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Bareilly News: सुविधाएं विदेशी देने की तैयारी, कोच का पता नहीं

Thu, 25 Apr 2024 06:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 25 Apr 2024 06:51 AM IST
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Preparation to provide facilities to foreigners, coach not known
बरेली। शहर के डोरी लाल स्टेडियम में खेल सुविधाएं बढ़ाने की बात तो कही जा रही है, लेकिन प्रशिक्षकों की कमी बरकरार है। इस क्रम में एथलीट के लिए सिंथेटिक ट्रैक बनाने का काम चल रहा है। निजी कंपनी के अधिकारी सिंथेटिक ट्रैक की रबर खोजने के लिए विदेशों की सैर कर रहे हैं। वहीं प्रशिक्षक का अता-पता नहीं है।
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खिलाड़ियों के अनुसार पिछले पांच साल से काेई भी नियमित कोच एथलेटिक्स को नहीं मिला है। एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया से नियुक्त जिला एथलेटिक संघ के सचिव साहिबे आलम तदर्थ प्रशिक्षक के रूप में करीब 16 साल स्टेडियम में कोच रहे थे। इसके बाद से काेई भी कोच छह माह से अधिक नहीं टिका। कई बार खिलाड़ियों और कोच के बीच चलने वाली राजनीति भी इसकी वजह रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए सिंथेटिक ट्रैक भी बेहद जरूरी है। कारण, अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं सिंथेटिक कोर्ट में कराना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक होने से कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं होने का रास्ता खुलेगा। हालांकि इसके प्रशिक्षण के लिए स्थायी कोच का होना भी बेहद जरूरी है।
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अब तक जो एथलीट मिट्टी पर दौड़कर खेल में अपना कॅरियर बनाने की राह तलाशते थे। उन्हें सिंथेटिक ट्रैक पर अधिकतम छह एमएम के जूते ही पहनने होंंगे। अन्यथा महंगे और विदेशी स्तर पर बनने वाले ट्रैक की रबर फट सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैक के रखरखाव की जिम्मेदारी में खेल स्टेडियम की अहम भूमिका रहेगी, जिसको कोच के बिना पूरा नहीं किया जा सकता।

डोरी लाल स्टेडियम में 16 साल तक ट्रेनिंग देने वाले साहिबे आलम के दौर में कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी यहां से निकल चुके हैं। इनमें कुशाल नेगी ने एशिया क्रॉस सिल्वर मेडल, नवीन साहनी ने अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एथलीट प्रतियोगिता में चार गोल्ड मेडल हासिल कर इतिहास रचा था। वहीं हेमा मनराल भी नेशनल में कांस्य पदक विजेता रही हैं। उन्हें खेलकूद निदेशालय की ओर से नकद पुरस्कार भी मिल चुका है। दाराब अख्तर, गितिका खुल्वे, सोना पांडेय, सीमा, शुभी गंगवार समेत करीब 150 बच्चे राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। वहीं साहिबे आलम खुद भी एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में देश का नाम रौशन कर चुके हैं। वह मास्टर एशिया गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं और खुद भी एक साथ चार स्वर्ण पदक प्राप्त कर इतिहास रच चुके हैं। कोच की कमी के चलते अब ऐसे खिलाड़ी तैयार नहीं हो रहे।
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