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Bareilly News: अभाव का बहाना बना रेफरल का खेल मरीजों के भार से हायर सेंटर बीमार
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बरेली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के रेफरल सिस्टम पर लगाम नहीं लग रही। नतीजा, हायर सेंटर मरीजों के बढ़ते दबाव से कराह रहे हैं। पुराने मरीज डिस्चार्ज कर नए भर्ती करने की नौबत है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी इस पर नाराजगी जता चुके हैं।
अमर उजाला की टीम ने जिला अस्पताल और जिले के 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर 24 घंटे तक भर्ती रहे मरीजों के बारे में पड़ताल की तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। जिला अस्पताल की 24 बेड की इमरजेंसी में रोजाना दुर्घटनाग्रस्त, कुत्ते, बंदरों के काटने से जख्मी समेत करीब सौ मरीज आते हैं। इनमें से 95 फीसदी को भर्ती कर संबंधित वार्डों में भेजा जाता है।
सीएचसी पर पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक इलाज देकर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। सिर्फ गर्भवती या प्रसूताएं ही सीएचसी पर भर्ती मिलीं। शासनादेश के मुताबिक, बेहद गंभीर हालत होने पर ही मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाना चाहिए, पर सीएचसी से सांस फूलने, डायरिया, निमोनिया पीड़ित मरीजों को भी रेफर किया जा रहा है।
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डिप्टी सीएम के सामने फीका पड़ गया था दावा
पिछले साल जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने विभागीय अफसरों के साथ बैठक की थी। सीएमओ ने नवाबगंज सीएचसी को सर्वश्रेष्ठ बताया तो डिप्टी सीएम ने फोन कॉल पर वहां के चिकित्साधिकारी से बात की। बताते हैं कि केंद्र पर प्रतिमाह भर्ती हो रहे मरीजों की संख्या पूछी तो उन्होंने 10-15 बताई। तब उन्होंने कहा कि जब सर्वश्रेष्ठ का ये हाल है तो बाकी का अंदाजा लगा सकते हैं।
न उपकरण हैं न ही विशेषज्ञ
चिकित्साधिकारियों का कहना है हाई रिक्स प्रेग्नेंसी केस ही हायर सेंटर रेफर किए जाते हैं। उपकरणों और विशेषज्ञों के अभाव में घायलों या गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर रेफर कर देते हैं। दिन में मरीज भर्ती कर शाम तक डिस्चार्ज करने के सवाल पर चिकित्साधिकारी बोले- मरीज ही नहीं रुकते।
सीएचसी पर भर्ती मिलीं प्रसूताएं, वार्ड में एक-दो मरीज
- सीएचसी फरीदपुर की इमरजेंसी में माहभर में 60 मरीज भर्ती हुए। इनमें से 17 प्रसूताएं और एक अन्य मरीज ही 24 घंटे से अधिक समय तक भर्ती रहे।
- भोजीपुरा में एक भी मरीज 24 घंटे से अधिक समय तक भर्ती नहीं रहा। डॉ. अजयपाल गंगवार ने कहा कि उपकरण और विशेषज्ञ न होने से रेफर करना पड़ता है।
- नवाबगंज में 17 गर्भवती और दो बुखार से पीड़ित मरीज भर्ती हुए। डॉ. अमित गंगवार ने कहा कि मरीज की हालत बिगड़ने पर ही रेफर करते हैं।
- मीरगंज में माह में भर्ती 86 मरीजों में से 48 गर्भवती रहीं। 24 घंटे में भर्ती 11 मरीजों में से नौ डिस्चार्ज हुए। डॉ. वैभव राठौर ने कहा कि गंभीर मरीजों को ही रेफर करते हैं।
- फतेहगंज पश्चिमी में माहभर में 43 मरीज भर्ती हुए। गर्भवती ही 24 घंटे से अधिक भर्ती रहीं। डॉ. संचित शर्मा ने कहा कि विशेषज्ञ मिलें तो मरीजों को रेफर नहीं किया जाएगा।
जिम्मेदार बोले- सीएमओ को लगातार भेज रहे हैं पत्र
जिला अस्पताल के एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित ने कहा कि जिन मरीजों का इलाज सीएचसी पर हो सकता है, उन्हें भी रेफर किए जाने की जानकारी देते हुए सीएमओ से अंकुश लगाने के लिए कहा गया है। हालांकि, अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने कहा कि फर्स्ट रेफरल यूनिट बनने के बाद अब गर्भवतियों के रेफर होने के मामले कम हुए हैं, पर अब भी गैरजरूरी रेफरल केस अधिक हैं।
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परिजन बोले- रेफर से परेशान होता है परिवार
बेटे को कमजोरी हो रही थी और चक्कर आ रहे थे। गिरने से चोट लग गई थी। सीएचसी पर पट्टी कर रेफर कर दिया। यहां आए तो डॉक्टर ने दवाएं दीं और 24 घंटे के बाद घर भेजने के लिए कहा है। - नफीसा, अटामांडा
