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Bareilly News: पन्नालाल ने दिखाया राजनीतिक रसूख, टीम को हड़काया
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बरेली। कभी मैनेजर तो कभी कंपनी मालिक बनकर किसानों को प्रभावित कर ठगी करने वाले पूर्व राज्यमंत्री पन्नालाल कश्यप ने क्राइम ब्रांच की टीम को भी दबाव में लेने की कोशिश की। उसने खुद को राजनीतिक रसूख वाला बताकर पहले टीम को हड़काने और फिर प्रलोभन देने की कोशिश की। हालांकि पुलिस दबाव में नहीं आई और उसे बरेली लाकर दाखिल कर दिया।
एसपी क्राइम मनीष सोनकर की पूछताछ में पन्नालाल कश्यप ने बताया कि उसने बीटेक और एलएलबी की है। उसे राजनीति का शौक है और वह वर्तमान में भी राजनीति करता है। उसने स्वीकार किया कि दो-तीन साल पहले बरेली के महिपाल यादव से उसकी मुलाकात गाजियाबाद के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में हुई थी। उसने जमीन के सौदे में अच्छे लाभ का लालच दिया था। तब उसने भी महिपाल का साथ दिया था और कुछ रुपये कमाए थे।
इससे पहले जब क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी को मेरठ के पास हिरासत में लिया तो उसने पहले खुद को निषाद पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बताया। फिर इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में उसने निषाद पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। टीम दबाव में नहीं आई तो वह निराश हो गया और पुलिस की गाड़ी में बैठ गया।
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गाजियाबाद के गेस्ट हाउस में बुलाकर करता था बैठक
खुद को बेचारा बताते हुए पन्नालाल कश्यप ने पुलिस को बताया कि मीरगंज निवासी नन्हे यादव और उसका रिश्तेदार महिपाल यादव ही इस ठग गिरोह के असली सरगना हैं। उसे तो इन्होंने कुछ समय के लिए जोड़ रखा था। हालांकि टीम ने जानकारी की तो पता लगा कि पन्नालाल का बसपा शासन में खासा रुतबा था। वह गाजियाबाद के सरकारी गेस्ट हाउस में बैठक करता था। किसानों के साथ कई डील वहीं की गईं। किसान उसके पद की जानकारी होने पर नहीं समझ पाते थे कि वह ठगी का शिकार होने जा रहे हैं।
ऐसे करते थे ठगी
मसीहाबाद गांव प्रधान रहा महिपाल यादव गिरोह का मुख्य सरगना बताया जाता है। वह रिश्तेदार नन्हे यादव के साथ मिलकर किसानों की जमीन पर फैक्टरी लगाने और होटल खोलने के नाम पर उनसे ठगी करता था। महिपाल खुद को बड़ी कंपनियों का मैनेजर बताकर संपन्न किसानों की जमीन का मुआयना करता था। राजवीर सिंह खुद का नाम प्रेमचंद पांडेय एडवोकेट और शाकिर बताकर किसानों से मिलता था। ये लोग जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर अपने फर्जी मालिकों से मिलवाते थे। उनसे किसानों को मोटी रकम दिलवाने का झांसा देकर कमीशन के नाम पर ठगी कर लेते थे। प्रदेश भर के ठगों का एक बड़ा नेटवर्क इस धंधे में शामिल था।
एसएसपी ने क्राइम ब्रांच को दी विवेचना
करीब तीन साल से पीड़ित किसान रिपोर्ट दर्ज कराने को भटक रहे थे। लगभग दो साल पहले तत्कालीन आईजी राकेश कुमार सिंह व मौजूदा एसएसपी अनुराग आर्य ने इस मामले में संज्ञान लेकर पीड़ित किसानों की रिपोर्ट लिखवाना शुरू की। करीब 38 मामले जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज कराए गए। भोजीपुरा और मीरगंज में सर्वाधिक मामले दर्ज थे। थाना पुलिस ने पीड़ितों की सुनवाई न की तो एसएसपी ने क्राइम ब्रांच को सभी मामलों की विवेचना ट्रांसफर कर दी। तब से कार्रवाई में तेजी आई है। पन्नालाल पर एसएसपी ने 25 हजार का इनाम भी घोषित किया था।
