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दियूनी डैम पुलिस चौकी के पास फिर पहुंचा तेंदुआ
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अमरिया (पीलीभीत)। खेतों में रह रहे बाघ और तेंदुए की चहलकदमी लगातार आबादी वाले हिस्से में देखने को मिल रही है। अब दियूनी डैम पुलिस चौकी के पास चकरोड पर तेंदुए के पगचिह्न मिले तो दहशत फैल गई। वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर पगचिह्न ट्रेस किए। हर बार की तरह ग्रामीणों को अलर्ट कर टीम वापस चली गई। समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं हो सका है।
तहसील क्षेत्र में छह साल से अधिक समय से बाघ और तेंदुए खेतों में रह रहे हैं, खासतौर से गन्ने की फसल के वक्त तो इनकी संख्या काफी हो जाती है। इन्हें जंगल में शिफ्ट करने की कवायदें कई बार शुरू हुई, लेकिन इसको मुकाम तक नहीं पहुंचाया जा सका। इसके चलते ग्रामीणों को खेती और मजदूरी पर जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे दियूनी डैम पुलिस चौकी से सटे चकरोड पर तेंदुए के पगचिह्न मिले। ग्रामीणों ने पगचिह्न देखे तो शोर मच गया। आसपास के लोग जमा हुए और सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। वन रक्षक शैलेंद्र कुमार, चेतन कुमार और कैलाश कुमार मौके पर पहुंचे। पगचिह्न ट्रेस करने पर तेंदुए के निकले। दियूनी डैम चौकी पर छह पालतू कुत्ते थे, इसमें अब चार ही दिखाई दे रहे। ऐसे में कुत्तों के निवाला बनाने की भी गांव में चर्चा तेज रही। उधर, दियूनी डैम पुलिस चौकी के पास बाघ और तेंदुए की चहलकदमी न थमने से पुलिसकर्मी भी दहशत में है। चौकी प्रभारी हरजीत सिंह ने बताया कि परिसर में दीवार न होने से दिक्कत रहती है। अंधेरा होते ही बाहर निकलने पर बाघ-तेंदुए का डर रहता है।
दो दिन पहले जगत गांव में दिखा था तेंदुआ
बृहस्पतिवार रात को तेंदुआ जगत गांव में देखा गया था। तेंदुए ने दहाड़ भी लगाई थी। इस पर जमा ग्रामीणों ने शोर मचाकर पटाखे दागे तो तेंदुआ खेत की तरफ भाग गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की थी। गांव के दिलबाग सिंह और रक्षपाल सिंह का कहना था कि उन्होंने टार्च की रोशनी में कब्रिस्तान के पास तेंदुआ देखा था।
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कभी तेंदुआ और कभी बाघ आबादी क्षेत्र में पहुंचता है। खेतों के अलावा सड़कों पर निकलने में भी डर लगने लगा है। वन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। -कुलजीत सिंह, ग्रामीण
कई सालों से समस्या चल रही है। कई बार बाघ-तेंदुए की समस्या से निजात दिलाने का विश्वास दिलाया गया, मगर समाधान नहीं हुआ। फसलों की रखवाली भी नहीं हो पा रही। - सरजीत सिंह
पुलिस चौकी के पास चकरोड पर तेंदुए के पगमार्क मिले हैं। सूचना मिलने पर टीम मौके पर भेजकर पगचिह्न ट्रेस कराए गए। ग्रामीणों को अलर्ट किया गया है। अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है। - सतेंद्र कुमार चौधरी, रेंजर, सामाजिक वानिकी
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तहसील क्षेत्र में छह साल से अधिक समय से बाघ और तेंदुए खेतों में रह रहे हैं, खासतौर से गन्ने की फसल के वक्त तो इनकी संख्या काफी हो जाती है। इन्हें जंगल में शिफ्ट करने की कवायदें कई बार शुरू हुई, लेकिन इसको मुकाम तक नहीं पहुंचाया जा सका। इसके चलते ग्रामीणों को खेती और मजदूरी पर जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा। शनिवार दोपहर करीब 12 बजे दियूनी डैम पुलिस चौकी से सटे चकरोड पर तेंदुए के पगचिह्न मिले। ग्रामीणों ने पगचिह्न देखे तो शोर मच गया। आसपास के लोग जमा हुए और सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी गई। वन रक्षक शैलेंद्र कुमार, चेतन कुमार और कैलाश कुमार मौके पर पहुंचे। पगचिह्न ट्रेस करने पर तेंदुए के निकले। दियूनी डैम चौकी पर छह पालतू कुत्ते थे, इसमें अब चार ही दिखाई दे रहे। ऐसे में कुत्तों के निवाला बनाने की भी गांव में चर्चा तेज रही। उधर, दियूनी डैम पुलिस चौकी के पास बाघ और तेंदुए की चहलकदमी न थमने से पुलिसकर्मी भी दहशत में है। चौकी प्रभारी हरजीत सिंह ने बताया कि परिसर में दीवार न होने से दिक्कत रहती है। अंधेरा होते ही बाहर निकलने पर बाघ-तेंदुए का डर रहता है।
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दो दिन पहले जगत गांव में दिखा था तेंदुआ
बृहस्पतिवार रात को तेंदुआ जगत गांव में देखा गया था। तेंदुए ने दहाड़ भी लगाई थी। इस पर जमा ग्रामीणों ने शोर मचाकर पटाखे दागे तो तेंदुआ खेत की तरफ भाग गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की थी। गांव के दिलबाग सिंह और रक्षपाल सिंह का कहना था कि उन्होंने टार्च की रोशनी में कब्रिस्तान के पास तेंदुआ देखा था।
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कभी तेंदुआ और कभी बाघ आबादी क्षेत्र में पहुंचता है। खेतों के अलावा सड़कों पर निकलने में भी डर लगने लगा है। वन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। -कुलजीत सिंह, ग्रामीण
कई सालों से समस्या चल रही है। कई बार बाघ-तेंदुए की समस्या से निजात दिलाने का विश्वास दिलाया गया, मगर समाधान नहीं हुआ। फसलों की रखवाली भी नहीं हो पा रही। - सरजीत सिंह
पुलिस चौकी के पास चकरोड पर तेंदुए के पगमार्क मिले हैं। सूचना मिलने पर टीम मौके पर भेजकर पगचिह्न ट्रेस कराए गए। ग्रामीणों को अलर्ट किया गया है। अधिकारियों को इसकी सूचना दे दी गई है। - सतेंद्र कुमार चौधरी, रेंजर, सामाजिक वानिकी