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कम नहीं हो रहे हैं घर पर प्रसव के मामले

Mon, 11 Apr 2022 02:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 11 Apr 2022 02:51 AM IST
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pregnant women delivery at home not reducing
बरेली। गर्भवती महिलाओं की सेहत, सुरक्षित प्रसव और नवजात का जीवन सुरक्षित रखने के लिए सरकार तमाम योजनाएं चला रही हैं, फिर भी घरों पर जोखिमपूर्ण ढंग से प्रसव के मामले कम नहीं हो रहे हैं। हाल ही में करीब दर्जन भर केस ऐसे सरकारी अस्पतालों में पहुंचे जिनमें घर पर प्रसव की कोशिश में गर्भवतियों की जान सांसत में पड़ गई। कई मामलों में तो उनकी जान बचाने को एंबुलेंस में ही प्रसव कराना पड़ा।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक महिला अस्पताल में लोग अक्सर गंभीर हालत में गर्भवती को लेकर पहुंचते हैं। कई गर्भवतियों का नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच न होने से वे बेहद कमजोर और एनीमिक हो जाती हैं। कुछ गर्भवती हेपेटाइटिस से भी ग्रसित मिलती हैं। महिला अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा न होने से गंभीर गर्भवतियों की डिलीवरी करने से महिला चिकित्सक भी घबराती हैं। लिहाजा हायर सेंटर रेफर करना ही विकल्प होता है। कई बार जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों के हाथ खड़े कर लेने पर गर्भवती को लेकर उसके परिवार को निजी अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ता है। नियमित जांच और टीकाकरण से यह भागदौड़ काफी हद तक बच सकती है।
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सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह के मुताबिक मातृत्व स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार, स्वास्थ्य विभाग का पूरा जोर है। प्रत्येक जरूरी बिन्दुओं का ख्याल रखते हुए जच्चा-बच्चा को सुरक्षित बनाने की हरसंभव कोशिश हो रही है। ताकि जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रहें। कहा कि सभी ग्राम पंचायत स्तर पर आशा सक्रिय हैं। जो घर-घर दस्तक देती हैं। उनसे संपर्क कर स्थानीय लोग योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।
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सुरक्षित प्रसव के साथ स्वास्थ्य रक्षा भी
गर्भवती की प्रसव पूर्व मुफ्त जांच के लिए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की नौंवी तारीख को स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच शिविर लगते हैं। जांच के दौरान अगर कोई दिक्कत नजर आती है तो गर्भवती को चिन्हित कर उनकी देखरेख होती है। साथ ही, गर्भवती को पोषण और स्वास्थ्य देखभाल के लिए तीन किस्तों में पांच हजार रुपये मिलते हैं। संस्थागत प्रसव के लिए जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने पर ग्रामीण गर्भवती को 14 सौ रुपये और शहरी क्षेत्र की गर्भवती को एक हजार रुपये मिलते हैं। प्रसव के बाद बच्चे की देखभाल जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत होती है।

गर्भवती के खानपान का रखें विशेष ध्यान
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक अगर गर्भवती खानपान का पूरा ध्यान रखें तो हालत गंभीर होने की आशंका कम रहती है। खाने में हरी साग-सब्जी, मौसमी फल का ज्यादा सेवन करें। आयरन और कैल्शियम की गोलियों का सेवन चिकित्सक से परामर्श के अनुसार ही करें। प्रसव का दिन नजदीक आने पर सुरक्षित प्रसव के लिए पहले से अस्पताल का चयन कर लें। मातृ-शिशु सुरक्षा कार्ड, जरूरी कपड़े रख लें। एंबुलेंस का नंबर ‘102’ याद रखें। समय से एंबुलेंस को बता दें ताकि लेटलतीफी से बचा जा सके। नियमित टीकाकरण और प्रसव पूर्व की सभी जांचें नियमित कराते रहने का सुझाव दिया है।
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