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विद्युत निजीकरण के विरोध में आये अधिकारी व कर्मचारी

Mon, 19 Mar 2018 07:22 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Mon, 19 Mar 2018 07:22 PM IST
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Protest over privatisation of Electricity
 उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रि परिषद में गत 16 मार्च को पांच शहरों मेरठ, गोरखपुर, लखनऊ, मुरादाबाद व वाराणसी के निजीकरण के निर्णय का विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने विरोध व्यक्त किया है।
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इस संबंध में आयोजित विरोध सभा में संघर्ष समिति के जिला संयोजक रणजीत चौधरी ने कहा कि शासन जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लेता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। मुख्य अभियंता (वितरण) अंशुल अग्रवाल ने निजीकरण का घोर विरोध करते हुए आंदोलन को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर बल दिया। उत्तर प्रदेश विद्युत मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने सरकार के निर्णय को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार ने अभी 15 दिन पूर्व पूर्वांचल के सात विद्युत मंडलों को लाइन हानि अधिक होने के कारण निजी कंपनियों को सौंप दिया है फिर अचानक अच्छा राजस्व एवं कम लाइन हानि वाले पांच महत्वपूर्ण शहरों को निजी कंपनियों को सौंपने का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। उप संयोजक व अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता ने इसे विभाग एवं कर्मचारियों का उत्पीड़न बताया।
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विरोध सभा में रविंद्र सिंह, अरविंद कुमार, राधेश्याम, नुकुल रावत, संदीप रावत, बबलू कुमार, आशीष राहुल, ओमवीर सिंह विभा गुप्ता आदि ने भी विरोध प्रकट किया।
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