{"_id":"6ac14f961d3d4298910789b4","slug":"ramlila-rehearsal-professors-and-the-manager-are-also-memorizing-their-lines-bareilly-news-c-4-bly1015-980190-2026-10-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: रामलीला का पूर्वाभ्यास... प्रोफेसर और मैनेजर भी याद कर रहे संवाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: रामलीला का पूर्वाभ्यास... प्रोफेसर और मैनेजर भी याद कर रहे संवाद
Sun, 04 Oct 2026 12:25 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sun, 04 Oct 2026 12:25 AM IST
विज्ञापन
बरेली। सुभाषनगर में 85 वर्षों से चली आ रही ऐतिहासिक रामलीला कई मायनों में खास है। इसके अधिकतर किरदार छात्र और नौकरीपेशा हैं। प्राइवेट फर्म में मैनेजर के पद पर कार्यरत नितिन जौहरी एक दशक से हनुमान का किरदार निभा रहे हैं। ऑफिस से लौटने के बाद वह पूर्वाभ्यास करते हैं। प्राइवेट नौकरी करने वाले दीपक रावण का किरदार निभाते हैं। अजय सक्सेना रुद्रपुर से अवकाश लेकर यहां सुलोचना का किरदार निभाने आते हैं।
प्रो. अजय शर्मा ने 20 साल तक राम का किरदार निभाया। अब वह अन्य किरदार निभा रहे हैं। युवा पीढ़ी की बात करें तो सिद्धार्थ क्षत्रिय, देव चौधरी और वृंदा वाजपेई क्रमश: राम, लक्ष्मण और सीता का किरदार निभा रहे हैं। कॉलेज की पढ़ाई के बाद शाम को ये सभी युवा मंचन का पूर्वाभ्यास करते हैं। समिति से जुड़े आलोक तायल बताते हैं कि अब मंच पर पुरुषों के साथ युवतियां भी सीता और अन्य प्रमुख भूमिकाएं निभा रही हैं।
इस रामलीला में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष अशोक शर्मा और डायरेक्टर अखिलेश सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाली इस रामलीला में दो वर्षों से ड्रोन के जरिये संजीवनी बूटी मंगवाने जैसे दृश्य दिखाए जा रहे हैं। भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का यह प्रयास शहरवासियों के लिए मिसाल बन गया है।
विज्ञापन
अंग्रेजी हुकूमत में शुरू हुआ था मंचन
वर्ष 1940 में जब इस रामलीला का मंचन शुरू हुआ तो देश में ब्रिटिश शासन था। उस दौर में लोग लालटेन की रोशनी में जमीन पर बोरे बिछाकर रामलीला देखने जुटते थे। सालभर इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार किया जाता था। वक्त बदला, देश आजाद हुआ और रामलीला के लिए निश्चित मैदान तैयार किया गया। अब इसमें आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और तकनीक का इस्तेमाल भी हो रहा है। हालांकि, सुभाषनगर के लोगों का रामलीला के प्रति उत्साह आठ दशक पहले जैसा ही है।
विज्ञापन
प्रो. अजय शर्मा ने 20 साल तक राम का किरदार निभाया। अब वह अन्य किरदार निभा रहे हैं। युवा पीढ़ी की बात करें तो सिद्धार्थ क्षत्रिय, देव चौधरी और वृंदा वाजपेई क्रमश: राम, लक्ष्मण और सीता का किरदार निभा रहे हैं। कॉलेज की पढ़ाई के बाद शाम को ये सभी युवा मंचन का पूर्वाभ्यास करते हैं। समिति से जुड़े आलोक तायल बताते हैं कि अब मंच पर पुरुषों के साथ युवतियां भी सीता और अन्य प्रमुख भूमिकाएं निभा रही हैं।
विज्ञापन
इस रामलीला में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। कमेटी के अध्यक्ष अशोक शर्मा और डायरेक्टर अखिलेश सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाली इस रामलीला में दो वर्षों से ड्रोन के जरिये संजीवनी बूटी मंगवाने जैसे दृश्य दिखाए जा रहे हैं। भारतीय संस्कृति से नई पीढ़ी को जोड़ने का यह प्रयास शहरवासियों के लिए मिसाल बन गया है।
विज्ञापन
अंग्रेजी हुकूमत में शुरू हुआ था मंचन
वर्ष 1940 में जब इस रामलीला का मंचन शुरू हुआ तो देश में ब्रिटिश शासन था। उस दौर में लोग लालटेन की रोशनी में जमीन पर बोरे बिछाकर रामलीला देखने जुटते थे। सालभर इस आयोजन का बेसब्री से इंतजार किया जाता था। वक्त बदला, देश आजाद हुआ और रामलीला के लिए निश्चित मैदान तैयार किया गया। अब इसमें आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और तकनीक का इस्तेमाल भी हो रहा है। हालांकि, सुभाषनगर के लोगों का रामलीला के प्रति उत्साह आठ दशक पहले जैसा ही है।