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Bareilly News: पितृ पक्ष कल से शुरू, 15 दिन तक पूर्वजों को दें तर्पण व दान
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बरेली। सनातन धर्म में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू हो रहा है। यह 15 दिवसीय अवधि भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पूर्वजों को समर्पित है। इसका समापन 10 अक्तूबर को पितृ विसर्जन के साथ होगा।
पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि मनुष्यों पर देव, ऋषि और पितृ ऋण होते हैं। माता-पिता के ऋण से मुक्त होना आवश्यक है। पितृ पक्ष में तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। हिंदू मान्यता है कि सूर्य के कन्या राशि में आने पर पितृ पृथ्वी पर आते हैं। वे अमावस्या तक घर के द्वार पर ठहरते हुए वंशजों से श्राद्ध व तर्पण की अपेक्षा करते हैं। यदि उन्हें यह प्राप्त नहीं होता, तो वे अप्रसन्न होकर लौट जाते हैं। मृत्यु तिथि पर श्राद्ध और ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितर संतुष्ट होते हैं, जिससे पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख, सौभाग्य व समृद्धि आती है। संवाद
तर्पण की विधि और लाभ
तर्पण से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, पुरुष धोती और जनेऊ धारण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख कर श्राद्ध कर्म शुरू करें, चौकी पर तिल, जौ, कुश और तांबे के पात्र में जल रखें। हाथ में जल, तिल, कुश लेकर गोत्र व पितरों के नाम से संकल्प लें, फिर तर्पण दें। बचे हुए जल को किसी पेड़ या पवित्र नदी में प्रवाहित करें। पितृ पक्ष में तर्पण से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और उनका आशीर्वाद जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
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पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि मनुष्यों पर देव, ऋषि और पितृ ऋण होते हैं। माता-पिता के ऋण से मुक्त होना आवश्यक है। पितृ पक्ष में तर्पण करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। हिंदू मान्यता है कि सूर्य के कन्या राशि में आने पर पितृ पृथ्वी पर आते हैं। वे अमावस्या तक घर के द्वार पर ठहरते हुए वंशजों से श्राद्ध व तर्पण की अपेक्षा करते हैं। यदि उन्हें यह प्राप्त नहीं होता, तो वे अप्रसन्न होकर लौट जाते हैं। मृत्यु तिथि पर श्राद्ध और ब्राह्मणों को भोजन कराने से पितर संतुष्ट होते हैं, जिससे पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख, सौभाग्य व समृद्धि आती है। संवाद
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तर्पण की विधि और लाभ
तर्पण से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, पुरुष धोती और जनेऊ धारण करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख कर श्राद्ध कर्म शुरू करें, चौकी पर तिल, जौ, कुश और तांबे के पात्र में जल रखें। हाथ में जल, तिल, कुश लेकर गोत्र व पितरों के नाम से संकल्प लें, फिर तर्पण दें। बचे हुए जल को किसी पेड़ या पवित्र नदी में प्रवाहित करें। पितृ पक्ष में तर्पण से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और उनका आशीर्वाद जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है।
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