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लालफाटक ओवरब्रिजः कैंट की जमीन के बदले जमीन ही देनी होगी प्रशासन को
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जिक्र की फिक्र में काट दिए चार साल कैंट बोर्ड की पहली शर्त फिर बहाल
सेतु निगम के आग्रह पर रक्षा संपदा अधिकारी ने दिया अपनी छह जमीनों का ब्योरा
इन्हीं में से किसी जमीन के बराबर प्रशासन को दिलानी होगी बराबर मूल्य की जमीन
बरेली। चार साल से ज्यादा वक्त जिक्र की फिक्र में कटा और अब लालफाटक ओवरब्रिज की कहानी लौट फिरकर फिर वहीं आ गई है जहां से शुरू हुई थी। यह साफ हो गया है कि सेना की जमीन पर पुल बनाने के लिए सेतु निगम को उतनी ही जमीन कहीं और देनी पड़ेगी। रक्षा संपदा अधिकारी ने सेतु निगम को ऐसी छह जगहों का ब्योरा भेजा है जो रक्षा मंत्रालय की हैं, प्रशासन को इन्हीं से सटी कोई भूमि रक्षा मंत्रालय को उपलब्ध करानी पड़ेगी। सेतु निगम के सीपीएम ने इस संबंध में डीएम को पत्र लिख दिया है।
लालफाटक क्रॉसिंग पर बन रहे ओवरब्रिज के लिए रक्षा मंत्रालय की करीब 6500 वर्गमीटर भूमि पर भी निर्माण होना है। इस भूमि के अधिग्रहण के लिए पुल का निर्माण शुरू किए जाते वक्त ही एनओसी मांगी गई थी जो अब तक नहीं मिल पाई है। इस वजह से ओवरब्रिज का कैंट की ओर निर्माण नहीं हो पा रहा है। रक्षा मंत्रालय की शर्त के मुताबिक प्रशासन को कैंट की 6500 वर्गमीटर भूमि के बदले इतनी ही कीमत की जमीन कहीं और रक्षा मंत्रालय को देनी थी, लेकिन समस्या यह है कि प्रशासन ने जिन जमीनों को इसके लिए चिह्नित किया, वे कैंट से काफी दूर थीं। इसलिए रक्षा संपदा विभाग ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद प्रशासन भी चुपचाप बैठ गया। कभी लीज पर जमीन लेने और कभी वर्किंग ऑर्डर लेकर निर्माण कराने के जिक्र में वक्त कटता रहा।
हाल ही में प्रमुख सचिव नवनीत सहगल की ओर से दबाव पड़ने पर कुछ समय पहले डीएम ने सेतु निगम अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद 16 जनवरी को सेतु निगम के सीपीएम देवेंद्र सिंह ने रक्षा संपदा अधिकारी कौशल गौतम से वार्ता की। रक्षा संपदा अधिकारी ने बताया था कि ओवरब्रिज के लिए मांगी जा रही जमीन में कुछ भाग सेना और कुछ कैंट बोर्ड का है। सीपीएम के आग्रह पर रक्षा संपदा अधिकारी ने अब उन जगहों का भी ब्योरा भेज दिया है जो रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व में हैं। ओवरब्रिज के लिए जमीन लेने को प्रशासन को इसी से सटी कोई जमीन मुहैया करानी होगी। सीपीएम ने इस बारे में डीएम को लिख दिया है।
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यहां देनी होगी बदले में जमीन
बरेली कैंट में रक्षा मंत्रालय की 4131.3995 एकड़ जमीन है। इसके अलावा फतेहगंज पश्चिमी फौजी पड़ाव में 12.87 एकड़, फतेहगंज पूर्वी फौजी पड़ाव में 24.15 एकड़, भोजीपुरा फौजी पड़ाव में 6.810 एकड़, आलमपुर जाफराबाद फौजी पड़ाव में 17.20 एकड़ और इंद्रजागीर फौजी पड़ाव में 6.570 एकड़ भूमि है। रक्षा संपदा विभाग ने इन्हीं जमीनों से सटी कोई जमीन बदले में मांगी है।
तत्कालीन डीएम की एक गलती ने
पांच साल तक अटकाया मामला
लालफाटक ओवरब्रिज के लिए रक्षा विभाग की जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव तत्कालीन डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह के कार्यकाल में बनाकर भेजा गया था। रक्षा संपदा विभाग के सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन डीएम ने इस प्रस्ताव में सिर्फ एनओसी की मांग की थी और लीज पर जमीन दिए जाने या वर्किंग ऑर्डर के जरिये निर्माण शुरू कराने की अनुमति जैसे विकल्प इसमें शामिल करने में चूक गए थे। एनओसी के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय ने अपने नियमों के मुताबिक बराबर मूल्य की दूसरी जमीन देने की शर्त रख दी जिसे मुहैया कराने में प्रशासन नाकाम रहा। सूत्रों के मुताबिक अगर डीएम उस प्रस्ताव में लीज या वर्किंग ऑर्डर के विकल्प शामिल करा देते तो यह मामला इतना लंबा न खिंचता।
सेतु निगम के अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व वाली भूमि का ब्योरा मांगा था। सीपीएम को छह जगहों पर सेना की भूमि का रिकार्ड भेज दिया गया है। -कौशल गौतम, रक्षा संपदा अधिकारी, बरेली छावनी
