{"_id":"589374554f1c1b313de83cb1","slug":"put-garbage-in-the-garbage-disposal-issue-leaders","type":"story","status":"publish","title_hn":"नेताओं ने कूड़े में डाल दिया कूड़ा निस्तारण का मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नेताओं ने कूड़े में डाल दिया कूड़ा निस्तारण का मुद्दा
बरेली।
Updated Fri, 03 Feb 2017 12:47 AM IST
विज्ञापन
Put garbage in the garbage disposal issue Leaders
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
2013 में रजऊ परसपुर में करीब 13.84 करोड़ रुपए के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में मशीनें धीरे- धीरे जंग खाने लगी हैं। अब तो कोई ताला खोलने भी नहीं जाता। मीडिया ने मुद्दा जिंदा रखा. वायुसेना ने भी लिखा पढ़ी लेकिन शहर के मेयर और नगरआयुक्त पिछले तीन साल से बंद प्लांट को चालू नहीं कर पाए। मेयर और नगरआयुक्त को कोसना तो बनता है लेकिन एक सवाल यह भी उठता है कि यहां के सांसद विधायक और बाकी नेताओं ने क्या किया? नगर निगम में बहसें हुई और इस मामले को दबाने के लिए सेटिंग की चर्चाएं बाहर आती रही। जो कमियां प्लांट चलाने में आड़े आ रही हैं उसे पूरा करने में नगर निगम ने गंभीर प्रयास किए ही नहीं। हालत ये है कि प्लांट में शहर के जिस कूड़े का प्रयोग होना है वह बाकरगंज में पड़ा सड़ रहा है और कूड़ा उठाने के लिए जो डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना चल रही है उससे सिर्फ पैसे की बर्बादी हुई है। शहर की गलियां अब भी गंदगी से भरी हैं। विधायक और सांसदाें ने इसे कभी मुद्दा बनाया ही नहीं।
इसलिए बंद हुआ प्लांट
प्लांट चलाने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित मानक का पालन नहीं किया गया था। इसलिए ट्रिब्यूनल ने प्लांट चलाने पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट से प्लांट दोबारा चालू कराने का स्टे मिला। मगर, पीसीबी के मानक न पूरे होने के चलते प्लांट नहीं चल पाया। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। एनजीटी ने कहा है कि अगर प्लांट चलाना है तो कमियाें को पूरा करो और पीसीबी का एनओसी दिखाओ। कमी के नाम पर सिर्फ लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट लगाना है जिसमें निगम अभी तक फेल साबित हुआ है।
पीसीबी ने खूब लगाए अड़ंगे
सॉलिड वेस्ट प्लांट को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषित जल निस्तारण और जमीन को लेकर आपत्ति की। जमीन के सात विकल्पाें को भी नकार दिया गया। एयरफोर्स द्वारा ट्रंचिंग ग्राउंड की एनओसी देने के बाद भी प्रदूषण की दृष्टि से बोर्ड को जमीन खटक गई। लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट के विकल्प को नकारा और जब इसकी तकनीक पूछी गई तो हाथ खड़े कर दिए।
विज्ञापन
निगम से लापरवाही भी खूब हुई
1936 में निगम को रजऊ परसपुर पर सॉलिड वेस्ट के लिए जमीन मिली थी। निगम 1989 तक वहां कूड़ा डालता रहा लेकिन इसके बाद यह स्थान बदलकर बाकरगंज पर आ गया। महायोजना 2021 में निगम को चार स्थान दिए गए। इसमें पीलीभीत बाईपास- रिठौरा, मुरादाबाद मार्ग- पिपरिया अहतमाली, सरायतल्फी- बायो मेडिकल वेस्ट के पास और बदायूं रोड- भगवानपुर ठकुरान शामिल हैं। रिपोर्ट पीसीबी को भेजनी थी लेकिन यह मामला भी लटका रहा। अब इन चाराें जगह पर आबादी है।
कूड़े में गवां रहे लाखों, लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ढूंढ रहे एजेंसी
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू करने से पहले लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट शुरू करना जरूरी है। निगम यह प्लांट लगाने के लिए एजेंसी ढूंढ रहा है। पानी साफ करने वाले इस प्लांट के बगैर पूरा प्लांट नहीं शुरू हो सकता। एजेंसी के चक्कर में पार्षद आपस में लड़ रहे हैं। प्लांट लगाने में नहीं बल्कि सेटिंग करने में लोग जुटे हुए हैं।
ट्रंचिंग ग्राउंड की कसरत भी अधूरी
नगर निगम ने नया ट्रंचिंग ग्राउंड तलाशने के लिए दो साल का वक्त लिया। पिछले साल बभिया में सवा सौ बीघा जमीन देखी गई। बभिया के प्रधान समेत आस-पास के ग्रामीणों ने ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने पर आपत्ति की। प्रशासन ने जांच कमेटी बना दी। जांच कमेटी ने ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए इस जमीन के बारे में अपनी आपत्ति दी। उसमें ग्रामीणों की आपत्तियां सही पाई गई।
मौजूदा स्थिति
2011 जनगणना अनुसार साढ़े 9 लाख शहर की आबादी
बाकरगंज के 14 एकड़ में फेंका जा रहा है कूड़ा