पिता के पैर के अंगूठे में सांप ने काट लिया था। सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम लगाकर रेफर कर दिया। उन्होंने जहर चढ़ने जैसी कोई शिकायत नहीं की। अब बेड पर लेटकर परेशान हैं। - नईम हसन, भोजीपुरा
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अमर उजाला की टीम ने जिला अस्पताल और जिले के 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर 24 घंटे तक भर्ती रहे मरीजों के बारे में पड़ताल की तो स्थिति चौंकाने वाली मिली। जिला अस्पताल की 24 बेड की इमरजेंसी में रोजाना दुर्घटनाग्रस्त, कुत्ते, बंदरों के काटने से जख्मी समेत करीब सौ मरीज आते हैं। इनमें से 95 फीसदी को भर्ती कर संबंधित वार्डों में भेजा जाता है।
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सीएचसी पर पहुंचने वाले मरीजों को प्राथमिक इलाज देकर उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। सिर्फ गर्भवती या प्रसूताएं ही सीएचसी पर भर्ती मिलीं। शासनादेश के मुताबिक, बेहद गंभीर हालत होने पर ही मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाना चाहिए, पर सीएचसी से सांस फूलने, डायरिया, निमोनिया पीड़ित मरीजों को भी रेफर किया जा रहा है।
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डिप्टी सीएम के सामने फीका पड़ गया था दावा
पिछले साल जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने विभागीय अफसरों के साथ बैठक की थी। सीएमओ ने नवाबगंज सीएचसी को सर्वश्रेष्ठ बताया तो डिप्टी सीएम ने फोन कॉल पर वहां के चिकित्साधिकारी से बात की। बताते हैं कि केंद्र पर प्रतिमाह भर्ती हो रहे मरीजों की संख्या पूछी तो उन्होंने 10-15 बताई। तब उन्होंने कहा कि जब सर्वश्रेष्ठ का ये हाल है तो बाकी का अंदाजा लगा सकते हैं।
न उपकरण हैं न ही विशेषज्ञ
चिकित्साधिकारियों का कहना है हाई रिक्स प्रेग्नेंसी केस ही हायर सेंटर रेफर किए जाते हैं। उपकरणों और विशेषज्ञों के अभाव में घायलों या गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर रेफर कर देते हैं। दिन में मरीज भर्ती कर शाम तक डिस्चार्ज करने के सवाल पर चिकित्साधिकारी बोले- मरीज ही नहीं रुकते।
सीएचसी पर भर्ती मिलीं प्रसूताएं, वार्ड में एक-दो मरीज
- सीएचसी फरीदपुर की इमरजेंसी में माहभर में 60 मरीज भर्ती हुए। इनमें से 17 प्रसूताएं और एक अन्य मरीज ही 24 घंटे से अधिक समय तक भर्ती रहे।
- भोजीपुरा में एक भी मरीज 24 घंटे से अधिक समय तक भर्ती नहीं रहा। डॉ. अजयपाल गंगवार ने कहा कि उपकरण और विशेषज्ञ न होने से रेफर करना पड़ता है।
- नवाबगंज में 17 गर्भवती और दो बुखार से पीड़ित मरीज भर्ती हुए। डॉ. अमित गंगवार ने कहा कि मरीज की हालत बिगड़ने पर ही रेफर करते हैं।
- मीरगंज में माह में भर्ती 86 मरीजों में से 48 गर्भवती रहीं। 24 घंटे में भर्ती 11 मरीजों में से नौ डिस्चार्ज हुए। डॉ. वैभव राठौर ने कहा कि गंभीर मरीजों को ही रेफर करते हैं।
- फतेहगंज पश्चिमी में माहभर में 43 मरीज भर्ती हुए। गर्भवती ही 24 घंटे से अधिक भर्ती रहीं। डॉ. संचित शर्मा ने कहा कि विशेषज्ञ मिलें तो मरीजों को रेफर नहीं किया जाएगा।
जिम्मेदार बोले- सीएमओ को लगातार भेज रहे हैं पत्र
जिला अस्पताल के एडी एसआईसी डॉ. आरसी दीक्षित ने कहा कि जिन मरीजों का इलाज सीएचसी पर हो सकता है, उन्हें भी रेफर किए जाने की जानकारी देते हुए सीएमओ से अंकुश लगाने के लिए कहा गया है। हालांकि, अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद ने कहा कि फर्स्ट रेफरल यूनिट बनने के बाद अब गर्भवतियों के रेफर होने के मामले कम हुए हैं, पर अब भी गैरजरूरी रेफरल केस अधिक हैं।
परिजन बोले- रेफर से परेशान होता है परिवार
बेटे को कमजोरी हो रही थी और चक्कर आ रहे थे। गिरने से चोट लग गई थी। सीएचसी पर पट्टी कर रेफर कर दिया। यहां आए तो डॉक्टर ने दवाएं दीं और 24 घंटे के बाद घर भेजने के लिए कहा है। - नफीसा, अटामांडा
पिता के पैर के अंगूठे में सांप ने काट लिया था। सीएचसी पर एंटी स्नेक वेनम लगाकर रेफर कर दिया। उन्होंने जहर चढ़ने जैसी कोई शिकायत नहीं की। अब बेड पर लेटकर परेशान हैं। - नईम हसन, भोजीपुरा