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Bareilly News: चाइनीज मांझे से दरोगा की गर्दन कटी तो जागी पुलिस, पांच व्यापारी गिरफ्तार

Sun, 12 May 2024 08:42 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 12 May 2024 08:42 AM IST
सार

बरेली के महादेव पुल पर बाइक सवार दरोगा मांझे की चपेट में आ गए थे, जिससे उनकी गर्दन में गहरा घाव हो गया। इस घटना के बाद पुलिस जागी। शनिवार को पुलिस ने पांच व्यापारियों को गिरफ्तार किया। हालांकि बाद में रिपोर्ट दर्ज कर थाने से ही जमानत दे दी। 

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Police arrested five people when inspector neck was cut with Chinese manjha in Bareilly
घायल इंस्पेक्टर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रतिबंध के बाद भी बरेली में चाइनीज मांझे की बिक्री हो रही है। आम शहरी अक्सर इसकी चपेट में आकर घायल होते रहते हैं। हर माह इस तरह के सात-आठ मामले सामने आते हैं लेकिन इससे पुलिस को फर्क नहीं पड़ रहा था। लोग शिकायत भी करते थे लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया जाता।

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बृहस्पतिवार को महादेव पुल से गुजर रहे कोतवाली में तैनात दरोगा महेश चौधरी चाइनीज मांझे की चपेट में आकर घायल हो गए तो पुलिस की नींद टूटी। कोतवाली पुलिस ने अभियान चलाकर पांच मांझा विक्रेताओं को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, बाद में कोतवाली पहुंचे साथी व्यापारियों ने उनकी जमानत करा ली।
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इन पर हुई कार्रवाई
आजमनगर निवासी नावेद और शाकिर, सराय खाम निवासी इनाम अली, शहरव और अनस।

व्यापारी बोले- बंद कराएं हरियाणा की फैक्टरी
मांझा व्यापारियों ने कोतवाल डीके शर्मा को बताया कि हरियाणा की फैक्टरी से शहर में इस तरह का मांझा थोक में आता है। बाजार में चाइनीज मांझे की मांग ज्यादा है, जबकि स्थानीय स्तर पर बनने वाले मांझे की मांग कम है। 

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व्यापारियों ने बताया कि वे इस मांझे को नहीं बेचते पर गली-मोहल्ले की दुकानों पर मुनाफे के चक्कर में इसे बेचा जाता है। इस पर रोकथाम के लिए हरियाणा की संबंधित फैक्टरी को बंद कराने की जरूरत है। कोतवाल ने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उनके इलाके में मांझा बिकता मिला तो वह कार्रवाई करेंगे।

खुली रहीं दुकानें, चाइनीज मांझा गायब
पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान चाइनीज मांझा बेचने वालों पर कार्रवाई की थी। इसके काफी समय बाद एकाएक हुई कार्रवाई से मांझा विक्रेताओं में खलबली मच गई। यही वजह रही जो बांस मंडी व किला बाजार की कुछ दुकानें बंद रहीं। जो दुकानें खुली थीं, उन पर पतंग और सामान्य मांझा ही रखा मिला।

देश में ही होता है निर्माण, चाइनीज नाम से पहचान
जिस चाइनीज मांझे को लेकर इतनी हायतौबा मची है, उसमें कुछ भी चाइनीज नहीं है। दरअसल इस मांझे में तांत (नायलॉन) के ऊपर कांच समेत केमिकल की परत चढ़ा दी जाती है। इससे पतंग उड़ाने पर उसके कटने की आशंका कम हो जाती है। मांझा एसोसिएशन से जुड़े इनाम अली ने बताया कि देसी मांझे को लोग पसंद नहीं करते। देसी मांझे की छह रील की चरखी 600 रुपये में मिलती है, जबकि चाइनीज मांझे की चरखी सिर्फ 150 रुपये में ही मिल जाती है।

सीओ प्रथम पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि चाइनीज मांझे से इंसानों को ही नहीं पक्षियों को भी खतरा रहता है। बेजुबान तो बिना इलाज के ही मर जाते हैं। इसी लिहाज से कार्रवाई की गई है। चुनाव के बाद फोर्स के लौटने पर इसे अभियान के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। 

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