{"_id":"650a07c31753954d640fecf4","slug":"queue-of-skin-patients-with-viral-fever-bareilly-news-c-4-bly1005-251145-2023-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: वायरल बुखार के साथ त्वचा रोगियों की कतार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: वायरल बुखार के साथ त्वचा रोगियों की कतार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। जिला अस्पताल व 300 बेड अस्पताल में वायरल बुखार के मरीजों की कतार लग रही है। मंगलवार को दोनों अस्पतालों की ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे दो हजार मरीजों में से 275 बुखार की चपेट में रहे। 200 त्वचा रोगी भी इलाज के लिए पहुंचे।
300 बेड अस्पताल में पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टरों के कक्ष समेत दवा वितरण काउंटर पर कतार लगी रही। फिजीशिएन डॉ. अतुल कटियार ने बताया कि रोज 800 मरीजों की ओपीडी हो रही है। इनमें 70 फीसदी मरीज खांसी, जुकाम और बुखार के आ रहे हैं। अब तक बुखार के 15 फीसदी मरीज टायफाइड की चपेट में मिले हैं। हालांकि, कोई डेंगू या मलेरिया की चपेट में नहीं मिला है।
ओपीडी के एक मरीज ने डॉक्टर को बताया कि उसने बुखार के बाद जांच कराई तो सब कुछ सामान्य निकला पर बुखार बरकरार है। डॉक्टर ने कहा कि शरीर में कमजोरी और मौसम में बदलाव से बुखार जैसा महसूस होता है पर वह बुखार नहीं। दवा बदलने का परामर्श दिया।
विज्ञापन
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति मोरे के कक्ष में मरीजों लंबी कतार दिखी। बताया कि अभी फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के मरीज आ रहे हैं। इसकी वजह, बदलते मौसम के साथ सफाई और पर्सनल हाइजीन की उपेक्षा है। ओपीडी में रोजाना 200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। जागरूकता के अभाव से सिर्फ 50 फीसदी मरीज ही दवाओं का नियमित सेवन करते हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ के मुताबिक पसीना न सूखने से घमौरियां, खुजली और दाद होता है। नमीयुक्त वातावरण में न रहने, टाइट कपड़े व जींस न पहनने, त्वचा रोगी का बेड, तौलिया व साबुन इस्तेमाल नहीं करने, कपड़े भी सुखाकर पहनने को कहा। इन सब उपायों से काफी हद तक त्वचा रोगों से बचाव हो सकता है। दिक्कत बढ़ने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
विज्ञापन
300 बेड अस्पताल में पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टरों के कक्ष समेत दवा वितरण काउंटर पर कतार लगी रही। फिजीशिएन डॉ. अतुल कटियार ने बताया कि रोज 800 मरीजों की ओपीडी हो रही है। इनमें 70 फीसदी मरीज खांसी, जुकाम और बुखार के आ रहे हैं। अब तक बुखार के 15 फीसदी मरीज टायफाइड की चपेट में मिले हैं। हालांकि, कोई डेंगू या मलेरिया की चपेट में नहीं मिला है।
विज्ञापन
ओपीडी के एक मरीज ने डॉक्टर को बताया कि उसने बुखार के बाद जांच कराई तो सब कुछ सामान्य निकला पर बुखार बरकरार है। डॉक्टर ने कहा कि शरीर में कमजोरी और मौसम में बदलाव से बुखार जैसा महसूस होता है पर वह बुखार नहीं। दवा बदलने का परामर्श दिया।
विज्ञापन
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति मोरे के कक्ष में मरीजों लंबी कतार दिखी। बताया कि अभी फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन के मरीज आ रहे हैं। इसकी वजह, बदलते मौसम के साथ सफाई और पर्सनल हाइजीन की उपेक्षा है। ओपीडी में रोजाना 200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। जागरूकता के अभाव से सिर्फ 50 फीसदी मरीज ही दवाओं का नियमित सेवन करते हैं।
त्वचा रोग विशेषज्ञ के मुताबिक पसीना न सूखने से घमौरियां, खुजली और दाद होता है। नमीयुक्त वातावरण में न रहने, टाइट कपड़े व जींस न पहनने, त्वचा रोगी का बेड, तौलिया व साबुन इस्तेमाल नहीं करने, कपड़े भी सुखाकर पहनने को कहा। इन सब उपायों से काफी हद तक त्वचा रोगों से बचाव हो सकता है। दिक्कत बढ़ने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।