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भाभी को नि:संतान बताकर बनवा लिया फर्जी वारिसान प्रमाणपत्र
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महिला की पुत्रवधू की शिकायत पर जांच के बाद निरस्त किया गया सर्टिफिकेट
बरेली। भाभी को नि:संतान बताकर एक शख्स ने फर्जी तरीके से अपने नाम वारिसान प्रमाणपत्र बनवा लिया। शिकायत मिलने पर तहसीलदार सदर ने जांच की तो पता चला कि महिला का शादीशुदा पुत्र था। उसकी मृत्यु के बाद पत्नी ने पुनर्विवाह भी नहीं किया। इस आधार पर नि:संतान बताकर बनवाए गए वारिसान प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया गया।
नरेश चंद्र शर्मा निवासी राजेंद्रनगर ने 27 अगस्त 2016 को अपनी भाभी विष्णु वर्मा को नि:संतान बनाते हुए उनकी मृत्यु के बाद पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। इस आधार पर दो दिसंबर, 2016 को उसका वारिसान प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद नरेश चंद्र शर्मा ने अपना नाम नरेश चंद्र वर्मा करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। तत्कालीन तहसीलदार सदर ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की रिपोर्ट के बाद संशोधित नाम का वारिसान प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद निधि सोनी पत्नी स्वर्गीय आशुतोष वर्मा निवासी राजेंद्रनगर ने छह मई, 2019 को तहसील में प्रार्थना पत्र दिया कि नरेश चंद्र शर्मा निवासी काशीपुर (उत्तराखंड) ने अवैध तरीके से वारिसान प्रमाणपत्र बनवा लिया है। विष्णु वर्मा नि:संतान नहीं थीं। आशुतोष वर्मा उनके पुत्र थे। निधि सोनी ने बताया कि उनकी शादी आशुतोष वर्मा से हुई थी। उनके निधन के बाद निधि ने पुनर्विवाह नहीं किया। लिहाजा विष्णु वर्मा की पुत्रवधू होने के नाते वह जायज वारिसान की श्रेणी में आती हैं। तहसीलदार सदर की आख्या के आधार पर नरेश वर्मा को जारी किया गया वारिसान प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया। एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि नरेश के नाम जारी वारिसान प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया है।
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बरेली। भाभी को नि:संतान बताकर एक शख्स ने फर्जी तरीके से अपने नाम वारिसान प्रमाणपत्र बनवा लिया। शिकायत मिलने पर तहसीलदार सदर ने जांच की तो पता चला कि महिला का शादीशुदा पुत्र था। उसकी मृत्यु के बाद पत्नी ने पुनर्विवाह भी नहीं किया। इस आधार पर नि:संतान बताकर बनवाए गए वारिसान प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया गया।
नरेश चंद्र शर्मा निवासी राजेंद्रनगर ने 27 अगस्त 2016 को अपनी भाभी विष्णु वर्मा को नि:संतान बनाते हुए उनकी मृत्यु के बाद पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। इस आधार पर दो दिसंबर, 2016 को उसका वारिसान प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद नरेश चंद्र शर्मा ने अपना नाम नरेश चंद्र वर्मा करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। तत्कालीन तहसीलदार सदर ने राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की रिपोर्ट के बाद संशोधित नाम का वारिसान प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इसके बाद निधि सोनी पत्नी स्वर्गीय आशुतोष वर्मा निवासी राजेंद्रनगर ने छह मई, 2019 को तहसील में प्रार्थना पत्र दिया कि नरेश चंद्र शर्मा निवासी काशीपुर (उत्तराखंड) ने अवैध तरीके से वारिसान प्रमाणपत्र बनवा लिया है। विष्णु वर्मा नि:संतान नहीं थीं। आशुतोष वर्मा उनके पुत्र थे। निधि सोनी ने बताया कि उनकी शादी आशुतोष वर्मा से हुई थी। उनके निधन के बाद निधि ने पुनर्विवाह नहीं किया। लिहाजा विष्णु वर्मा की पुत्रवधू होने के नाते वह जायज वारिसान की श्रेणी में आती हैं। तहसीलदार सदर की आख्या के आधार पर नरेश वर्मा को जारी किया गया वारिसान प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया। एसडीएम सदर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि नरेश के नाम जारी वारिसान प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया है।
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