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सेतु निगम के आग्रह पर रक्षा संपदा अधिकारी ने दिया अपनी छह जमीनों का ब्योरा
इन्हीं में से किसी जमीन के बराबर प्रशासन को दिलानी होगी बराबर मूल्य की जमीन
बरेली। चार साल से ज्यादा वक्त जिक्र की फिक्र में कटा और अब लालफाटक ओवरब्रिज की कहानी लौट फिरकर फिर वहीं आ गई है जहां से शुरू हुई थी। यह साफ हो गया है कि सेना की जमीन पर पुल बनाने के लिए सेतु निगम को उतनी ही जमीन कहीं और देनी पड़ेगी। रक्षा संपदा अधिकारी ने सेतु निगम को ऐसी छह जगहों का ब्योरा भेजा है जो रक्षा मंत्रालय की हैं, प्रशासन को इन्हीं से सटी कोई भूमि रक्षा मंत्रालय को उपलब्ध करानी पड़ेगी। सेतु निगम के सीपीएम ने इस संबंध में डीएम को पत्र लिख दिया है।
लालफाटक क्रॉसिंग पर बन रहे ओवरब्रिज के लिए रक्षा मंत्रालय की करीब 6500 वर्गमीटर भूमि पर भी निर्माण होना है। इस भूमि के अधिग्रहण के लिए पुल का निर्माण शुरू किए जाते वक्त ही एनओसी मांगी गई थी जो अब तक नहीं मिल पाई है। इस वजह से ओवरब्रिज का कैंट की ओर निर्माण नहीं हो पा रहा है। रक्षा मंत्रालय की शर्त के मुताबिक प्रशासन को कैंट की 6500 वर्गमीटर भूमि के बदले इतनी ही कीमत की जमीन कहीं और रक्षा मंत्रालय को देनी थी, लेकिन समस्या यह है कि प्रशासन ने जिन जमीनों को इसके लिए चिह्नित किया, वे कैंट से काफी दूर थीं। इसलिए रक्षा संपदा विभाग ने इन्हें लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद प्रशासन भी चुपचाप बैठ गया। कभी लीज पर जमीन लेने और कभी वर्किंग ऑर्डर लेकर निर्माण कराने के जिक्र में वक्त कटता रहा।
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हाल ही में प्रमुख सचिव नवनीत सहगल की ओर से दबाव पड़ने पर कुछ समय पहले डीएम ने सेतु निगम अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद 16 जनवरी को सेतु निगम के सीपीएम देवेंद्र सिंह ने रक्षा संपदा अधिकारी कौशल गौतम से वार्ता की। रक्षा संपदा अधिकारी ने बताया था कि ओवरब्रिज के लिए मांगी जा रही जमीन में कुछ भाग सेना और कुछ कैंट बोर्ड का है। सीपीएम के आग्रह पर रक्षा संपदा अधिकारी ने अब उन जगहों का भी ब्योरा भेज दिया है जो रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व में हैं। ओवरब्रिज के लिए जमीन लेने को प्रशासन को इसी से सटी कोई जमीन मुहैया करानी होगी। सीपीएम ने इस बारे में डीएम को लिख दिया है।
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यहां देनी होगी बदले में जमीन
बरेली कैंट में रक्षा मंत्रालय की 4131.3995 एकड़ जमीन है। इसके अलावा फतेहगंज पश्चिमी फौजी पड़ाव में 12.87 एकड़, फतेहगंज पूर्वी फौजी पड़ाव में 24.15 एकड़, भोजीपुरा फौजी पड़ाव में 6.810 एकड़, आलमपुर जाफराबाद फौजी पड़ाव में 17.20 एकड़ और इंद्रजागीर फौजी पड़ाव में 6.570 एकड़ भूमि है। रक्षा संपदा विभाग ने इन्हीं जमीनों से सटी कोई जमीन बदले में मांगी है।
तत्कालीन डीएम की एक गलती ने
पांच साल तक अटकाया मामला
लालफाटक ओवरब्रिज के लिए रक्षा विभाग की जमीन के अधिग्रहण का प्रस्ताव तत्कालीन डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह के कार्यकाल में बनाकर भेजा गया था। रक्षा संपदा विभाग के सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन डीएम ने इस प्रस्ताव में सिर्फ एनओसी की मांग की थी और लीज पर जमीन दिए जाने या वर्किंग ऑर्डर के जरिये निर्माण शुरू कराने की अनुमति जैसे विकल्प इसमें शामिल करने में चूक गए थे। एनओसी के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय ने अपने नियमों के मुताबिक बराबर मूल्य की दूसरी जमीन देने की शर्त रख दी जिसे मुहैया कराने में प्रशासन नाकाम रहा। सूत्रों के मुताबिक अगर डीएम उस प्रस्ताव में लीज या वर्किंग ऑर्डर के विकल्प शामिल करा देते तो यह मामला इतना लंबा न खिंचता।
सेतु निगम के अधिकारियों ने रक्षा मंत्रालय के स्वामित्व वाली भूमि का ब्योरा मांगा था। सीपीएम को छह जगहों पर सेना की भूमि का रिकार्ड भेज दिया गया है। -कौशल गौतम, रक्षा संपदा अधिकारी, बरेली छावनी