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Bareilly News: निगरानी धड़ाम, महीनों की दौड़ के बाद भी अंकपत्र पर ठीक नहीं होता नाम

Sat, 22 Aug 2026 01:13 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Sat, 22 Aug 2026 01:13 AM IST
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Oversight fails miserably; name on marksheet remains uncorrected even after months of running from pillar to post.
बरेली। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के क्षेत्रीय कार्यालय में निगरानी व्यवस्था धड़ाम है। सीसी कैमरे निष्क्रिय हैं। अंकपत्र पर नाम आदि के संशोधन की प्रक्रिया भी काफी लंबी है। कर्मचारी इसी का फायदा उठाते हैं। छात्रा प्रिया ने हिम्मत दिखाई तो वरिष्ठ सहायक मोहम्मद नवेद 10 हजार रुपये घूस लेते विजिलेंस टीम की गिरफ्त में आ गया। कई विद्यार्थी इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाते। वे चुपचाप रुपये देकर अपना काम करा लेते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने शुक्रवार को इसकी पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। विद्यार्थी सुबह दस बजे से ही 10वीं व 12वीं की मार्कशीट में संशोधन कराने व नई मार्कशीट लेने के लिए पहुंचने लगे थे। उन्होंने बताया कि नाम में एक अक्षर बदलवाने के लिए भी चार से छह माह लग जाते हैं। मामला जितना पुराना हो, उतनी ही जटिलताएं सामने आती हैं।
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मुरादाबाद व बरेली मंडल के नौ जिलों का काम इसी कार्यालय में होता है। अलग-अलग पटल पर तैनात लिपिक पहले विद्यार्थियों को बार-बार दौड़ाते हैं। कुछ लिपिक नाम में संशोधन की प्रक्रिया को लंबा बताकर अपने-अपने तरीके से इसका फायदा उठाते हैं। बोर्ड की क्षेत्रीय सचिव रेखा दिवाकर ने नवेद के प्रकरण पर कहा कि कार्यालय में इस तरह की हरकत अक्षम्य है। हालांकि, पहले उसकी कोई शिकायत नहीं आई थी।
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सीसी कैमरे ठीक नहीं होने के सवाल पर क्षेत्रीय सचिव ने कहा कि पूरे परिसर में 21 अनुभाग व 72 कर्मचारी हैं। कुछ महीने पहले बंदरों ने तार तोड़ दिए थे, इसलिए कैमरे निष्क्रिय हो गए हैं। भविष्य में विद्यार्थियों को असुविधा न हो, इसके लिए एक प्रकोष्ठ शुरू करने की तैयारी है। इसमें विद्यार्थी अपने लंबित प्रकरण की शिकायत कर सकेंगे। ऐसे मामलों का निपटारा 15 दिन में किया जाएगा।

नौकरी के लिए आवेदन करने में आ रही परेशानी
मामला 1
मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा से आए निर्दोष कुमार ने बताया कि उनकी मार्कशीट में पिता के नाम में संशोधन होना है। फरवरी में आवेदन किया था। 16-17 चक्कर लगा चुका हूं, पर अब तक काम नहीं हुआ। इससे सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने में समस्या आती है। पहले एक लिपिक ने महीनों लटकाया, फिर दूसरे बाबू के पास गया। उन्होंने जल्द काम कराने का आश्वासन दिया है।
अगली कक्षा में प्रवेश में आ रही दिक्कत

मामला 2
बेटे की मार्कशीट में संशोधन के लिए बदायूं से आए शिवकांत ने बताया कि बेटे ने 10वीं की परीक्षा पास कर ली है, लेकिन स्कूल की गलती से अंकपत्र पर उसका नाम गलत हो गया है। उसमें संशोधन कराने के लिए बीते तीन महीनों में चौथी बार आए हैं। अब भी बताया जा रहा है कि संशोधन में कम से कम तीन महीने लगेंगे। मार्कशीट गड़बड़ होने से 11वीं में प्रवेश में दिक्कत आ रही है।
मार्कशीट के इंतजार में हाथ से फिसली नौकरी

मामला 3
बिजनौर से आए अमेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी 12वीं की मार्कशीट फट गई थी। दूसरी मार्कशीट के लिए चार-पांच माह से चक्कर लगा रहा हूं। मैं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा हूं। बीच में बीएसएफ में चयन हो गया था, लेकिन मार्कशीट नहीं होने की वजह से सत्यापन से हटना पड़ा। अब कांस्टेबल में चयन हुआ है, लेकिन मार्कशीट का इंतजार कर रहा हूं।
चार माह बाद मिली एक मार्कशीट, दूसरी का पता नहीं

मामला 4
अमरोहा से आए अमित कुमार ने बताया कि उनकी हाईस्कूल व इंटर की मार्कशीट खो गई थीं। दूसरी मार्कशीट प्राप्त करने के लिए आवेदन किया तो बताया गया कि दोनों मार्कशीट एक महीने में घर पहुंच जाएंगी, लेकिन चार माह बाद सिर्फ एक मार्कशीट मिली। बार-बार टालमटोल कर परेशान किया गया। एक मार्कशीट मिली, दूसरी के लिए कई चक्कर काटने पड़े।

मार्कशीट में नहीं, अब आधार कार्ड में कराऊंगी संशोधन

मामला 5
अपने कुछ माह के बच्चे के साथ आईं सौ फुटा रोड निवासी रजनी ने बताया कि उनकी 12वीं की मार्कशीट पर नाम में संशोधन होना है। इसके लिए विद्यालय और बोर्ड कार्यालय की ओर से इतनी लंबी कार्रवाई बताई गई कि अब यह काम एक बच्चे की जिम्मेदारी के साथ कराना असंभव है। इसलिए अब मार्कशीट ठीक कराने के बजाय जो नाम मार्कशीट पर है, वही आधार कार्ड पर दर्ज कराऊंगी।
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