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Bareilly News: बैंकों की आनाकानी से फंसी स्वनिधि योजना, जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा लोन
Mon, 08 Jan 2024 04:38 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 08 Jan 2024 04:38 PM IST
सार
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना में स्ट्रीट वेंडर को आत्मनिर्भर बनाए जाने का लक्ष्य है, लेकिन उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। बैंकों से लौटाए जाने वाले आवेदक कभी डूडा कार्यालय तो कभी नगर निगम में पहुंच रहे हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बरेली में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का जरूरतमंदों को समय से लाभ नहीं मिल पा रहा। आरोप है कि बैंकों से छोटी-छोटी कमियां निकालकर आवेदकों को लौटाया जा रहा है। करीब साढ़े तीन हजार जरूरतमंद ऋण मिलने का इंतजार कर रहे हैं। डूडा के प्रभारी और नगर निगम के अपर नगर आयुक्त ने इस संबंध में लीड बैंक के मैनेजर को दिक्कतें दूर कराने के लिए पत्र लिखा है।
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योजना में स्ट्रीट वेंडर को आत्मनिर्भर बनाए जाने का लक्ष्य है, लेकिन उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। बैंकों से लौटाए जाने वाले आवेदक कभी डूडा कार्यालय तो कभी नगर निगम में पहुंच रहे हैं। शनिवार को भी कार्यालय पहुंचे आवेदकों ने आरोप लगाया कि उन्हें कहीं से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। रोजी रोटी का काम छोड़कर बैंक जाते हैं, लेकिन कई घंटे इंतजार के बाद अगली तारीख देकर लौटा दिया जाता है। कब तक ऋण मिलेगा या नहीं मिलेगा? इसकी जानकारी स्पष्ट तौर पर नहीं मिल पाती।
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प्रमुख बैंकों में लंबित आवेदनों की स्थिति
बैंक का नाम पहली श्रेणी दूसरी श्रेणी तीसरी श्रेणी
बैंक ऑफ बड़ौदा 479 1332 28
पंजाब नेशनल बैंक 637 158 25
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 237 42 12
यूनियन बैंक 30 245 05
(तालिका में 200 से अधिक लंबित आवेदन वाले बैंकों का ब्योरा है।)
ये है योजना व देरी का हाल
नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के माध्यम से पहली श्रेणी में अर्ह आवेदनकर्ता स्ट्रीट वेंडर को 10 हजार रुपये बैंक से ऋण दिलाया जाता है। यह ऋण चुकाने पर दूसरी श्रेणी में 20 हजार और फिर तीसरी श्रेणी में 40 हजार रुपये का ऋण मिलता है। डूडा के रिकार्ड के मुताबिक कुल 21 बैंकों में पहली श्रेणी के लिए 1567, दूसरी श्रेणी के लिए 1864 व तीसरी श्रेणी के लिए 77 आवेदन स्वीकृति के बाद भी लंबित हैं।
लाभार्थियों की दिक्कतें
मैंने 10,000 का लोन लिया और भर दिया। बैंक वाले 2021 से 20 हजार रुपये के लोन के लिए मुझे टहला रहे हैं। यह भी नही बता रहे कि ऋण मिलेगा या नहीं। - राजेंद्र कुमार
मैंने ऋण समय पर जमा किया। तिलियापुर स्थित बैंक शाखा में एक महीने से दौड़ाया जा रहा है। डूडा कार्यालय गया तो वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला।- विनोद कुमार
मैंने अपने भाई वाहिद की फाइल बनवाई। आवेदन हो गया। ढाई महीने से इंतजार कराया जा रहा है। अब कहा गया है कि 10 जनवरी के बाद आना। - राशिद खान
नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) के माध्यम से पहली श्रेणी में अर्ह आवेदनकर्ता स्ट्रीट वेंडर को 10 हजार रुपये बैंक से ऋण दिलाया जाता है। यह ऋण चुकाने पर दूसरी श्रेणी में 20 हजार और फिर तीसरी श्रेणी में 40 हजार रुपये का ऋण मिलता है। डूडा के रिकार्ड के मुताबिक कुल 21 बैंकों में पहली श्रेणी के लिए 1567, दूसरी श्रेणी के लिए 1864 व तीसरी श्रेणी के लिए 77 आवेदन स्वीकृति के बाद भी लंबित हैं।
लाभार्थियों की दिक्कतें
मैंने 10,000 का लोन लिया और भर दिया। बैंक वाले 2021 से 20 हजार रुपये के लोन के लिए मुझे टहला रहे हैं। यह भी नही बता रहे कि ऋण मिलेगा या नहीं। - राजेंद्र कुमार
मैंने ऋण समय पर जमा किया। तिलियापुर स्थित बैंक शाखा में एक महीने से दौड़ाया जा रहा है। डूडा कार्यालय गया तो वहां भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला।- विनोद कुमार
मैंने अपने भाई वाहिद की फाइल बनवाई। आवेदन हो गया। ढाई महीने से इंतजार कराया जा रहा है। अब कहा गया है कि 10 जनवरी के बाद आना। - राशिद खान
लीड बैंक अधिकारी वीके अरोरा ने बताया कि कहां, कितने आवेदन लंबित हैं? मैं सोमवार को डूडा से इसकी जानकारी लूंगा और जो लाभार्थी योजना की शर्तों को पूरा कर रहे हैं, उन्हें ऋण मिलेगा। बैंकर्स के साथ बातचीत करके लंबित होने के कारणों का भी निराकरण कराएंगे।
अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि कई बैंकों की शाखाओं में छोटी-छोटी कमियां बताकर लाभार्थियों को दौड़ाया जा रहा है। बैंकवार लंबित आवेदनों की संख्या लेकर मैंने लीडबैंक अधिकारी को पत्र लिखा है। ताकि वह शाखा प्रबंधकों से बात करके लाभार्थियों की संख्या बढ़ाएं, क्योंकि यह योजना प्रधानमंत्री की प्राथमिकता में है।
अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि कई बैंकों की शाखाओं में छोटी-छोटी कमियां बताकर लाभार्थियों को दौड़ाया जा रहा है। बैंकवार लंबित आवेदनों की संख्या लेकर मैंने लीडबैंक अधिकारी को पत्र लिखा है। ताकि वह शाखा प्रबंधकों से बात करके लाभार्थियों की संख्या बढ़ाएं, क्योंकि यह योजना प्रधानमंत्री की प्राथमिकता में है।