UP: काजी-ए-हिंदुस्तान बोले- वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा पर हमारा संवैधानिक अधिकार; देशभर में चलाएंगे अभियान
बरेली मरकज के उलमा ने वक्फ संशोधन बिल का विरोध किया है। इसे लेकर बृहस्पतिवार रात को बैठक हुई, जिसमें बड़ा फैसला लिया जाएगा। बताया गया है कि वक्फ के मुद्दे पर देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
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काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मुहम्मद असजद रजा खां कादरी ने वक्फ संशोधन बिल को साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि यह बिल संशोधन के नाम पर साजिश है। जब कानून सबके लिए बराबरी का न हो तो वह पक्षपाती बन जाता है। काजी-ए-हिंदुस्तान की अध्यक्षता में वक्फ संपत्ति की सुरक्षा और इसके संवैधानिक अधिकारों को लेकर बरेली मरकज में बृहस्पतिवार रात बैठक हुई। इसमें उलमा, वकीलों व कोर कमेटी के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में फैसला लिया गया कि इस मुद्दे पर देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
काजी-ए-हिंदुस्तान ने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने अपनी कीमती जायदादें अल्लाह की राह में वक्फ (दान) की थीं ताकि वे हमेशा के लिए धार्मिक, शैक्षिक और कल्याणकारी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल हों। भारतीय संविधान के तहत हमें अपनी वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और उनके सही उपयोग का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। उन्होंने वक्फ संशोधन बिल के संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त किए।
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'संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन'
उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन बिल संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत मुसलमानों को प्राप्त धार्मिक मामलों के प्रबंधन के अधिकार का उल्लंघन करता है। वक्फ संपत्ति अल्लाह के नाम पर निहित एक धार्मिक संपत्ति है, जो इस्लामी परंपरा में सादका जारिया, दान और समुदाय कल्याण के मूल्यों का प्रतीक है। उन्होंने बिल को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों के खिलाफ एक असंवैधानिक प्रयास बताया गया।
'जो शरीयत के खिलाफ, उसे हम नहीं मानते'
उलमा ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, प्रबंधन और इसके कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श करना, खासकर वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के संबंध में जो संसद में पारित हुआ है। उलमा के साथ-साथ वकीलों ने भी सख्त लफ्जों में बिल की निंदा की और कहा कि जो शरीयत के खिलाफ हों, उसको हम नहीं मानते हैं।
जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खान (सलमान मियां) ने कहा कि संविधान हमें अपने मौलिक अधिकारों के तहत वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए अपनी आवाज बुलंद करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। संविधान का अनुच्छेद 25 और 26 हमें धार्मिक स्वतंत्रता और अपनी धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार देता है, जिसमें वक्फ संपत्तियों का संरक्षण भी शामिल है।
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इसके साथ ही, अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार और अनुच्छेद 21 सम्मानजनक जीवन का अधिकार सुनिश्चित करता है। भारतीय संविधान किसी भी व्यक्ति या समुदाय के मौलिक अधिकारों के हनन की अनुमति नहीं देता और वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण या दुरुपयोग इसी संवैधानिक भावना के खिलाफ है। वक्फ संपत्तियां धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं।
सलमान मियां ने बताया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे को जनता के समक्ष लाने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा। जल्द ही काजी-ए-हिंदुस्तान के आदेश पर देशभर के प्रमुख उलमा की बैठक बुलाई जाएगी।