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महानगर की बदहाली पर कैंडल मार्च निकालकर जताया विरोध
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बरेली। महानगर कॉलोनी की बदहाली से खफा लोगों ने मंगलवार को कैंडल मार्च निकालकर विरोध जताया। ये लोग करीब 20 वर्ष से कॉलोनी को नगर निगम में शामिल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
पीलीभीत बाईपास रोड स्थित महानगर कॉलोनी शहर की पॉश कॉलोनियों में से एक है। इसमें लगभग 1800 घर हैं पॉश कॉलोनी होने के बावजूद यह अब तक ग्राम पंचायत के अधीन है। लिहाजा यहां जनसुविधाओं का अभाव है। हालात इस कदर खराब हैं कि लोग अब अपना घर बेचकर कहीं दूसरी जगह रहने का मन बना रहे हैं। सड़कों का बुरा हाल है। पानी के निकास की कोई व्यवस्था नहीं है।
पार्कों की स्थिति भी बेहद खराब है। आवारा कुत्तों ने पार्कों को अपना ठिकाना बना लिया है। बच्चों के वहां खेलने जाने का मतलब अपनी जान को जोखिम में डालने जैसा है। कॉलोनी में साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। सुरक्षा व्यवस्था न होने से आए दिन चोरी की घटनाएं होती हैं। यह हाल तब है जब कॉलोनी के लोग 630 रुपये महीना मेंटेनेंस चार्ज देते हैं।
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लोगों का कहना है कि प्रधान चुनाव के समय ही यहां आते हैं। इसके बाद उन्हें कोई मतलब नहीं रहता। यह कॉलोनी घनौरा ग्राम पंचायत के क्षेत्र में आती है, जबकि यहां तमाम हाई प्रोफाइल लोग रहते हैं। कॉलोनी में 130 डॉक्टर, पांच-छह रिटायर्ड जज, रिटायर्ड आईएएस के साथ ही उच्च शिक्षित लोग रहते हैं। कॉलोनी के लोग चाहते हैं कि नगर निगम कॉलोनी को अपनी सीमा में शामिल कर ले, लेकिन यह 20 साल बाद भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है। हर तरफ से निराश हो चुके लोग अब चुनाव का बहिष्कार भी कर चुके हैं।
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पीलीभीत बाईपास रोड स्थित महानगर कॉलोनी शहर की पॉश कॉलोनियों में से एक है। इसमें लगभग 1800 घर हैं पॉश कॉलोनी होने के बावजूद यह अब तक ग्राम पंचायत के अधीन है। लिहाजा यहां जनसुविधाओं का अभाव है। हालात इस कदर खराब हैं कि लोग अब अपना घर बेचकर कहीं दूसरी जगह रहने का मन बना रहे हैं। सड़कों का बुरा हाल है। पानी के निकास की कोई व्यवस्था नहीं है।
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पार्कों की स्थिति भी बेहद खराब है। आवारा कुत्तों ने पार्कों को अपना ठिकाना बना लिया है। बच्चों के वहां खेलने जाने का मतलब अपनी जान को जोखिम में डालने जैसा है। कॉलोनी में साफ-सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। सुरक्षा व्यवस्था न होने से आए दिन चोरी की घटनाएं होती हैं। यह हाल तब है जब कॉलोनी के लोग 630 रुपये महीना मेंटेनेंस चार्ज देते हैं।
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लोगों का कहना है कि प्रधान चुनाव के समय ही यहां आते हैं। इसके बाद उन्हें कोई मतलब नहीं रहता। यह कॉलोनी घनौरा ग्राम पंचायत के क्षेत्र में आती है, जबकि यहां तमाम हाई प्रोफाइल लोग रहते हैं। कॉलोनी में 130 डॉक्टर, पांच-छह रिटायर्ड जज, रिटायर्ड आईएएस के साथ ही उच्च शिक्षित लोग रहते हैं। कॉलोनी के लोग चाहते हैं कि नगर निगम कॉलोनी को अपनी सीमा में शामिल कर ले, लेकिन यह 20 साल बाद भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है। हर तरफ से निराश हो चुके लोग अब चुनाव का बहिष्कार भी कर चुके हैं।