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पीलीभीत के व्यापारी की है अवैध फैक्टरी, फर्रुखाबाद वाले का नहीं कोई पता-ठिकाना
Mon, 03 Feb 2020 03:20 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 03 Feb 2020 03:20 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
पीलीभीत डिपो की एक रोडवेज बस में मिला ढाई क्विटंल विस्फोटक फर्रुखाबाद के एक पटाखा व्यापारी ने पीलीभीत के पटाखा व्यापारी को भेजा था। पुलिस की प्राथमिक जांच से साफ हुआ है कि पीलीभीत का व्यापारी दुकान की आड़ में अवैध पटाखा फैक्टरी चलाता है। वहीं फर्रुखाबाद के व्यापारी का कोई पता-ठिकाना ही नहीं है। बारादरी पुलिस व्यापारियों की गिरफ्तारी के लिए दोनों जिलों में गई है। वहीं इस पूरे मामले के तार रिठौरा के एक पटाखा व्यापारी से जुड़ रहे हैं।
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पुलिस की जांच में सामने आया कि पीलीभीत का ये व्यापारी दुकान के लाइसेंस की आड़ में अवैध पटाखा फैक्टरी चलाता है। उसकी फैक्टरी का लाइसेंस दो साल पहले ही रद्द हो चुका है। करीब दो साल पहले उसकी फैक्टरी में पटाखे बनाते वक्त वक्त हुए हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई थी। लेकिन प्रशासन और पुलिस से साठगांठ पक्की होने के चलते किसी ने इसकी शिकायत भी नहीं की थी।
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वहीं इस व्यापारी के हाफिजगंज थाना के रिठौरा चौकी क्षेत्र के एक पटाखा व्यापारी से भी तार जुड़ रहे हैं। चर्चा है कि यह लोग रिठौरा के एक व्यापारी के जरिए बारूद और विस्फोटक मंगवाते और भिजवाते थे। वहीं फर्रुखाबाद के जिस व्यापारी का नाम सामने आ रहा है उसका पता-ठिकाना किसी को नहीं पता। जिले के एफएसओ कार्यालय में दर्ज सूची में कुल 32 रिटेल व्यापारी और 11 होलसेल व्यापारी दर्ज हैं। इससे साफ है कि यह व्यापारी भी अवैध रूप से विस्फोटक बनाने का काम करता है। बारादरी पुलिस जांच और व्यापारियों की गिरफ्तारी के लिए दोनों जिलों में पहुंची हुई है।
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अलर्ट के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा अवैध कारोबार
बरेली। नागरिकता कानून को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के चलते हुई घटनाओं को लेकर जिले और प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में गहमागहमी का माहौल है। हर जिले की पुलिस हाई अलर्ट पर है। इसके बावजूद बारूद का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। बता दें कि फर्रुखाबाद में शुक्रवार को एक सिरफिरे ने बर्थडे पार्टी के बहाने 15 बच्चों को एक घर में कैद कर लिया था।
बच्चों को बचाने इकट्ठी हुई फोर्स पर उसने हाथ से बने बारूद के हथगोले फेंके थे। पिछले साल दीपावली पर बदायूं की एक पटाका फैक्टरी में काम करते वक्त एक हादसे में दस से ज्यादा मजदूरों की मौत हो गई थी। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन इसे लेकर लापरवाही बरत रहा है। जिले में भी कई जगह अवैध पटाखा फैक्टरियां चलाई जा रही हैं। लेकिन पुलिस और प्रशासन से साठगांठ के चलते किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।
25 से ज्यादा सवारियों की जान की कीमत छह सौ रुपये
रुपयों के लालच के चलते रोडवेज बसों का स्टाफ अवैध रुप से कुछ भी सामान एक जिले से दूसरे जिले ले जाने को तैयार हो जाता है। सिर्फ बस का स्टाफ ही नहीं इस धंधे में विभाग के अन्य अधिकारी भी शामिल रहते है। रविवार सुबह सेटेलाइट बस स्टैंड के पास पकड़ी गई पीलीभीत डिपो की बस के स्टाफ ने भी सिर्फ छह सौ रुपयों के लालच में ढाई क्विंटल विस्फोटक बस के कैविटी में लाद लिया था। पूछताछ में कंडक्टर सुधीर ने बताया था कि फर्रुखाबाद से डेढ़ सौ रुपये एक कट्टे के हिसाब से कट्टे लादे थे। रोडवेस में बूढ़े-बच्चे समेत 25 से ज्यादा सवारियां बैठी थीं। पुलिस ने चेकिंग के लिए बस रोकी तो एक बार को सवारियों भी चौंकी। लेकिन बस में भरा बारूद देखने के बाद उनकी सांसे थम गईं।