संयोग: इस बार एक साथ होगी आरती और अजान, 22 मार्च से नवरात्रि, 23 या 24 से शुरू होंगे रमजान
इस बार चैत्र नवरात्रि के दौरान ही रमजान का पवित्र माह शुरू हो रहा है। ऐसे में संयोग बनेगा कि आरती और अजान एक ही समय होगी।
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हिंदू-मुस्लिम समुदाय पर्वों में इस बार आस्था का अनूठा संगम देखने के लिए मिलेगा। कारण है कि इस बार चैत्र नवरात्रि के साथ ही रमजान का पवित्र माह शुरू हो रहा है। ऐसे में संयोग बनेगा कि आरती और अजान एक ही समय होगी। चैत्र नवरात्रि जहां 22 मार्च से तो रमजान का पवित्र माह 23 मार्च या 24 मार्च से शुरू होगा।
बरेली के आचार्य प्रखर मिश्रा ने बताया कि बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 22 मार्च को है। इसी दिन से नव संवत्सर की भी शुरुआत हो जाती है। पूरे नौ दिन के नवरात्रि में मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आएंगी और डोली में प्रस्थान करेंगी।
आचार्य ने बताया कि नवरात्रि इस बार बुधवार से शुरू हो रहे है जो 30 मार्च तक रहेगी। प्रतिपदा तिथि 21 मार्च रात में 10.52 बजे शुरू होगी और 22 मार्च को रात 8.20 बजे तक रहेगी। ऐसे में 22 मार्च को सूर्योदय के साथ नवरात्रि की शुरुआत होगी और कलश स्थापना की जाएगी।
इन योगों का बन रहा महासंयोग
आचार्य प्रखर मिश्रा के मुताबिक इस बार चैत्र नवरात्रि की शुरुआत शुभ संयोग में हो रही है। ग्रहों के इस विशेष योग में पांच ग्रह एक साथ मीन राशि में संयोग बनाकर गोचर कर रहे होंगे। कई शुभ योग जैसे गजकेसरी योग, बुधादित्य योग, हंस योग, शश योग, धर्मात्मा और राज लक्षण योग का शुभ संयोग भक्तों के लिए विशेष फलदायी रहने वाला है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
घटस्थापना मुहूर्त : 22 मार्च को सुबह 6:23 बजे से सुबह 7:32 बजे तक
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ : 21 मार्च को रात 10.52 बजे से
प्रतिपदा तिथि समाप्त : 22 मार्च को रात 8.20 बजे
इबादत से पूरी होती हैं दुआएं
पुरबा बब्बन खान साबरी मस्जिद सुभाषनगर के मुतवल्ली इसराफील खान राशमी बताया कि रमजान अल्लाह की इबादत का पाक महीना होता है। यह पवित्र महीना चांद के दीदार के साथ शुरू होगा। यदि 22 मार्च को चांद का दीदार होगा तो पहला रोजा 23 मार्च को होगा और यदि 23 मार्च को चांद दिखेगा तो पहला रोजा 24 मार्च को होगा।
रमजान बुराई को खत्म करने, गलत कार्यों से परहेज करने, जरूरतमंदों की मदद करने व अल्लाह को राजी करने का महीना है। यह बरकतों का महीना है। सभी अमन व शांति का माहौल बनाए रखें और एक दूसरे धर्म का सम्मान करते हुए अल्लाह की इबाबत करें।