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मन्नत मांगते ही निष्काम भाव का होता है लोप
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बरेली। रामायण मंदिर माधोबाड़ी में चल रहे गोस्वामी तुलसीदास जयंती महोत्सव में शुक्रवार को श्रीराम कथा का विश्राम हुआ। कथाव्यास रविनंदन शास्त्री ने ‘बिन मांगे मोती मिले’ पद सुनाकर श्रद्धालुओं को बताया, निष्काम भक्त ही प्रभु को भाते हैं लेकिन मन्नत आदि मांगते ही काम भावना हावी हो जाती है, मन की निष्छलता खत्म हो जाती है।
कथा के बाद कथाव्यास ने भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर किया। उन्होंने ‘मैं जहां भी रहूं बरसाना मिले’ ‘दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियां प्यासी रे’ ‘सुख भी मुझे प्यारे हैं दुख भी मुझे प्यारे हैं’, छोड़ता मैं किसे दाता दोनों ही तुम्हारे हैं’ ‘मेरे जीवन की जुड़ गई डोर किशोरी तेरे चरणों से’ ‘गोविंद चले आओ गोपाल चले आओ’ आदि सुमधुर भजन सुनाए। देर रात तक चले भजन कार्यक्रम का भक्तों ने भक्ति रस का पान किया।
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कथा के बाद कथाव्यास ने भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्तिरस से सराबोर किया। उन्होंने ‘मैं जहां भी रहूं बरसाना मिले’ ‘दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी अखियां प्यासी रे’ ‘सुख भी मुझे प्यारे हैं दुख भी मुझे प्यारे हैं’, छोड़ता मैं किसे दाता दोनों ही तुम्हारे हैं’ ‘मेरे जीवन की जुड़ गई डोर किशोरी तेरे चरणों से’ ‘गोविंद चले आओ गोपाल चले आओ’ आदि सुमधुर भजन सुनाए। देर रात तक चले भजन कार्यक्रम का भक्तों ने भक्ति रस का पान किया।
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