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Bareilly News: पांचाल नगरी... सैलानियों को लुभा रही अध्यात्म और विरासत की गठरी
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बरेली। पांचाल नगरी की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और विभिन्न धर्मों से जुड़ी अध्यात्म की थाती सैलानियों को लुभा रही है। यही कारण है कि साल दर साल पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो रहा है। वर्ष 2023 में जिले में 81 लाख से ज्यादा सैलानी आए। इस साल यह संख्या एक करोड़ के पार पहुंच सकती है। बगल के जिले पीलीभीत में टाइगर रिजर्व होने के बावजूद वहां पर्यटकों की संख्या बरेली के सापेक्ष एक तिहाई ही है।
नाथ नगरी के नाम से पहचान रखने वाले शहर में सावन में भक्तों का तांता लगा रहता है। नाथ कॉरिडोर का निर्माण पूरा हो जाने पर यहां धार्मिक पर्यटन को और विस्तार मिलेगा। साथ ही, यह सुन्नी बरेलवी मुसलमानों का प्रमुख केंद्र है। आला हजरत दरगाह पर प्रतिवर्ष लाखों मुसलमान हाजिरी देने आते हैं। भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली रामनगर में जैन धर्मावलंबियों का तांता लगा रहता है।
आंकड़ों में पर्यटन
वर्ष पर्यटकों की संख्या
2020 9,43,623
2021 2,55,098
2022 35,44,467
2023 81,56,673
बरेली में घट गए विदेशी सैलानी
वर्ष विदेशी पर्यटकों की संख्या
2019 2328
2023 911
पीलीभीत में भी कुलांचे भर रहा पर्यटन
वर्ष पर्यटकों की संख्या
2019 4,74,370
2023 31,25,944
बरेली के प्रमुख पर्यटन स्थल
अहिच्छत्र का किला और रामनगर स्थित जैन मंदिर
रामनगर कस्बे में जैन समाज के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली है। यहां बने श्वेतांबर व दिगंबर मंदिर जैन धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र हैं। यहां से दो किमी दूर महाभारतकालीन पांचाल नगरी और राजा द्रुपद के किले के अवशेष हैं। रामनगर से पांच किलोमीटर की दूरी पर गुलड़िया में गौरी शंकर मंदिर भी लोक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहीं से कुछ दूरी पर ही महाभारतकालीन लीलौर झील (यक्ष सरोवर) भी है।
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दरगाह आला हजरत
आला हजरत के नाम से विख्यात इमाम अहमद रजा खां ने बरेली के सौदागरान मोहल्ले में दारुल उलूम मंजर-ए-इस्लाम की स्थापना की थी। देश-विदेश के लोग दीनी तालीम के लिए यहां आते हैं। यहीं खानकाह-ए-रजविया के नाम से विख्यात इमाम अहमद रजा खां की मजार है। इस्लामिक कैलेंडर के सफर मास की 23, 24, 25 तारीख को यहां उर्स होता है।
खानकाह नियाजिया
विख्यात सूफी संत हजरत शाह नियाज अहमद साहब का जन्म सरहिंद में हुआ था। बरेली के कुतुबखाना में उन्होंने अपनी रिहाइश बनाई और सिलसिला-ए-नियाजिया चल पड़ा। इसी स्थान पर सफेद संगमरमर से बनी खानकाह है। यहां देश- विदेश के अकीदतमंद आते हैं। यहां भी सालाना जलसे में बड़ी तादाद में लोग आते हैं।
सप्त नाथ मंदिर
यहां नाथ संप्रदाय से जुड़े सात शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र हैं। त्रिवटीनाथ मंदिर महाभारतकालीन है। धोपेश्वरनाथ मंदिर पर देश के विभिन्न हिस्सों के लोग आते हैं। त्रिवटीनाथ, धोपेश्वरनाथ, अलखनाथ, मणिनाथ, पशुपतिनाथ, वनखंडीनाथ व तपेश्वरनाथ मंदिरों को जोड़कर नाथ कॉरिडोर बन रहा है। मंदिर परिसर में 75 करोड़़ रुपये की लागत से पर्यटन सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है।
ये हैं प्रमुख चुनौतियां
