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कोविड वैक्सीनेशन का फर्जी लिंक भेजकर फोन में सेंधमारी
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
एसएमएस के साथ आ रहा है लिंक, छूते ही डाउनलोड हो रहा एप
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बरेली। साइबर ठग कोविड वैक्सीनेशन के लिए फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल में सेंधमारी कर रहे हैं। इस लिंक को छूते ही मोबाइल में एप डाउनलोड हो रहा हैै जो मोबाइल यूजर के डाटा के लिए खतरा बन रहा है। साइबर विशेषज्ञों ने इस तरह के लिंक से बचने की सलाह दी है।
कोविड वैक्सीन के लिए पंजीकरण कराने को सरकार ने कोविन पोर्टल लांच किया है। घर में बैठकर या कॉमन सर्विस सेंटर के जरिये इस पर पंजीकरण कराया जा सकता है मगर आबादी के सापेक्ष स्लॉट कम होने के कारण तमाम लोग पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं। इसका फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों के मोबाइल पर वैक्सीनेशन का पंजीकरण करने के लिए एक लिंक भेज रहे हैं। साइबर विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल बताते हैं कि इस लिंक को छूते ही यूजर के मोबाइल में एक एप इंस्टाल हो जाता है, जो आपकी फोनबुक समेत अन्य डाटा में सेंधमारी कर देता है। कह सकते हैं कि आपका फोन साइबर ठग के नियंत्रण में आ जाता है और वह उस पर होने वाली हर गतिविधि को देख सकता है। आप फोन से मोबाइल बैंकिंग करते हैं तो उसकी जानकारी भी साइबर ठग के पास पहुंच जाती है। इसके जरिये वह न सिर्फ आपके बैंक खाते में सेंध लगा सकता है बल्कि आने वाले समय में आपके डाटा को ब्लॉक करके रंगदारी भी मांग सकता है।
कोविड वैक्सीन के लिए पंजीकरण कराने को सरकार ने कोविन पोर्टल लांच किया है। घर में बैठकर या कॉमन सर्विस सेंटर के जरिये इस पर पंजीकरण कराया जा सकता है मगर आबादी के सापेक्ष स्लॉट कम होने के कारण तमाम लोग पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं। इसका फायदा उठाकर साइबर ठग लोगों के मोबाइल पर वैक्सीनेशन का पंजीकरण करने के लिए एक लिंक भेज रहे हैं। साइबर विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल बताते हैं कि इस लिंक को छूते ही यूजर के मोबाइल में एक एप इंस्टाल हो जाता है, जो आपकी फोनबुक समेत अन्य डाटा में सेंधमारी कर देता है। कह सकते हैं कि आपका फोन साइबर ठग के नियंत्रण में आ जाता है और वह उस पर होने वाली हर गतिविधि को देख सकता है। आप फोन से मोबाइल बैंकिंग करते हैं तो उसकी जानकारी भी साइबर ठग के पास पहुंच जाती है। इसके जरिये वह न सिर्फ आपके बैंक खाते में सेंध लगा सकता है बल्कि आने वाले समय में आपके डाटा को ब्लॉक करके रंगदारी भी मांग सकता है।
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