विशेष मानी जाने वाली अनंत चतुदर्शी शुभ संयोगों के साथ श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करेगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक अबकी बार बन रहे अनंत चतुर्दशी पर पूरे दिन सुकर्मा योग का मान रहेगा, जो श्री विष्णु की आराधना और किए गए कार्यों का कई गुना फल प्रदान करेगा। बताते हैं कि सुकर्मा योग हरि भक्तों के लिए बेहद प्रभावशाली साबित होगा।
ज्योतिषाचार्य पं. सोनू मिश्रा के मुताबिक सुकर्मा योग कर्म प्रधान जातकों की मंशा पूरी करने वाला होता है। मान्यता के अनुसार 14 सालों तक लगातार अनंत चतुर्दशी का व्रत करने पर विष्णु लोक प्राप्त होता है। इसलिए इस योग को 27 योगों में शुभ योगों की श्रेणी में रखा गया है। अनंत चतुर्दशी के दिन पड़ने से योग का मान और प्रभाव भी बढ़ा है। साथ ही इस दिन यानी 12 सितंबर को गुरुवार है, जो यश, वैभव, धन, संपदा, ज्ञान का प्रतीक है। इसलिए गुरुवार और सुकर्मा योग का मिलन हरि भक्तों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा। बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी का व्रत 12 सितंबर यानी गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन और श्री गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का विधान है।
अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि
सुबह स्नान कर नया वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें। भगवान विष्णु की तस्वीर लगाकर एक डोरी को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर 14 गांठें बनाएं। इसे भगवान विष्णु को चढ़ाकर पूजा शुरू करें। साथ ही‘अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव, अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्तुते’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद पुरुष रक्षा सूत्र को दाएं और महिलाएं बाएं हाथ के बाजू पर बांधे। पूजा की समाप्ति के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और प्रसाद ग्रहण करें।
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चतुर्दशी तिथि
प्रारंभ : 12 सितंबर को सुबह 5.06 बजे
समाप्त : 13 सितंबर को सुबह 7.35 बजे
पूजा मुहूर्त : 12 सितंबर को सुबह 6.13 बजे से 13 सितंबर की सुबह 7.17 बजे तक।
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ज्योतिषाचार्य पं. सोनू मिश्रा के मुताबिक सुकर्मा योग कर्म प्रधान जातकों की मंशा पूरी करने वाला होता है। मान्यता के अनुसार 14 सालों तक लगातार अनंत चतुर्दशी का व्रत करने पर विष्णु लोक प्राप्त होता है। इसलिए इस योग को 27 योगों में शुभ योगों की श्रेणी में रखा गया है। अनंत चतुर्दशी के दिन पड़ने से योग का मान और प्रभाव भी बढ़ा है। साथ ही इस दिन यानी 12 सितंबर को गुरुवार है, जो यश, वैभव, धन, संपदा, ज्ञान का प्रतीक है। इसलिए गुरुवार और सुकर्मा योग का मिलन हरि भक्तों के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा। बताया कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी मनाते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी का व्रत 12 सितंबर यानी गुरुवार को पड़ रहा है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन और श्री गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का विधान है।
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अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि
सुबह स्नान कर नया वस्त्र पहनें। व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें। भगवान विष्णु की तस्वीर लगाकर एक डोरी को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंगकर 14 गांठें बनाएं। इसे भगवान विष्णु को चढ़ाकर पूजा शुरू करें। साथ ही‘अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव, अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्तुते’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद पुरुष रक्षा सूत्र को दाएं और महिलाएं बाएं हाथ के बाजू पर बांधे। पूजा की समाप्ति के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और प्रसाद ग्रहण करें।
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चतुर्दशी तिथि
प्रारंभ : 12 सितंबर को सुबह 5.06 बजे
समाप्त : 13 सितंबर को सुबह 7.35 बजे
पूजा मुहूर्त : 12 सितंबर को सुबह 6.13 बजे से 13 सितंबर की सुबह 7.17 बजे तक।