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पांच जवान शहीद: सीने में आंसुओं का समंदर, छोटे भाई की शहादत की खबर सुनकर सुखबीर सिंह का कांप गया कलेजा

Tue, 12 Oct 2021 11:42 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर
अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 12 Oct 2021 11:42 AM IST
सार

फोन पर छोटे भाई की शहादत की खबर सुनकर सुखबीर सिंह का कलेजा कांप गया। आंखों से आंसुओं का समंदर बहने को बेताब हो उठा, मगर मां-पिता का ख्याल आते ही सब कुछ सीने में दफन कर लिया। माता-पिता के सामने खुद को सामान्य रखने की कोशिश कर रहे सुखबीर कई बार धैर्य खोते मगर फिर कलेजा कड़ा कर लेते।
 

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poonch encounter news Five soldiers martyred in jammu kashmir Sukhbir Singh heart trembled after hearing the news of the martyrdom of his younger brother Saraj Singh
सारज सिंह - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पाकिस्तान की सीमा से लगे जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में सोमवार की सुबह हुए आतंकी हमले में पांच जवान शहीद हो गए। शहीदों में शाहजहांपुर के बंडा थाना क्षेत्र के गांव अखत्यारपुर धौकल निवासी सारज सिंह भी शामिल हैं। सेना की ओर से सारज के भाई सुखबीर सिंह को सुबह दस बजे यह जानकारी दी गई है। 
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फोन पर छोटे भाई की शहादत की खबर सुनकर सुखबीर सिंह का कलेजा कांप गया। आंखों से आंसुओं का समंदर बहने को बेताब हो उठा, मगर मां-पिता का ख्याल आते ही सब कुछ सीने में दफन कर लिया। माता-पिता के सामने खुद को सामान्य रखने की कोशिश कर रहे सुखबीर कई बार धैर्य खोते मगर फिर कलेजा कड़ा कर लेते।
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सुखबीर को सोमवार सुबह दस बजे ही छोटे भाई सारज सिंह की शहादत की खबर मिल गई थी। पूरा दिन सुखबीर ने मां-पिता के सामने सच्चाई को छिपाकर रखा। बताया ही नहीं कि उनका बेटा अब कभी उनसे बात नहीं करेगा। माता-पिता अपने दिनभर के कामों में व्यस्त रहे और सुखबीर उनके सामने ऐसे ही व्यवहार करता रहा जैसे कि कुछ हुआ ही न हो। 
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सुखबीर यह सोच-सोचकर भावनाओं के भंवर में घिरे रहे कि कैसे कह दें कि उनका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा। कैसे कह दे कि उनका लाड़ला आतंकवादी गोली का शिकार होकर मां भारती के कदमों पर सर्वोच्च बलिदान दे चुका है। धीरे-धीरे कर आसपास के लोगों को भी सारज सिंह की शहादत की खबर मिलने लगी थी। 
 

दोपहर बाद से आसपास के लोग घर आने लगे थे, लेकिन सुखबीर ने सबको घर के बाहर ही रोक दिया। गुजारिश करने लगा कि माता-पिता इतना बड़ा सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। लोग भी सुखबीर के हौसले को देखकर हैरान रह गए। लोगों के फोन आने पर वह बाहर निकलकर ही बात करता। 
अंदर बात करता तो न अपने आंसू रोक पाता और न ही माता-पिता से ऐसी सच्चाई छुपा पाता जो देर-सबेर पता चलनी ही थी। घर के बाहर लंबा सन्नाटा खिंचा हुआ था और सुखबीर के अंदर तूफान हिलोरे ले रहा था। कई बार तन्हाई में सुखबीर फफक कर रोते रहे। उनके अंदर का सैनिक बार-बार उन्हें खुद को संभालने का साहस देता रहा।

दोस्तों ने बतायाः सारज कहते थे, दुश्मन के सामने खड़ा रहूंगा सीना तान कर
सारज सिंह दोस्तों से कहते थे कि कभी दुश्मनों से आमना-सामना हुआ तो उनके दांत खट्टे कर दूंगा। दुश्मनों के सामने सीना तान कर खड़ा होकर मुकाबला करूंगा। सारज सिंह के पड़ोसी और दोस्त गुरचरन सिंह ने बताया कि वह सारज सिंह के साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे। सारज सिंह एक क्लास सीनियर थे, लेकिन दोनों की दोस्ती बहुत पक्की थी।

सारज सिंह किशोर अवस्था से ही सेना में जाने का सपना देखते थे और कहते थे कि देश सेवा का मौका मिलना सौभाग्य की बात है। इसके बाद सारज सिंह का चयन सेना में हो गया तो सारज सिंह के छुट्टी पर घर आने पर ही मुलाकात होती थी, लेकिन मोबाइल पर बात और व्हाट्सएप पर चैटिंग होती रहती थी। सारज सिंह जब भी घर आते थे तो बताते थे कि कश्मीर में तैनाती है और वहां आतंकवाद का जोर है।
 

उनमें इस बात का गुस्सा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों को भारत में भेजकर घटनाओं को अंजाम दिलवाता है। सारज सिंह कहा करते थे कि कभी आमना-सामना हुआ तो दुश्मन देश के पिट्ठुओं को नाकों तले चने चबा देंगे और सीना तानकर दुश्मनों के सामने जाकर उनको भारत के जांबाजों के साहस और शौर्य का एहसास करा देंगे। आज सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी मिली है। सारज सिंह जो कहा करते थे, वह कर दिखाया और आतंकवादियों को डटकर मुकाबला करते हुए शहीद हो गए।

बहादुर था सारज सिंह, सेना ने और निखारा
सारज सिंह के पड़ोस में सतवीर सिंह का घर है। सतवीर सिंह के भी तीन पुत्र संदीप सिंह, गुरविंदर सिंह, गगनदीप सिंह सेना में हैं। गुरविंदर सिंह इन दिनों छुट्टी पर घर आए हुए हैं। गुरविंदर सिंह ने बताया कि वह 221 फील्ड रेजीमेंट देहरादून में तैनात है। वह 18 सितंबर से घर आए हुए हैं। गुराविंदर सिंह ने बताया कि वह सारज सिंह से ढाई वर्ष पहले मिले थे। इसके बाद सारज सिंह घर आते तो वह ड्यूटी पर होते और जब वह घर आते तो सारज सिंह ड्यूटी पर होते थे। 
 
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