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काश्तकारों को ठगने वाले आरोपियों पर अधिकतम कार्रवाई की जाएगी। गिरोह पर गैंगस्टर लगाने के बाद प्रशासन की मदद से उनकी संपत्तियों की जांच कराई जाएगी। अवैध तरीके से कमाई गई संपत्ति को जब्त किया जाएगा। फिलहाल पन्नालाल कश्यप को जेल भेजा गया है। - अनुराग आर्य, एसएसपी
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एसपी क्राइम मनीष सोनकर की पूछताछ में पन्नालाल कश्यप ने बताया कि उसने बीटेक और एलएलबी की है। उसे राजनीति का शौक है और वह वर्तमान में भी राजनीति करता है। उसने स्वीकार किया कि दो-तीन साल पहले बरेली के महिपाल यादव से उसकी मुलाकात गाजियाबाद के पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में हुई थी। उसने जमीन के सौदे में अच्छे लाभ का लालच दिया था। तब उसने भी महिपाल का साथ दिया था और कुछ रुपये कमाए थे।
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इससे पहले जब क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी को मेरठ के पास हिरासत में लिया तो उसने पहले खुद को निषाद पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बताया। फिर इस बात पर जोर दिया कि हाल ही में उसने निषाद पार्टी छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। टीम दबाव में नहीं आई तो वह निराश हो गया और पुलिस की गाड़ी में बैठ गया।
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गाजियाबाद के गेस्ट हाउस में बुलाकर करता था बैठक
खुद को बेचारा बताते हुए पन्नालाल कश्यप ने पुलिस को बताया कि मीरगंज निवासी नन्हे यादव और उसका रिश्तेदार महिपाल यादव ही इस ठग गिरोह के असली सरगना हैं। उसे तो इन्होंने कुछ समय के लिए जोड़ रखा था। हालांकि टीम ने जानकारी की तो पता लगा कि पन्नालाल का बसपा शासन में खासा रुतबा था। वह गाजियाबाद के सरकारी गेस्ट हाउस में बैठक करता था। किसानों के साथ कई डील वहीं की गईं। किसान उसके पद की जानकारी होने पर नहीं समझ पाते थे कि वह ठगी का शिकार होने जा रहे हैं।
ऐसे करते थे ठगी
मसीहाबाद गांव प्रधान रहा महिपाल यादव गिरोह का मुख्य सरगना बताया जाता है। वह रिश्तेदार नन्हे यादव के साथ मिलकर किसानों की जमीन पर फैक्टरी लगाने और होटल खोलने के नाम पर उनसे ठगी करता था। महिपाल खुद को बड़ी कंपनियों का मैनेजर बताकर संपन्न किसानों की जमीन का मुआयना करता था। राजवीर सिंह खुद का नाम प्रेमचंद पांडेय एडवोकेट और शाकिर बताकर किसानों से मिलता था। ये लोग जमीन की खरीद-फरोख्त के नाम पर अपने फर्जी मालिकों से मिलवाते थे। उनसे किसानों को मोटी रकम दिलवाने का झांसा देकर कमीशन के नाम पर ठगी कर लेते थे। प्रदेश भर के ठगों का एक बड़ा नेटवर्क इस धंधे में शामिल था।
एसएसपी ने क्राइम ब्रांच को दी विवेचना
करीब तीन साल से पीड़ित किसान रिपोर्ट दर्ज कराने को भटक रहे थे। लगभग दो साल पहले तत्कालीन आईजी राकेश कुमार सिंह व मौजूदा एसएसपी अनुराग आर्य ने इस मामले में संज्ञान लेकर पीड़ित किसानों की रिपोर्ट लिखवाना शुरू की। करीब 38 मामले जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज कराए गए। भोजीपुरा और मीरगंज में सर्वाधिक मामले दर्ज थे। थाना पुलिस ने पीड़ितों की सुनवाई न की तो एसएसपी ने क्राइम ब्रांच को सभी मामलों की विवेचना ट्रांसफर कर दी। तब से कार्रवाई में तेजी आई है। पन्नालाल पर एसएसपी ने 25 हजार का इनाम भी घोषित किया था।
काश्तकारों को ठगने वाले आरोपियों पर अधिकतम कार्रवाई की जाएगी। गिरोह पर गैंगस्टर लगाने के बाद प्रशासन की मदद से उनकी संपत्तियों की जांच कराई जाएगी। अवैध तरीके से कमाई गई संपत्ति को जब्त किया जाएगा। फिलहाल पन्नालाल कश्यप को जेल भेजा गया है। - अनुराग आर्य, एसएसपी