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शहर विधायक की मुख्यमंत्री से शिकायत पर प्रशासन में हड़कंप
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बरेली। राजेंद्रनगर स्थित आवास विकास परिषद योजना बी- ब्लाक में प्राइमरी स्कूल संचालित करने को आवंटित भूखंड पर विभागीय मिलीभगत से डिग्री कालेज बन गया और परिसर में एक बैंक भी खुलवा दिया गया। नियम विरुद्ध निर्माण कराने और अनुबंधन के विपरीत कामर्शियल गतिविधि शुरू होने पर 12 वर्ष पहले शासन ने भूखंड का आवंटन निरस्त कर अवैध निर्माण गिराने के आदेश दिए, लेकिन प्रशासन इसे भी दबाकर बैठ गया। अब नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार मुख्यमंत्री को इस मामले में को पत्र लिखकर शासन को उसका ही आदेश याद दिलाया है, जिसमें कहा गया था कि अवैध निर्माण तुरंत तोड़े और फिर सूचित करें। विधायक की चिट्ठी से अब प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
आवास विकास परिषद के अफसरों और आवंटियों में होने वाली मिलीभगत और अवैध निर्माण कराने की कारगुजारी 12 साल बाद सामने आई है। नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार के पत्र पर कार्रवाई होने पर परिषद के कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। इसमें पुलिस-प्रशासन की लापरवाही और शासन का आदेश दबाने के गंभीर मामले का भी खुलासा हुआ है। विशेष सचिव आवास और शहरी नियोजन अनुभाग-2 यूपी सिंह ने तीन जनवरी 2007 बरेली डीएम और एसएसपी को लिखित आदेश में कहा गया था कि राजेंद्रनगर स्थित परिषद योजना ब्लाक-बी भूखंड पर अवैध निर्माण कर स्कूल संचालित हो रहा है। इसका मानचित्र स्वीकृत नहीं है। इसलिए अवैध निर्माण ध्वस्त किया जाए। परिषद के स्थानीय अफसरों ने अवैध निर्माण कर्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट भी थाना कोतवाली में दर्ज कराई थी। शासन ने अवैध निर्माण गिराने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेट का सहयोग लेने और इस कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश भी दिए थे। शासन ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि प्रशासन की शिथिलता से अवैध निर्माण जारी है। इसके बाद भी 12 साल तक प्रशासन मौन साधा रहा और स्कूल प्रबंधन ने प्राइमरी की जगह डिग्री कालेज शुरू करने के साथ ही परिसर में ही केनरा बैंक शाखा भी खुलवा दी।
प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
विधायक डॉ. अरुण कुमार द्वारा लिखे पत्र पर डीएम वीके सिंह ने तहसील और राजस्व अफसरों से जांच रिपोर्ट मांगी है। तहसील प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसमें कहा गया है कि आवास विकास परिषद ने आवंटन नियमों के विपरीत अवैध कराने और शर्तों का उल्लंघन के चलते 26 मार्च 1987 को आवंटन रद करने की कार्रवाई कर चुका है। जांच में कहा गया है कि कालेज प्रबंधन से संपर्क किया गया तो वह कोई भी साक्ष्य नहीं दे पाया। परिसर में केनरा बैंक भी संचालित हो रहा है। तहसील प्रशासन ने कार्रवाई के लिए अपनी संस्तुति डीएम कार्यालय को सौंप दी है।
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मैं अभी पिछले माह ही यहां तैनात हुआ हूं। सूरजभान स्कूल को आवंटित भूखंड पर मानचित्र स्वीकृत के बिना अवैध निर्माण आदि संबंधी जानकारी मिली है, लेकिन अभिलेख देखे बगैर कुछ नहीं कहा जा सकता है।
- राजीव कुमार, एक्सईएन, आवास विकास परिषद
छज्जे के निर्माण को लेकर कुछ लोगों को आपत्ति है, जो थोड़ा बढ़ाकर बनाया हुआ है। हमने कंपाउंडिंग के लिए भी आवेदन कर रखा है। अगर नहीं मानेंगे तो हम उसे खुद ही ध्वस्त कर देंगे।
- डॉ. अतुल नामदेव, प्राचार्य, सूरजभान डिग्री कॉलेज
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आवास विकास परिषद के अफसरों और आवंटियों में होने वाली मिलीभगत और अवैध निर्माण कराने की कारगुजारी 12 साल बाद सामने आई है। नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार के पत्र पर कार्रवाई होने पर परिषद के कई अफसरों पर गाज गिर सकती है। इसमें पुलिस-प्रशासन की लापरवाही और शासन का आदेश दबाने के गंभीर मामले का भी खुलासा हुआ है। विशेष सचिव आवास और शहरी नियोजन अनुभाग-2 यूपी सिंह ने तीन जनवरी 2007 बरेली डीएम और एसएसपी को लिखित आदेश में कहा गया था कि राजेंद्रनगर स्थित परिषद योजना ब्लाक-बी भूखंड पर अवैध निर्माण कर स्कूल संचालित हो रहा है। इसका मानचित्र स्वीकृत नहीं है। इसलिए अवैध निर्माण ध्वस्त किया जाए। परिषद के स्थानीय अफसरों ने अवैध निर्माण कर्ताओं के खिलाफ रिपोर्ट भी थाना कोतवाली में दर्ज कराई थी। शासन ने अवैध निर्माण गिराने के लिए पर्याप्त पुलिस बल और मजिस्ट्रेट का सहयोग लेने और इस कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश भी दिए थे। शासन ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि प्रशासन की शिथिलता से अवैध निर्माण जारी है। इसके बाद भी 12 साल तक प्रशासन मौन साधा रहा और स्कूल प्रबंधन ने प्राइमरी की जगह डिग्री कालेज शुरू करने के साथ ही परिसर में ही केनरा बैंक शाखा भी खुलवा दी।
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प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
विधायक डॉ. अरुण कुमार द्वारा लिखे पत्र पर डीएम वीके सिंह ने तहसील और राजस्व अफसरों से जांच रिपोर्ट मांगी है। तहसील प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसमें कहा गया है कि आवास विकास परिषद ने आवंटन नियमों के विपरीत अवैध कराने और शर्तों का उल्लंघन के चलते 26 मार्च 1987 को आवंटन रद करने की कार्रवाई कर चुका है। जांच में कहा गया है कि कालेज प्रबंधन से संपर्क किया गया तो वह कोई भी साक्ष्य नहीं दे पाया। परिसर में केनरा बैंक भी संचालित हो रहा है। तहसील प्रशासन ने कार्रवाई के लिए अपनी संस्तुति डीएम कार्यालय को सौंप दी है।
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मैं अभी पिछले माह ही यहां तैनात हुआ हूं। सूरजभान स्कूल को आवंटित भूखंड पर मानचित्र स्वीकृत के बिना अवैध निर्माण आदि संबंधी जानकारी मिली है, लेकिन अभिलेख देखे बगैर कुछ नहीं कहा जा सकता है।
- राजीव कुमार, एक्सईएन, आवास विकास परिषद
छज्जे के निर्माण को लेकर कुछ लोगों को आपत्ति है, जो थोड़ा बढ़ाकर बनाया हुआ है। हमने कंपाउंडिंग के लिए भी आवेदन कर रखा है। अगर नहीं मानेंगे तो हम उसे खुद ही ध्वस्त कर देंगे।
- डॉ. अतुल नामदेव, प्राचार्य, सूरजभान डिग्री कॉलेज