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Bareilly News: जिले में 22 साल में एक हजार लोगों ने किया नेत्रदान
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बरेली। बरेली में हर साल नेत्रदान, अंगदान, देहदान का संकल्प तो बहुत से लोग लेते हैं, लेकिन उनके निधन के बाद उनके परिजन अस्पताल के सूचना नहीं देते और शव का अंतिम संस्कार कर देते हैं। ऐसी स्थिति में दान देने वाली संख्या बेहद कम है। हालांकि नेत्रदान के मामले में शहर में बहुत से ट्रांसप्लांट हुए हैं। बरेली में अब लीवर व किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध हैं।
बुधवार को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाएगा। निधन के बाद पार्थिव शरीर को परंपरानुसार पंच तत्व में विलीन कर दिया जाता है। कई लोग मरकर भी किसी की अंधेरी दुनिया में उजाला कर जाते हैं। रुहेलखंड क्षेत्र में 22 वर्षों में एक हजार से ज्यादा कार्निया ट्रांसप्लांट और 600 से अधिक नेत्रदान हुए हैं। भोजीपुरा स्थित निजी मेडिकल काॅलेज के ऑप्थैल्मोलाॅजी विभाग की एचओडी डाॅ. नीलिमा मेहरोत्रा के मुताबिक, मृत्यु के बाद जैसे व्यक्ति के अंगदान होते हैं, वैसे ही नेत्रदान होता है। इससे कार्निया रहित व्यक्ति की सर्जरी कर इसका प्रत्यारोपण किया जाता है। इसके बाद वह देखने में सक्षम होता है।
एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो से अधिक लोगों के जीवन में उजियारा होता है। किसी भी उम्र, लिंग, रक्त समूह, धर्म का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। लेंस या चश्मा लगाने वाले लोग, जिनकी आंखों की सर्जरी हुई हो, वे भी नेत्रदान कर सकते हैं। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, मोतियाबिंद पीड़ित भी नेत्रदान कर सकते हैं। संवाद
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निधन के आठ घंटे के भीतर किया जा सकता नेत्रदान
- डाॅ. नीलिमा के मुताबिक, नेत्रदान किसी व्यक्ति के निधन के चार घंटे के भीतर बेहतर होता है, लेकिन छह से आठ घंटे तक भी कर सकते हैं। इसके लिए शपथ पत्र भरना होता है। नेत्रदाता के पंजीकृत होने पर कार्ड मिलता है। पंजीकरण न कराने पर भी नेत्रदान कर सकते हैं। कॉलेज के नेत्र बैंक में 1500 से ज्यादा लोगों ने नेत्रदान के लिए पंजीकरण कराया है। नेत्रदाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान गोपनीय होती है।
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विश्व अंगदान दिवस पर देहदान का संकल्प लेंगे गजानंद
- विश्व अंगदान दिवस पर इस बार शिव शक्ति सदन राजीव कुंज कॉलोनी में रहने वाले गजानंद देहदान का संकल्प लेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार उनके मन में देह दान का विचार आया जिसके बाद उन्हें विश्व अंगदान दिवस पर देहदान का संकल्प लेंगे। उन्होंने रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज से देहदान के लिए संपर्क किया है और वहां फॉर्म भर दिया है। गजानंद पेशे से अधिवक्ता हैं। परिवार में पत्नी राजकुमारी गुप्ता, पुत्र गौरव कुमार गुप्ता व बेटी अमिता गुप्ता है। बताया कि परिवार में अभी तक किसी ने देहदान नहीं किया है। वह चाहते है कि उनसे प्रेरणा लेकर परिवार व मित्र देहदान का संकल्प ले।
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बुधवार को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाएगा। निधन के बाद पार्थिव शरीर को परंपरानुसार पंच तत्व में विलीन कर दिया जाता है। कई लोग मरकर भी किसी की अंधेरी दुनिया में उजाला कर जाते हैं। रुहेलखंड क्षेत्र में 22 वर्षों में एक हजार से ज्यादा कार्निया ट्रांसप्लांट और 600 से अधिक नेत्रदान हुए हैं। भोजीपुरा स्थित निजी मेडिकल काॅलेज के ऑप्थैल्मोलाॅजी विभाग की एचओडी डाॅ. नीलिमा मेहरोत्रा के मुताबिक, मृत्यु के बाद जैसे व्यक्ति के अंगदान होते हैं, वैसे ही नेत्रदान होता है। इससे कार्निया रहित व्यक्ति की सर्जरी कर इसका प्रत्यारोपण किया जाता है। इसके बाद वह देखने में सक्षम होता है।
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एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो से अधिक लोगों के जीवन में उजियारा होता है। किसी भी उम्र, लिंग, रक्त समूह, धर्म का व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। लेंस या चश्मा लगाने वाले लोग, जिनकी आंखों की सर्जरी हुई हो, वे भी नेत्रदान कर सकते हैं। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, मोतियाबिंद पीड़ित भी नेत्रदान कर सकते हैं। संवाद
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निधन के आठ घंटे के भीतर किया जा सकता नेत्रदान
- डाॅ. नीलिमा के मुताबिक, नेत्रदान किसी व्यक्ति के निधन के चार घंटे के भीतर बेहतर होता है, लेकिन छह से आठ घंटे तक भी कर सकते हैं। इसके लिए शपथ पत्र भरना होता है। नेत्रदाता के पंजीकृत होने पर कार्ड मिलता है। पंजीकरण न कराने पर भी नेत्रदान कर सकते हैं। कॉलेज के नेत्र बैंक में 1500 से ज्यादा लोगों ने नेत्रदान के लिए पंजीकरण कराया है। नेत्रदाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान गोपनीय होती है।
विश्व अंगदान दिवस पर देहदान का संकल्प लेंगे गजानंद
- विश्व अंगदान दिवस पर इस बार शिव शक्ति सदन राजीव कुंज कॉलोनी में रहने वाले गजानंद देहदान का संकल्प लेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार उनके मन में देह दान का विचार आया जिसके बाद उन्हें विश्व अंगदान दिवस पर देहदान का संकल्प लेंगे। उन्होंने रोहिलखंड मेडिकल कॉलेज से देहदान के लिए संपर्क किया है और वहां फॉर्म भर दिया है। गजानंद पेशे से अधिवक्ता हैं। परिवार में पत्नी राजकुमारी गुप्ता, पुत्र गौरव कुमार गुप्ता व बेटी अमिता गुप्ता है। बताया कि परिवार में अभी तक किसी ने देहदान नहीं किया है। वह चाहते है कि उनसे प्रेरणा लेकर परिवार व मित्र देहदान का संकल्प ले।