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Bareilly News: नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल को नीलाम करने की तैयारी
Thu, 04 Jun 2026 12:22 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:22 AM IST
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बरेली। करीब 22 हजार किसानों की बकायेदारी पर नवाबगंज स्थित ओसवाल चीनी मिल को नीलाम करने की तैयारी है। नीलामी से मिलने वाली धनराशि से किसानों को भुगतान किया जाएगा। मिल पर किसानों का ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये बकाया है। इसी हफ्ते राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर की टीम मिल का मूल्यांकन करने आ सकती है। इसके बाद नीलामी से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही बहेड़ी स्थित केसर चीन मिल की जमीन की नीलामी की गई है।
ओसवाल ओवरसीज लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1996 में की गई थी। 1998 में इसका पहला ट्रायल होकर उत्पादन शुरू हुआ था। वित्त वर्ष 2023-24 में मिल को गन्ना किसानों का कुल 107.12 करोड़ रुपये देना था। इसमें से प्रबंधन ने 91.64 करोड़ का भुगतान कर दिया था। 15.48 करोड़ रुपये बकाया रह गए थे। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन भुगतान एक रुपये का भी नहीं किया। इस तरह बकाया रकम बढ़कर 54.93 करोड़ पहुंच गई, जो अब ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये तक हो चुकी है। बकाया भुगतान के लिए डिप्टी कमिश्नर, जिलाधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी की ओर से 30 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए, लेकिन मिल प्रबंधन की ओर से जवाब नहीं दिया गया। दो सितंबर 2025 को हाफिजगंज थाने में प्रबंध निदेशक के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।
वसूली के लिए मिल के गोदाम में रखी 8900 क्विंटल चीनी को प्रशासन ने कुर्क कर लिया और बाद में इसकी 3.39 करोड़ रुपये में नीलामी कर दी। इस धनराशि से किसानों के बकाये का भुगतान भी किया गया। 30 मई को जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मिल पर बकायेदारी को लेकर समीक्षा बैठक भी की, लेकिन इसमें मिल प्रबंधन की ओर से कोई शामिल नहीं हुआ। इसके बाद नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
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कोट
ओसवाल चीनी मिल पर किसानों का ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये बकाया है। इसकी नीलामी के लिए प्रक्रिया चल रही है। कानपुर से टीम को मूल्यांकन के लिए आना है। मिल का मूल्यांकन होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - दिलीप कुमार सैनी, जिला गन्ना अधिकारी
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ओसवाल ओवरसीज लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1996 में की गई थी। 1998 में इसका पहला ट्रायल होकर उत्पादन शुरू हुआ था। वित्त वर्ष 2023-24 में मिल को गन्ना किसानों का कुल 107.12 करोड़ रुपये देना था। इसमें से प्रबंधन ने 91.64 करोड़ का भुगतान कर दिया था। 15.48 करोड़ रुपये बकाया रह गए थे। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में मिल ने किसानों से 39.45 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, लेकिन भुगतान एक रुपये का भी नहीं किया। इस तरह बकाया रकम बढ़कर 54.93 करोड़ पहुंच गई, जो अब ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये तक हो चुकी है। बकाया भुगतान के लिए डिप्टी कमिश्नर, जिलाधिकारी, जिला गन्ना अधिकारी की ओर से 30 से ज्यादा नोटिस जारी किए गए, लेकिन मिल प्रबंधन की ओर से जवाब नहीं दिया गया। दो सितंबर 2025 को हाफिजगंज थाने में प्रबंध निदेशक के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई।
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वसूली के लिए मिल के गोदाम में रखी 8900 क्विंटल चीनी को प्रशासन ने कुर्क कर लिया और बाद में इसकी 3.39 करोड़ रुपये में नीलामी कर दी। इस धनराशि से किसानों के बकाये का भुगतान भी किया गया। 30 मई को जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मिल पर बकायेदारी को लेकर समीक्षा बैठक भी की, लेकिन इसमें मिल प्रबंधन की ओर से कोई शामिल नहीं हुआ। इसके बाद नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
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ओसवाल चीनी मिल पर किसानों का ब्याज सहित करीब 70 करोड़ रुपये बकाया है। इसकी नीलामी के लिए प्रक्रिया चल रही है। कानपुर से टीम को मूल्यांकन के लिए आना है। मिल का मूल्यांकन होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। - दिलीप कुमार सैनी, जिला गन्ना अधिकारी