रामनगर के किले तक जाने वाले मार्ग का 900 मीटर हिस्सा खराब था। इसमें 450 मीटर हिस्से पर ईंटों का खड़ंजा बना दिया गया, लेकिन बाकी हिस्सा ऊबड़ खाबड़ है और किले तक पहुंच पाना आसान नहीं है। बारिश के दिनों में तो आवागमन ठप ही हो जाता है। दिन भर में सौ पर्यटक भी नहीं पहुंच पाते। जो लोग आते हैं, वे जैन मंदिर से ही लौट जाते हैं। बरेली से रामनगर के जैन मंदिर तक के लिए सिटी बस सर्विस नहीं है। सिर्फ आंवला तक बस जाती है। उसके बाद निजी साधन या डग्गामार बसों का ही सहारा है। बरेली से पीलीभीत टाइगर रिजर्व तक का मार्ग फोरलेन नहीं है। पीलीभीत से टाइगर रिजर्व तक के मार्ग की हालत खराब है।
ये किए जाने की जरूरत
अगर बरेली से टाइम टेबल बनाकर वातानुकूलित मिनी बसें चलाई जाएं तो जैन तीर्थ रामनगर और अहिच्छत्र किले तक पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। रामनगर किले तक के मार्ग के अधूरे हिस्से को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग बनवाए। बरेली से जम्मू, जयपुर और दिल्ली के लिए नियमित तौर पर हवाई सेवाएं मिलें।
परिवहन व्यवस्था में हो सुधार
अहिच्छत्र मिला, रामनगर का जैन तीर्थ और गौरी शंकर धाम तक पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय से परिवहन की समुचित व्यवस्था नहीं है। पर्यटक अपने निजी वाहनों से आते हैं और घूम कर चले जाते हैं। यदि जिला मुख्यालय से यातायात के साधन अच्छे हो जाएं तो यहां हजारों की संख्या में प्रतिदिन पर्यटक पहुंचेंगे । - ओमप्रकाश, प्रबंधक, जैन मंदिर, रामनगर
उत्तर से दक्षिण तक पूरा भारत चारों धाम की वजह से आपस में जुड़ा है। भाषा कोई भी हो, पर धार्मिक आधार पर लोगों का जुड़ाव है, लेकिन सुविधाओं की कमी की वजह से लोग मंडल में बहुत कम आते हैं। कई महीने से दिल्ली की उड़ान बंद है, पर्यटन को बढ़ावा देने में यह बड़ी बाधा है। - सुनील सिंह, डीडीपुरम
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बदायूं के प्रसिद्ध स्थल
बड़े सरकार की जियारत
संत हजरत सुल्तान आफरीन साहब रहमतुल्लाह अलैह 12वीं शताब्दी में बदायूं आए थे। उनके निवास स्थान पर ही उनकी मजार है। यह स्थान बड़े सरकार की जियारत के नाम से मशहूर है। बरेली से इसकी दूरी 47 किलोमीटर है।
छोटे सरकार की जियारत
हजरत अबू बक्र रहमतुल्लाह की जियारत, छोटे सरकार की जियारत के नाम से मशहूर है। मजार के करीब ही खिलजी सुल्तान का बनवाया हुआ कुआं है, जो परियों के कुएं के नाम से प्रसिद्ध है।
सहसवान के सरसोता
सहसवान के सरसोता में तीर्थ सप्त स्रोत है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान परशुराम जब सहस्त्रबाहु का वध कर यहां से गुजर रहे थे, तब उन्होंने देखा कि रास्ते में ऋषि प्यासे हैं। तब उन्होंने अपने फरसे से जमीन पर सात वार किए थे और इससे जल स्रोत फूट पड़े थे। तभी से यह स्थान सप्तस्रोत (सरसोता) के नाम से विख्यात है। करीब में सहस्त्रबाहु के किले का टीला भी है।
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पीलीभीत के प्रसिद्ध स्थल
चूका बीच और पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत टाइगर रिजर्व और चूका बीच सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। शारदा नदी पर बने चूका बीच और पीटीआर में 15 नवंबर से 15 जून तक घूम सकते हैं। यह स्थान दिल्ली से 350 और बरेली से 70 किलोमीटर है। बीच के किनारे ठहरने के लिए वाटर, ट्री और बंबू हट पर बनी हैं, जिसे ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। इसी क्षेत्र में पौराणिक महत्व का गोमती उद्गम स्थल है।
