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मदरसों के लिए हुकूमत की पॉलिसी पर उठा सवाल
बरेली।
Updated Tue, 14 Nov 2017 02:10 AM IST
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आला हजरत के 99वें उर्स के मौके पर देश के मुसलमानों के आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए गहन विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद राष्ट्रीय एजेंडा जारी कर उसे राष्ट्रपति को भेजा गया। इस दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ और मदरसे के लिए सरकार की पॉलिसी पर सवाल उठाया गया।
मदरसे के मुद्दे पर उलमा ने चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के नए आदेशों से मदरसों में डर का माहौल है। लिहाजा सरकार अपनी नीतियों को मदरसों पर न थोपे। संविधान में अपनी धार्मिक शिक्षा के लिए मदरसे स्थापित करने और उन्हें चलाने की स्वतंत्रता दी गई है। जिस तरह संस्कृत पाठशालाओं को छूट है, उसी तरह मदरसों को डिजिटल रजिस्ट्रेशन से अलग रखा जाए। पोर्टल में रजिस्ट्रेशन के नाम पर सरकार के कर्मचारी मोटी रकम ले रहे हैं और बार-बार नई चीजें पैदा करते हैं, इसे बंद किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि मदरसों को आरोपों से बचाने के लिए केंद्रीय मदरसा बोर्ड बनाया जाए, जिसका प्रतिनिधित्व मुस्लिम को सौंपा जाए। इसके अलावा यह बात भी उठाई गई कि बिहार राज्य में पिछले 10 सालों से मदरसों की मान्यता बंद है और उत्तर प्रदेश में दो साल से मान्यता बंद है। इन प्रदेशों में फौरन मंजूरी की प्रक्रिया शुरू हो।
मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुद्दे पर साफ कहा गया कि इसमें सरकारों का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देश में लव जिहाद और गोरक्षा के नाम पर फैलाई जा रही सांप्रदायिकता को रोकने के लिए उचित कार्रवाई हो। बंगाल, दिल्ली एवं हरियाणा सरकार की तरह अन्य प्रदेशों में भी मस्जिद के इमामों का वेतन और व्यवस्थाएं वक्फ बोर्ड द्वारा की जाएं। केंद्रीय हज कमेटी, केंद्रीय वक्फ काउंसिल, प्रदेश की हज कमेटी और उर्दू कमेटियों में 80 प्रतिशत सुन्नी बरेलवियों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके अलावा यह भी कहा गया कि कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश हिंदुस्तान का अटूट हिस्सा है, इस पर विदेशी दबाव कबूल नहीं किया जाएगा। कश्मीर समस्या न गोली से न गाली से बल्कि बातचीत से हल हो। हम आतंकवाद के खात्मे की हिमायत करते है और दहशतगर्दी के खिलाफ मुहिम चलाएंगे।
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यह एजेंडा ऑल इंडिया जमात रजा ए मुस्तफा, तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम और रजा एकेडमी की विशेष बैठक में पास किया गया। यह बैठक जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शहर काजी मौलना असजद रजा खां कादरी की सरपरस्ती में संपन्न हुई। अध्यक्षता रजा एकेडमी मुंबई के चेयरमैन मौलना सईद नूरी और संचालन जमात के महासचिव मौलना शहाबुद्दीन ने किया। चर्चा के बाद एजेंडा को बिंदुवार तैयार करके जमात के सचिव नाजिम बेग ने पढ़कर सुनाया। बैठक में मौलना उस्मान गनी बापो (गुजरात), मौलना मजहर इमाम (बंगाल), मुफ़्ती अशफाक हुसैन, कारी सगीर अहमद (दिल्ली), मौलाना सखी खां (जम्मू कश्मीर), खलील रजवी (राजस्थान), जाहिद रजा (उत्तराखंड), मुफ्ती फारूख आलिम (पंजाब), मौलना वजीर, शेख नोफल नूरानी (केरल), मौलाना आजम कादरी (लखनऊ) मौजूद रहे।
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मदरसे के मुद्दे पर उलमा ने चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के नए आदेशों से मदरसों में डर का माहौल है। लिहाजा सरकार अपनी नीतियों को मदरसों पर न थोपे। संविधान में अपनी धार्मिक शिक्षा के लिए मदरसे स्थापित करने और उन्हें चलाने की स्वतंत्रता दी गई है। जिस तरह संस्कृत पाठशालाओं को छूट है, उसी तरह मदरसों को डिजिटल रजिस्ट्रेशन से अलग रखा जाए। पोर्टल में रजिस्ट्रेशन के नाम पर सरकार के कर्मचारी मोटी रकम ले रहे हैं और बार-बार नई चीजें पैदा करते हैं, इसे बंद किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि मदरसों को आरोपों से बचाने के लिए केंद्रीय मदरसा बोर्ड बनाया जाए, जिसका प्रतिनिधित्व मुस्लिम को सौंपा जाए। इसके अलावा यह बात भी उठाई गई कि बिहार राज्य में पिछले 10 सालों से मदरसों की मान्यता बंद है और उत्तर प्रदेश में दो साल से मान्यता बंद है। इन प्रदेशों में फौरन मंजूरी की प्रक्रिया शुरू हो।
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मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुद्दे पर साफ कहा गया कि इसमें सरकारों का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। देश में लव जिहाद और गोरक्षा के नाम पर फैलाई जा रही सांप्रदायिकता को रोकने के लिए उचित कार्रवाई हो। बंगाल, दिल्ली एवं हरियाणा सरकार की तरह अन्य प्रदेशों में भी मस्जिद के इमामों का वेतन और व्यवस्थाएं वक्फ बोर्ड द्वारा की जाएं। केंद्रीय हज कमेटी, केंद्रीय वक्फ काउंसिल, प्रदेश की हज कमेटी और उर्दू कमेटियों में 80 प्रतिशत सुन्नी बरेलवियों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसके अलावा यह भी कहा गया कि कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश हिंदुस्तान का अटूट हिस्सा है, इस पर विदेशी दबाव कबूल नहीं किया जाएगा। कश्मीर समस्या न गोली से न गाली से बल्कि बातचीत से हल हो। हम आतंकवाद के खात्मे की हिमायत करते है और दहशतगर्दी के खिलाफ मुहिम चलाएंगे।
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यह एजेंडा ऑल इंडिया जमात रजा ए मुस्तफा, तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम और रजा एकेडमी की विशेष बैठक में पास किया गया। यह बैठक जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शहर काजी मौलना असजद रजा खां कादरी की सरपरस्ती में संपन्न हुई। अध्यक्षता रजा एकेडमी मुंबई के चेयरमैन मौलना सईद नूरी और संचालन जमात के महासचिव मौलना शहाबुद्दीन ने किया। चर्चा के बाद एजेंडा को बिंदुवार तैयार करके जमात के सचिव नाजिम बेग ने पढ़कर सुनाया। बैठक में मौलना उस्मान गनी बापो (गुजरात), मौलना मजहर इमाम (बंगाल), मुफ़्ती अशफाक हुसैन, कारी सगीर अहमद (दिल्ली), मौलाना सखी खां (जम्मू कश्मीर), खलील रजवी (राजस्थान), जाहिद रजा (उत्तराखंड), मुफ्ती फारूख आलिम (पंजाब), मौलना वजीर, शेख नोफल नूरानी (केरल), मौलाना आजम कादरी (लखनऊ) मौजूद रहे।