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बैंड बाजा तैयार... दूल्हा-दुल्हन की दरकार 

Mon, 05 Feb 2018 10:30 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली Updated Mon, 05 Feb 2018 10:30 PM IST
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organisers waiting for bride-groom to for marriage
 विपक्षी दल कहते है कि सरकार गरीबों के लिए कुछ करती नहीं लेकिन यहां तो उल्टा हो रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत सरकार द्वारा गरीब परिवारों की लड़कियों की शादी कराने की योजना शुरू की जा रही है लेकिन इसमें कोई रुचि ही नहीं ले रहा। स्थिति यह है कि सात फरवरी को होने वाले इस आयोजन के लिए नगर निगम कार्यालय में शादी के लिए आवेदन ही नहीं जमा हो रहे हैं। जबकि समाज कल्याण विभाग सामूहिक विवाह के आयोजन के लिए स्थानीय निकायों को बजट भी दे चुका है।
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 मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में 475 गरीब कन्याओं की शादी कराई जानी है। सात से 24 फरवरी के बीच अलग-अलग तिथियों में ये कार्यक्रम कराने का जिम्मा स्थानीय निकायों पर है। उन्हीं के पास शादी के लिए फार्म भी जमा होने हैं। इस योजना के लिए नोडल बने समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के लिए 1.66 करोड़ की रकम स्थानीय निकायों को चुके हैं। सामूहिक विवाह में हर एक जोड़े पर 35 हजार रुपये का खर्च तय किया गया है। दिक्कत यह आ रही है कि स्थानीय निकाय के दफ्तरों में शादी के लिए फार्म भी नहीं आ रहे हैं। यहां नगर निगम में भी अब तक केवल पांच आवेदन ही जमा हो सके हैं, नगर पालिका और नगर पंचायतों कार्यालयों का हाल इससे भी ज्यादा खराब है। पर्याप्त फार्म न मिलने से समाज कल्याण अधिकारी सामूहिक विवाह की तारीख को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटे हैं। शादी के लिए जोड़े तैयार करने को पार्षदों और एनजीओ से सहयोग मांगा गया था। इसके लिए समाज कल्याण विभाग ने पिछले हफ्ते विकास भवन में इनकी मीटिंग भी बुलाई थी।
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नगर निगम पहुंचे समाज कल्याण अधिकारी
सामूहिक विवाह के लिए फार्म ही न आने से हलकान समाज कल्याण अधिकारी अशोक दीक्षित नगर निगम पहुंचे और वहां अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति कुमार सिंह से मुलाकात की। अशोक दीक्षित ने बताया कि फार्म जमा करने से लेकर सामूहिक विवाह नगर निगम को ही करना है। इसके लिए नगर निगम प्रशासन को इसके लिए तेजी दिखानी होगी।
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शादी कराने के बजाय आर्थिक मदद मांग रहे लोग
सामूहिक विवाह में बेटी की शादी कराने के बजाय धनराशि मांग रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे शुभ मुहूर्त में अपने रीति-रिवाज के अनुसार शादी करना चाहते हैं। इसलिए सामूहिक विवाह के बजाय बेहतर है कि सरकार उन्हें शादी के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध करा दे।


शादी के लिए आए फार्म बहुत ही कम है। इसलिए सात फरवरी को सामूहिक विवाह कार्यक्रम करना संभव नहीं है। आयोजन की तारीख को आगे बढ़ाया जाएगा।
 - अशोक दीक्षित, समाज कल्याण अधिकारी 
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