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शाहजहांपुर के प्रसिद्ध स्थल
बलिदानियों की स्थली और हनुमत धाम
पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की जन्मस्थली शाहजहांपुर का हनुमत धाम और खन्नौत नदी का विरासत घाट पर्यटकों को आकर्षित करता है। हनुमत धाम में हनुमान जी 104 फुट ऊंची प्रतिमा है।
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नाथ नगरी के नाम से पहचान रखने वाले शहर में सावन में भक्तों का तांता लगा रहता है। नाथ कॉरिडोर का निर्माण पूरा हो जाने पर यहां धार्मिक पर्यटन को और विस्तार मिलेगा। साथ ही, यह सुन्नी बरेलवी मुसलमानों का प्रमुख केंद्र है। आला हजरत दरगाह पर प्रतिवर्ष लाखों मुसलमान हाजिरी देने आते हैं। भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली रामनगर में जैन धर्मावलंबियों का तांता लगा रहता है।
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आंकड़ों में पर्यटन
वर्ष पर्यटकों की संख्या
2020 9,43,623
2021 2,55,098
2022 35,44,467
2023 81,56,673
बरेली में घट गए विदेशी सैलानी
वर्ष विदेशी पर्यटकों की संख्या
2019 2328
2023 911
पीलीभीत में भी कुलांचे भर रहा पर्यटन
वर्ष पर्यटकों की संख्या
2019 4,74,370
2023 31,25,944
बरेली के प्रमुख पर्यटन स्थल
अहिच्छत्र का किला और रामनगर स्थित जैन मंदिर
रामनगर कस्बे में जैन समाज के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की तपोस्थली है। यहां बने श्वेतांबर व दिगंबर मंदिर जैन धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र हैं। यहां से दो किमी दूर महाभारतकालीन पांचाल नगरी और राजा द्रुपद के किले के अवशेष हैं। रामनगर से पांच किलोमीटर की दूरी पर गुलड़िया में गौरी शंकर मंदिर भी लोक आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहीं से कुछ दूरी पर ही महाभारतकालीन लीलौर झील (यक्ष सरोवर) भी है।
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दरगाह आला हजरत
आला हजरत के नाम से विख्यात इमाम अहमद रजा खां ने बरेली के सौदागरान मोहल्ले में दारुल उलूम मंजर-ए-इस्लाम की स्थापना की थी। देश-विदेश के लोग दीनी तालीम के लिए यहां आते हैं। यहीं खानकाह-ए-रजविया के नाम से विख्यात इमाम अहमद रजा खां की मजार है। इस्लामिक कैलेंडर के सफर मास की 23, 24, 25 तारीख को यहां उर्स होता है।
खानकाह नियाजिया
विख्यात सूफी संत हजरत शाह नियाज अहमद साहब का जन्म सरहिंद में हुआ था। बरेली के कुतुबखाना में उन्होंने अपनी रिहाइश बनाई और सिलसिला-ए-नियाजिया चल पड़ा। इसी स्थान पर सफेद संगमरमर से बनी खानकाह है। यहां देश- विदेश के अकीदतमंद आते हैं। यहां भी सालाना जलसे में बड़ी तादाद में लोग आते हैं।
सप्त नाथ मंदिर
यहां नाथ संप्रदाय से जुड़े सात शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र हैं। त्रिवटीनाथ मंदिर महाभारतकालीन है। धोपेश्वरनाथ मंदिर पर देश के विभिन्न हिस्सों के लोग आते हैं। त्रिवटीनाथ, धोपेश्वरनाथ, अलखनाथ, मणिनाथ, पशुपतिनाथ, वनखंडीनाथ व तपेश्वरनाथ मंदिरों को जोड़कर नाथ कॉरिडोर बन रहा है। मंदिर परिसर में 75 करोड़़ रुपये की लागत से पर्यटन सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है।
ये हैं प्रमुख चुनौतियां
