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रेल कोच कैफे : तीन बार निकले टेंडर, आगे नहीं आई कोई फर्म
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बरेली। जंक्शन पर रेल कोच कैफे व रेस्टोरेंट के लिए दो साल से प्रक्रिया चल रही है, पर अब तक कोई फर्म आगे नहीं आई है। इसके लिए तीन बार टेंडर भी निकाले जा चुके हैं, लेकिन प्रकिया आगे नहीं बढ़ पा रही।
जंक्शन पर रोजाना औसतन 190 ट्रेनों का ठहराव और 30-35 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। इज्जतनगर स्टेशन पर 18 महीने पहले दो कोच का रेल कोच कैफे और रेस्टोरेंट खोला गया था। यहां रोजाना काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसमें पार्टियों का आयोजन भी होता है।
इज्जतनगर स्टेशन पर अच्छे परिणाम मिलने के बाद जंक्शन पर भी रेल कोच कैफे व रेस्टोरेंट खोलने की कवायद शुरू की गई थी, मगर निजी फर्म आगे ही नहीं आ रहीं। अब एक बार फिर कवायद की जा रही है। इसके लिए दूसरा उपयुक्त स्थान तलाश किया जा रहा है।
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ये हैं प्रमुख कारण
जंक्शन के आसपास काफी संख्या में छोटे और बड़े होटलों के साथ रेस्टोरेंट भी हैं। रेहड़ी-पटरी वाले भी काफी संख्या में हैं। दूसरी ओर, इज्जतनगर स्टेशन के आसपास ऐसी व्यवस्था नहीं है। जंक्शन पर रेल कोच रेस्टोरेंट के लिए जो स्थान तय किया गया है, वह सर्कुलेटिंग एरिया में है। यहां ऑटो और ई-रिक्शा चालकों का जमावड़ा रहता है।
जंक्शन पर रेल कोच कैफे खोलने के लिए मंडल स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। इसके संचालन का काम निजी फर्म को दिया जाना है। अनुबंध पर निजी फर्म मिलने के बाद आवंटन कर दिया जाएगा। - आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम
संवाद
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जंक्शन पर रोजाना औसतन 190 ट्रेनों का ठहराव और 30-35 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। इज्जतनगर स्टेशन पर 18 महीने पहले दो कोच का रेल कोच कैफे और रेस्टोरेंट खोला गया था। यहां रोजाना काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसमें पार्टियों का आयोजन भी होता है।
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इज्जतनगर स्टेशन पर अच्छे परिणाम मिलने के बाद जंक्शन पर भी रेल कोच कैफे व रेस्टोरेंट खोलने की कवायद शुरू की गई थी, मगर निजी फर्म आगे ही नहीं आ रहीं। अब एक बार फिर कवायद की जा रही है। इसके लिए दूसरा उपयुक्त स्थान तलाश किया जा रहा है।
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ये हैं प्रमुख कारण
जंक्शन के आसपास काफी संख्या में छोटे और बड़े होटलों के साथ रेस्टोरेंट भी हैं। रेहड़ी-पटरी वाले भी काफी संख्या में हैं। दूसरी ओर, इज्जतनगर स्टेशन के आसपास ऐसी व्यवस्था नहीं है। जंक्शन पर रेल कोच रेस्टोरेंट के लिए जो स्थान तय किया गया है, वह सर्कुलेटिंग एरिया में है। यहां ऑटो और ई-रिक्शा चालकों का जमावड़ा रहता है।
जंक्शन पर रेल कोच कैफे खोलने के लिए मंडल स्तर पर प्रक्रिया चल रही है। इसके संचालन का काम निजी फर्म को दिया जाना है। अनुबंध पर निजी फर्म मिलने के बाद आवंटन कर दिया जाएगा। - आदित्य गुप्ता, सीनियर डीसीएम
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