{"_id":"64614e5e07686fb999034d15","slug":"rashmi-got-the-benefit-of-the-split-of-muslim-votes-baheri-news-c-4-1-154653-2023-05-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: मुस्लिम वोटों के बिखराव का रश्मि को मिला फायदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: मुस्लिम वोटों के बिखराव का रश्मि को मिला फायदा
Mon, 15 May 2023 02:40 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 15 May 2023 02:40 AM IST
विज्ञापन
बहेड़ी। मुस्लिम वोटों के बिखराव का लाभ भाजपा को खूब मिला। मुस्लिम बूथों पर भाजपा को छोड़कर सभी प्रत्याशियों को खूब वोट मिले। रश्मि जायसवाल को 11 हजार 179 वोट मिले। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा समर्थित प्रत्याशी उजमा रशीद को 2305 मतों से हराया। उजमा को 8874 मत मिले। बसपा प्रत्याशी फौजुल नसीम को 6183, कांग्रेस प्रत्याशी मैनाज को 2810, एआईएमआईएम प्रत्याशी रजिया बी को 4328, निर्दलीय गजाला सलीक को 4645 मत मिले। अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में कुल 40548 लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया। हालांकि पहली बार कुछ मुस्लिम बूथों पर भाजपा को भी इक्का-दुक्का वोट मिले हैं। इनमें पालिका के वार्ड बाजार, लाइनपार, शेरनगर, शाहगढ़, शेखपुरा शामिल हैं।
भाजपा में भीतरघात भी न रोक सका जीत
भाजपा के एक गुट ने रश्मि जायसवाल को टिकट न दिए जाने के लिए पूरा जोर लगाया था। इसमें जिले के एक पूर्व विधायक का नाम भी उछला था। लेकिन टिकट को लेकर सांसद संतोष गंगवार रश्मि जायसवाल के साथ खड़े रहे। टिकट मिलने के बाद संतोष गंगवार ने रश्मि जायसवाल के पक्ष में कई सभाएं कीं। भीतरघात करने वालों को भी चेताया था। उनकी हकीकत आलाकमान तक पहुंचाई गई थी। वहीं सपा समर्थित प्रत्याशी उजमा रशीद को विधायक अताउर्रहमान ने खुलकर चुनाव लड़ाया था। मतदाताओं से बार-बार सम्मान देने की बात कही।
35 साल बाद दूसरा समुदाय को मिली विजय
वर्ष 1988 में नंदलाल सरन की जीत के करीब 35 साल बाद किसी हिंदू प्रत्याशी को नगर पालिका अध्यक्ष का पद नसीब हुआ है। भाजपा प्रत्याशी रश्मि जायसवाल को बहेड़ी से लगातार तीन हार के बाद चौथी बार में जीत हासिल हुई। पहले दो बार रश्मि के पति अजय जायसवाल चुनाव हार चुके हैं। पिछला चुनाव रश्मि ने भाजपा से ही लड़ा और 1600 मतों से हार गई थीं। चौथी बार उन्हें जनादेश मिला।
विज्ञापन
संकल्प
-नगर पालिका को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना।
- पालिका के भूखंडों से अवैध कब्जे हटवाना।
- महिलाओं के उत्थान की योजना को लागू कराना।
-.हर घर तक पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराना।
- बच्चो के खेलकूद के लिए पार्क बनवाना।
- बुजुर्गों के लिए हाईटैक पार्क बनाना।
विज्ञापन
भाजपा में भीतरघात भी न रोक सका जीत
भाजपा के एक गुट ने रश्मि जायसवाल को टिकट न दिए जाने के लिए पूरा जोर लगाया था। इसमें जिले के एक पूर्व विधायक का नाम भी उछला था। लेकिन टिकट को लेकर सांसद संतोष गंगवार रश्मि जायसवाल के साथ खड़े रहे। टिकट मिलने के बाद संतोष गंगवार ने रश्मि जायसवाल के पक्ष में कई सभाएं कीं। भीतरघात करने वालों को भी चेताया था। उनकी हकीकत आलाकमान तक पहुंचाई गई थी। वहीं सपा समर्थित प्रत्याशी उजमा रशीद को विधायक अताउर्रहमान ने खुलकर चुनाव लड़ाया था। मतदाताओं से बार-बार सम्मान देने की बात कही।
विज्ञापन
35 साल बाद दूसरा समुदाय को मिली विजय
वर्ष 1988 में नंदलाल सरन की जीत के करीब 35 साल बाद किसी हिंदू प्रत्याशी को नगर पालिका अध्यक्ष का पद नसीब हुआ है। भाजपा प्रत्याशी रश्मि जायसवाल को बहेड़ी से लगातार तीन हार के बाद चौथी बार में जीत हासिल हुई। पहले दो बार रश्मि के पति अजय जायसवाल चुनाव हार चुके हैं। पिछला चुनाव रश्मि ने भाजपा से ही लड़ा और 1600 मतों से हार गई थीं। चौथी बार उन्हें जनादेश मिला।
विज्ञापन
संकल्प
-नगर पालिका को भ्रष्टाचार से मुक्त कराना।
- पालिका के भूखंडों से अवैध कब्जे हटवाना।
- महिलाओं के उत्थान की योजना को लागू कराना।
-.हर घर तक पीने का शुद्ध पानी मुहैया कराना।
- बच्चो के खेलकूद के लिए पार्क बनवाना।
- बुजुर्गों के लिए हाईटैक पार्क बनाना।