रामनगर के किले तक जाने वाले मार्ग का 900 मीटर हिस्सा खराब था। इसमें 450 मीटर हिस्से पर ईंटों का खड़ंजा बना दिया गया, लेकिन बाकी हिस्सा ऊबड़ खाबड़ है और किले तक पहुंच पाना आसान नहीं है। बारिश के दिनों में तो आवागमन ठप ही हो जाता है। दिन भर में सौ पर्यटक भी नहीं पहुंच पाते। जो लोग आते हैं, वे जैन मंदिर से ही लौट जाते हैं। बरेली से रामनगर के जैन मंदिर तक के लिए सिटी बस सर्विस नहीं है। सिर्फ आंवला तक बस जाती है। उसके बाद निजी साधन या डग्गामार बसों का ही सहारा है। बरेली से पीलीभीत टाइगर रिजर्व तक का मार्ग फोरलेन नहीं है। पीलीभीत से टाइगर रिजर्व तक के मार्ग की हालत खराब है।
ये किए जाने की जरूरत
अगर बरेली से टाइम टेबल बनाकर वातानुकूलित मिनी बसें चलाई जाएं तो जैन तीर्थ रामनगर और अहिच्छत्र किले तक पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। रामनगर किले तक के मार्ग के अधूरे हिस्से को पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग बनवाए। बरेली से जम्मू, जयपुर और दिल्ली के लिए नियमित तौर पर हवाई सेवाएं मिलें।
परिवहन व्यवस्था में हो सुधार
अहिच्छत्र मिला, रामनगर का जैन तीर्थ और गौरी शंकर धाम तक पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय से परिवहन की समुचित व्यवस्था नहीं है। पर्यटक अपने निजी वाहनों से आते हैं और घूम कर चले जाते हैं। यदि जिला मुख्यालय से यातायात के साधन अच्छे हो जाएं तो यहां हजारों की संख्या में प्रतिदिन पर्यटक पहुंचेंगे । - ओमप्रकाश, प्रबंधक, जैन मंदिर, रामनगर
उत्तर से दक्षिण तक पूरा भारत चारों धाम की वजह से आपस में जुड़ा है। भाषा कोई भी हो, पर धार्मिक आधार पर लोगों का जुड़ाव है, लेकिन सुविधाओं की कमी की वजह से लोग मंडल में बहुत कम आते हैं। कई महीने से दिल्ली की उड़ान बंद है, पर्यटन को बढ़ावा देने में यह बड़ी बाधा है। - सुनील सिंह, डीडीपुरम
बदायूं के प्रसिद्ध स्थल
बड़े सरकार की जियारत
संत हजरत सुल्तान आफरीन साहब रहमतुल्लाह अलैह 12वीं शताब्दी में बदायूं आए थे। उनके निवास स्थान पर ही उनकी मजार है। यह स्थान बड़े सरकार की जियारत के नाम से मशहूर है। बरेली से इसकी दूरी 47 किलोमीटर है।
छोटे सरकार की जियारत
हजरत अबू बक्र रहमतुल्लाह की जियारत, छोटे सरकार की जियारत के नाम से मशहूर है। मजार के करीब ही खिलजी सुल्तान का बनवाया हुआ कुआं है, जो परियों के कुएं के नाम से प्रसिद्ध है।
सहसवान के सरसोता
सहसवान के सरसोता में तीर्थ सप्त स्रोत है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान परशुराम जब सहस्त्रबाहु का वध कर यहां से गुजर रहे थे, तब उन्होंने देखा कि रास्ते में ऋषि प्यासे हैं। तब उन्होंने अपने फरसे से जमीन पर सात वार किए थे और इससे जल स्रोत फूट पड़े थे। तभी से यह स्थान सप्तस्रोत (सरसोता) के नाम से विख्यात है। करीब में सहस्त्रबाहु के किले का टीला भी है।
पीलीभीत के प्रसिद्ध स्थल
चूका बीच और पीलीभीत टाइगर रिजर्व
पीलीभीत टाइगर रिजर्व और चूका बीच सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। शारदा नदी पर बने चूका बीच और पीटीआर में 15 नवंबर से 15 जून तक घूम सकते हैं। यह स्थान दिल्ली से 350 और बरेली से 70 किलोमीटर है। बीच के किनारे ठहरने के लिए वाटर, ट्री और बंबू हट पर बनी हैं, जिसे ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। इसी क्षेत्र में पौराणिक महत्व का गोमती उद्गम स्थल है।
शाहजहांपुर के प्रसिद्ध स्थल
बलिदानियों की स्थली और हनुमत धाम
पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की जन्मस्थली शाहजहांपुर का हनुमत धाम और खन्नौत नदी का विरासत घाट पर्यटकों को आकर्षित करता है। हनुमत धाम में हनुमान जी 104 फुट ऊंची प्रतिमा है।