बरेली बवाल प्रकरण: सड़क का गड्ढा भरवाया, अफसर और नेताओं ने दिलों की दरार मिटाने की पहल नहीं
चक महमूद में जिस जगह बवाल हुआ, वहां कांवड़ निकलने का वैकल्पिक मार्ग भी बंद था। इसी को आधार बनाकर कांवड़ यात्री विवादित स्थल की ओर से कांवड़ व डीजे ले जाने पर तुले थे।
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बरेली में एक सप्ताह में दो बार बवाल से जूझे चक महमूद और जोगी नवादा इलाके में दोनों समुदायों के लोगों के बीच दिलों में दरार चौड़ी हो गई। इसके लिए नेता-अफसर भी कम कसूरवार नहीं हैं। बरसों से मौर्या गली के पचास मीटर टुकड़े को महज इसलिए पांच फुट गहरा खोदा जाता है ताकि सड़क पर झुकी पीपल की डाल के नीचे से ताजिया निकाला जा सके। इस बार नए पार्षद की पहल पर दोनों पक्ष माहौल बेहतर करने के लिए तैयार थे, मगर किसी अफसर या जनप्रतिनिधि ने इस रवायत को बदलवाने के लिए पहल नहीं की।
चक महमूद में जिस जगह बवाल हुआ, वहां कांवड़ निकलने का वैकल्पिक मार्ग भी बंद था। इसी को आधार बनाकर कांवड़ यात्री विवादित स्थल की ओर से कांवड़ व डीजे ले जाने पर तुले थे। दरअसल तीन दिन पहले ही पीपल की डाल की वजह से अवरोध होने से ताजिया निकालने के लिए सड़क में पांच फुट गहरा गड्ढा खोदा गया था। इसी रास्ते से ताजिया वापस आकर इमामबाड़े में रखवा दिया गया। गड्ढा बरकरार रहा। नतीजा ये रहा कि लाठीचार्ज के दौरान कांवड़ियों को भागने का रास्ता नहीं मिला।
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बवाल के बाद नगर निगम की टीम ने रातोंरात मिट्टी डलवाकर गड्ढे को बंद कर दिया। इसके लिए गड्ढे से पानी निकालने का इंतजार भी नहीं किया गया। नतीजा ये हुआ कि सोमवार दिन में वाहनों के यहां से गुजरने पर दलदल जैसी बन गई। पुलिसकर्मी भी संकरे और दलदल रास्ते पर पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर ड्यूटी कर रहे थे। मामूली वजह के निस्तारण में दोनों समुदाय के प्रबुद्ध लोग तैयार हैं। इसे मजबूती देने के लिए नेताओं और अफसरों की पहल चाहते हैं मगर इस बार फिर समस्या का हल नहीं हो सका।
पीपल की सूखी डाल बन रही रोड़ा
पीपल के विशालकाय पेड़ के नीचे बरसों पुरानी मठिया बनी है। मौर्य गली के लोग यहां पूजा करते हैं। इसी पीपल के पेड़ की एक डाल तिरछी होकर सड़क पार पल्लेदार पूरन मौर्य की छत पर लद गई है। भारी भरकम डाल से पूरन का लिंटर दरक रहा है। उनके परिवार को परेशानी होती है। धार्मिक पक्ष देखते हुए वह लोग पेड़ नहीं कटवाते हैं। इसी सूखी डाल को छांटने से ताजिया आराम से निकाला जा सकता है। गली में गहरा गड्ढा करने की जरूरत नहीं भी पड़ेगी।ये भी पढ़ें- Bareilly News: कांवड़ यात्रा में लाठीचार्ज के बाद बैकफुट पर पुलिस-प्रशासन... कांवड़ियों पर नहीं होगी रिपोर्ट
पूरन के साथ ही पड़ोसियों ने बताया कि दूसरा पक्ष ताजिया के दिनों में डाल काटने की गुजारिश तो करता है पर बात आगे नहीं बढ़ती। इस बार पार्षद बने अनीस सकलैनी से उन लोगों की इस मुद्दे पर बात हुई थी। तय हुआ था कि नगर निगम के अधिकारियों से कहकर अनीस चक चुंगी तक करीब दो सौ मीटर सड़क पक्की बनवा देंगे। पीपल की मठिया की आड़ के लिए छोटी दीवार भी बन जाएगी। अनीस ने इसे लिखापढ़ी करके आगे भी बढ़ाया पर नतीजा नहीं निकला। पूरन का कहना था कि ऐसा होने से दोनों पक्षों की समस्या का समाधान हो सकता है।
पार्षद बोले- अफसर गौर करें तो सुलझ जाए समस्या
वार्ड 62 के पार्षद अनीस सकलैनी ने स्वीकार किया कि पूरन और उनके पड़ोसियों से उनकी सड़क के मुद्दे पर बात हुई थी। वह इसका प्रस्ताव नगर निगम में रखने के लिए तैयार थे। मठिया की दीवार को लेकर दोनों पक्षों का कोई न कोई शख्स पेच अटका देता है। अधिकारी गौर करें तो समाधान चुटकियों में हो सकता है। वह समझ नहीं पा रहे कि समस्या हल क्यों नहीं कराई जा रही।