{"_id":"69e53f569e0ede5b0a06ca50","slug":"questions-raised-over-ro-plant-under-construction-at-bareilly-college-silence-on-budget-bareilly-news-c-4-bly1053-867456-2026-04-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bareilly News: बरेली कॉलेज में बन रहे आरओ प्लांट पर सवाल, बजट पर चुप्पी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bareilly News: बरेली कॉलेज में बन रहे आरओ प्लांट पर सवाल, बजट पर चुप्पी
Mon, 20 Apr 2026 02:17 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 20 Apr 2026 02:17 AM IST
विज्ञापन
बरेली। बरेली कॉलेज में छात्र-छात्राओं के लिए करीब 5000 लीटर क्षमता का आरओ प्लांट बनाया जा रहा है, जिस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लाखों का रुपये खर्च होने के बावजूद इसमें पुराने सामान का इस्तेमाल किया जा रहा है। बजट एक लाख से कम बताकर बिना टेंडर के काम कराया जा रहा है, लेकिन कॉलेज प्रशासन इस परियोजना के संयुक्त बजट पर चुप्पी साधे हुए है।
कॉलेज प्रशासन का दावा है कि यह प्लांट दो हजार से पांच हजार लीटर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएगा। इससे कॉलेज का जो पैसा हर विभाग में पानी की व्यवस्था करने में खर्च होता है, उससे बचत होगी। हालांकि, इस आरओ प्लांट के टीन शेड के निर्माण में पुराने लोहे का उपयोग किया जा रहा है। कॉलेज में चर्चा है कि इस कार्य में दो फर्म लगी हैं। इनमें से एक फर्म बहेड़ी से ब्लैकलिस्टेड बताई जा रही है, जिसे बिना टेंडर प्रक्रिया के ही लाखों रुपये का काम दे दिया गया है। टेंडर से बचने के लिए सिविल और प्लांट मशीन संबंधी कार्यों को अलग-अलग कराया जा रहा है। डीएसडब्ल्यू प्रो. एमबी कलहंस ने बताया कि उन्हें कॉलेज में आरओ प्लांट बनने की जानकारी ही नहीं है। पंचायती विभाग के इंजीनियर अतर सिंह ने कहा कि कॉलेज की ओर से कम से कम पैसे में काम कराने का अनुरोध किया गया था। इसलिए केवल टीन शेड का अनुमानित बजट तैयार हुआ। प्लांट की मशीन कहां से आ रही है और उसका खर्च क्या है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने केवल इतना बताया कि इस प्लांट के विषय में प्रबंध समिति के सचिव के सामने बैठक हुई थी और उन्हें इसकी जानकारी है।
विज्ञापन
कॉलेज प्रशासन का दावा है कि यह प्लांट दो हजार से पांच हजार लीटर स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएगा। इससे कॉलेज का जो पैसा हर विभाग में पानी की व्यवस्था करने में खर्च होता है, उससे बचत होगी। हालांकि, इस आरओ प्लांट के टीन शेड के निर्माण में पुराने लोहे का उपयोग किया जा रहा है। कॉलेज में चर्चा है कि इस कार्य में दो फर्म लगी हैं। इनमें से एक फर्म बहेड़ी से ब्लैकलिस्टेड बताई जा रही है, जिसे बिना टेंडर प्रक्रिया के ही लाखों रुपये का काम दे दिया गया है। टेंडर से बचने के लिए सिविल और प्लांट मशीन संबंधी कार्यों को अलग-अलग कराया जा रहा है। डीएसडब्ल्यू प्रो. एमबी कलहंस ने बताया कि उन्हें कॉलेज में आरओ प्लांट बनने की जानकारी ही नहीं है। पंचायती विभाग के इंजीनियर अतर सिंह ने कहा कि कॉलेज की ओर से कम से कम पैसे में काम कराने का अनुरोध किया गया था। इसलिए केवल टीन शेड का अनुमानित बजट तैयार हुआ। प्लांट की मशीन कहां से आ रही है और उसका खर्च क्या है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। प्राचार्य प्रो. ओपी राय ने केवल इतना बताया कि इस प्लांट के विषय में प्रबंध समिति के सचिव के सामने बैठक हुई थी और उन्हें इसकी जानकारी है।
विज्ञापन