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गणतंत्र दिवस की परेड के साथ विदा हो जाएगी थ्री नॉट थ्री
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पुलिस की बंदूक।
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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मुख्यालय से एडीजी लॉजिस्टिक्स ने जारी किए निर्देश
बरेली। पुलिस की शान रही थ्री नॉट थ्री रायफल 26 जनवरी की परेड के साथ विदा कर दी जाएगी। शुक्रवार को मुख्यालय से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नई आधुनिक इंसास और एसएलआर रायफलों ने अब इनकी जगह ले ली है। कई दशकों से पुलिस का साथ निभा रहीं ये रायफल अब सिर्फ ड्रिल परपज (डीपी) तक ही सीमित रह जाएंगी।
पिछले साल 29 नवंबर को लखनऊ मुख्यालय से इन रायफलों की जगह पूरे प्रदेश के पुलिस कर्मियों को इंसास और एसएलआर राइफलें मुहैया कराने के आदेश जारी किए गए थे। इसी क्रम में शुक्रवार को अपर पुलिस महानिदेशक, लॉजिस्टिक्स विजय कुमार मौर्य के माध्यम से गणतंत्र दिवस पर इन रायफलों का इस्तेमाल बंद कर उनको विदा किए जाने के निर्देश जारी किए हैं। पुलिस अधिकारियों को वर्षों से पुलिस महकमे की हमसफर रही थ्री नॉट थ्री राइफलों की खूबियां भी नए साथियों को बताने को कहा गया है। अब इनकी जगह प्रदेश के पुलिस कर्मियों तक पहुंची 63 हजार इंसास और 23 हजार एसएलआर राइफलों ने ले ली है। प्रदेश में करीब 1.22 लाख असलहों में 48 प्रतिशत, यानी 58.85 यही रायफलें थीं। मगर नई टेक्नोलॉजी की इंसास और एसएलआर के सामने यह रायफलें फीकी पड़ गई हैं। बावजूद आज भी यह सबसे ज्यादा दूर लगभग 2 हजार मीटर तक मार करने वाली इकलौती रायफल है। इंसास और एसएलआर भी इसकी मार का मुकाबला नहीं कर पातीं।
जैसे-जैसे स्तर बढ़ा, नीचे उतरी थी राइफल
पुलिस की बात करें तो वह सुरक्षा व्यवस्था में सबसे नीचे पायदान पर मानी जाती है। नए असलहे भी पुलिस महकमे को ही सबसे आखिर में ही दिए जाते हैं। प्रथम विश्व युद्ध के बाद थ्री नॉट थ्री रायफल सबसे पहले सेना को दी गई थीं। सैनिकों के हाथों में नई टेक्नोलॉजी पहुंचने पर यह पैरामिलिट्री और पीएसी जवानों के हाथों से होती हुई पुलिस महकमे तक पहुंची थी। 1945 में मिली ये राइफलें अब सिर्फ आरक्षियों को ट्रेनिंग देने के ही काम आएंगी।
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ट्रेनिंग में कैसे होंगी इस्तेमाल
महकमे से विदा होने के बाद इन राइफलों को ट्रेनिंग कैंपों में इस्तेमाल किया जाएगा। इनकी मैगजीन की जगह लकड़ी का गुटखा लगाकर, बैरल में छेद करके और पिन घिसकर इन्हें आरक्षियों के हाथों में थमा दिया जाएगा।
पुलिस विभाग अब इंसास रायफलें इस्तेमाल कर रहा है। थ्री नॉट थ्री का उपयोग पहले से ही लगभग बंद हो चुका है। परेड से संबंधित निर्देश अभी नहीं मिला है, निर्देश के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। - शैलेश पांडेय, एसएसपी
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बरेली। पुलिस की शान रही थ्री नॉट थ्री रायफल 26 जनवरी की परेड के साथ विदा कर दी जाएगी। शुक्रवार को मुख्यालय से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नई आधुनिक इंसास और एसएलआर रायफलों ने अब इनकी जगह ले ली है। कई दशकों से पुलिस का साथ निभा रहीं ये रायफल अब सिर्फ ड्रिल परपज (डीपी) तक ही सीमित रह जाएंगी।
पिछले साल 29 नवंबर को लखनऊ मुख्यालय से इन रायफलों की जगह पूरे प्रदेश के पुलिस कर्मियों को इंसास और एसएलआर राइफलें मुहैया कराने के आदेश जारी किए गए थे। इसी क्रम में शुक्रवार को अपर पुलिस महानिदेशक, लॉजिस्टिक्स विजय कुमार मौर्य के माध्यम से गणतंत्र दिवस पर इन रायफलों का इस्तेमाल बंद कर उनको विदा किए जाने के निर्देश जारी किए हैं। पुलिस अधिकारियों को वर्षों से पुलिस महकमे की हमसफर रही थ्री नॉट थ्री राइफलों की खूबियां भी नए साथियों को बताने को कहा गया है। अब इनकी जगह प्रदेश के पुलिस कर्मियों तक पहुंची 63 हजार इंसास और 23 हजार एसएलआर राइफलों ने ले ली है। प्रदेश में करीब 1.22 लाख असलहों में 48 प्रतिशत, यानी 58.85 यही रायफलें थीं। मगर नई टेक्नोलॉजी की इंसास और एसएलआर के सामने यह रायफलें फीकी पड़ गई हैं। बावजूद आज भी यह सबसे ज्यादा दूर लगभग 2 हजार मीटर तक मार करने वाली इकलौती रायफल है। इंसास और एसएलआर भी इसकी मार का मुकाबला नहीं कर पातीं।
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जैसे-जैसे स्तर बढ़ा, नीचे उतरी थी राइफल
पुलिस की बात करें तो वह सुरक्षा व्यवस्था में सबसे नीचे पायदान पर मानी जाती है। नए असलहे भी पुलिस महकमे को ही सबसे आखिर में ही दिए जाते हैं। प्रथम विश्व युद्ध के बाद थ्री नॉट थ्री रायफल सबसे पहले सेना को दी गई थीं। सैनिकों के हाथों में नई टेक्नोलॉजी पहुंचने पर यह पैरामिलिट्री और पीएसी जवानों के हाथों से होती हुई पुलिस महकमे तक पहुंची थी। 1945 में मिली ये राइफलें अब सिर्फ आरक्षियों को ट्रेनिंग देने के ही काम आएंगी।
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ट्रेनिंग में कैसे होंगी इस्तेमाल
महकमे से विदा होने के बाद इन राइफलों को ट्रेनिंग कैंपों में इस्तेमाल किया जाएगा। इनकी मैगजीन की जगह लकड़ी का गुटखा लगाकर, बैरल में छेद करके और पिन घिसकर इन्हें आरक्षियों के हाथों में थमा दिया जाएगा।
पुलिस विभाग अब इंसास रायफलें इस्तेमाल कर रहा है। थ्री नॉट थ्री का उपयोग पहले से ही लगभग बंद हो चुका है। परेड से संबंधित निर्देश अभी नहीं मिला है, निर्देश के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। - शैलेश पांडेय, एसएसपी