रोजाना 350 मीट्रिक टन निकलता है कूड़ा
यहां कूड़ा डालने को जगह नहीं बची है
20 एकड़ की जमीन कूड़ा डंप करने को चाहिए
बभिया में जमीन मिली लेकिन आपत्ति लग गईं
प्लांट का जनता के हित में चालू होना जरूरी है। निगम ने ठीक से पैरवी नहीं की जिससे प्लांट चालू नहीं हो पाया। हमने मामला विधानसभा में उठाया। सफलता नहीं मिली। विधायक बनने पर प्लांट चालू कराने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।
-डा. अरुण कुमार, विधायक शहर
विभिन्न पार्टियों के विधायक या प्रत्याशी अगर नगर निगम पर प्लांट चलाने की जिम्मेदारी डाल रहे हैं तो उनकी और राज्य सरकार की क्या जिम्मेदारी है। क्या कोई प्रत्याशी ये बताएगा कि अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए उनकी अपनी क्या योजना है।
-डा. आईएस तोमर, मेयर
विज्ञापन
इसलिए बंद हुआ प्लांट
प्लांट चलाने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित मानक का पालन नहीं किया गया था। इसलिए ट्रिब्यूनल ने प्लांट चलाने पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट से प्लांट दोबारा चालू कराने का स्टे मिला। मगर, पीसीबी के मानक न पूरे होने के चलते प्लांट नहीं चल पाया। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। एनजीटी ने कहा है कि अगर प्लांट चलाना है तो कमियाें को पूरा करो और पीसीबी का एनओसी दिखाओ। कमी के नाम पर सिर्फ लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट लगाना है जिसमें निगम अभी तक फेल साबित हुआ है।
विज्ञापन
पीसीबी ने खूब लगाए अड़ंगे
सॉलिड वेस्ट प्लांट को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषित जल निस्तारण और जमीन को लेकर आपत्ति की। जमीन के सात विकल्पाें को भी नकार दिया गया। एयरफोर्स द्वारा ट्रंचिंग ग्राउंड की एनओसी देने के बाद भी प्रदूषण की दृष्टि से बोर्ड को जमीन खटक गई। लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट के विकल्प को नकारा और जब इसकी तकनीक पूछी गई तो हाथ खड़े कर दिए।
विज्ञापन
निगम से लापरवाही भी खूब हुई
1936 में निगम को रजऊ परसपुर पर सॉलिड वेस्ट के लिए जमीन मिली थी। निगम 1989 तक वहां कूड़ा डालता रहा लेकिन इसके बाद यह स्थान बदलकर बाकरगंज पर आ गया। महायोजना 2021 में निगम को चार स्थान दिए गए। इसमें पीलीभीत बाईपास- रिठौरा, मुरादाबाद मार्ग- पिपरिया अहतमाली, सरायतल्फी- बायो मेडिकल वेस्ट के पास और बदायूं रोड- भगवानपुर ठकुरान शामिल हैं। रिपोर्ट पीसीबी को भेजनी थी लेकिन यह मामला भी लटका रहा। अब इन चाराें जगह पर आबादी है।
कूड़े में गवां रहे लाखों, लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट के लिए ढूंढ रहे एजेंसी
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू करने से पहले लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट शुरू करना जरूरी है। निगम यह प्लांट लगाने के लिए एजेंसी ढूंढ रहा है। पानी साफ करने वाले इस प्लांट के बगैर पूरा प्लांट नहीं शुरू हो सकता। एजेंसी के चक्कर में पार्षद आपस में लड़ रहे हैं। प्लांट लगाने में नहीं बल्कि सेटिंग करने में लोग जुटे हुए हैं।
ट्रंचिंग ग्राउंड की कसरत भी अधूरी
नगर निगम ने नया ट्रंचिंग ग्राउंड तलाशने के लिए दो साल का वक्त लिया। पिछले साल बभिया में सवा सौ बीघा जमीन देखी गई। बभिया के प्रधान समेत आस-पास के ग्रामीणों ने ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने पर आपत्ति की। प्रशासन ने जांच कमेटी बना दी। जांच कमेटी ने ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए इस जमीन के बारे में अपनी आपत्ति दी। उसमें ग्रामीणों की आपत्तियां सही पाई गई।
मौजूदा स्थिति
2011 जनगणना अनुसार साढ़े 9 लाख शहर की आबादी
बाकरगंज के 14 एकड़ में फेंका जा रहा है कूड़ा
रोजाना 350 मीट्रिक टन निकलता है कूड़ा
यहां कूड़ा डालने को जगह नहीं बची है
20 एकड़ की जमीन कूड़ा डंप करने को चाहिए
बभिया में जमीन मिली लेकिन आपत्ति लग गईं
प्लांट का जनता के हित में चालू होना जरूरी है। निगम ने ठीक से पैरवी नहीं की जिससे प्लांट चालू नहीं हो पाया। हमने मामला विधानसभा में उठाया। सफलता नहीं मिली। विधायक बनने पर प्लांट चालू कराने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।
-डा. अरुण कुमार, विधायक शहर
विभिन्न पार्टियों के विधायक या प्रत्याशी अगर नगर निगम पर प्लांट चलाने की जिम्मेदारी डाल रहे हैं तो उनकी और राज्य सरकार की क्या जिम्मेदारी है। क्या कोई प्रत्याशी ये बताएगा कि अपने विधानसभा क्षेत्र की जनता के लिए उनकी अपनी क्या योजना है।
-डा. आईएस तोमर, मेयर