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एनआरआई इंजीनियर धरने पर बैठा तब जागा प्रशासन
बरेली।
Updated Fri, 26 May 2017 01:03 AM IST
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NRI engineer sitting on the dais
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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कोटेदार और अफसरशाही का गठजोड़ तोड़ने में जब ग्रामीण सफल न हुए तो कमान जर्मनी में बस गए गांव के साफ्टवेयर इंजीनियर ने संभाल ली। ब्लाक पर ग्रामीणों के साथ धरना दिया तो अधिकारी जागे। एसडीएम ने वहां पहुंचे और इंजीनियर व उनके साथियों को जूस पिलाकर धरना समाप्त कराया। आश्वासन दिया कि एक सप्ताह में कोटेदार की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
बहिर जागीर की राशन कोटेदार पर राशन वितरण में घोटाले का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने पांच महीने पहले तत्कालीन डीएम पंकज यादव से शिकायत की थी। तब डीएम ने इस मामले की जांच तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी को सौंप दी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि बीडीओ और लेखाधिकारी ने जांच में लीपापोती कर कोटेदार को बचा दिया। ग्रामीणों ने दोबारा राशन न मिलने की शिकायत की तो सुनवाई नहीं हुई।
छुट्टी में जर्मनी से अपने गांव आए साफ्टवेयर इंजीनियर अनंत कुमार को ग्रामीणों ने समस्या बताई तो वह ग्रामीणों के साथ जाकर बुधवार को ब्लाक कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। गुरुवार शाम चार बजे यहां पहुंचे एसडीएम विवेक श्रीवास्तव ने अनंत और अन्य ग्रामीणों से धरना समाप्त करने की अपील की लेकिन यह लोग कोटेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जिद पर अड़े रहे। एसडीएम की यहां मौजूद पूर्व ब्लाक प्रमुख नरोत्तम गंगवार से नोकझोंक भी हुई। लंबी वार्ता के बाद शाम छह बजे एसडीएम ने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह में जांच करके दोषी मिलने पर कोटेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ग्रामीण मान गए और एसडीएम ने उन्हें जूस पिलाकर धरना समाप्त कराया।
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गांव में सड़क भी डलवा चुके हैं अनंत
धरने का नेतृत्व कर रहे अनंत कुमार जर्मनी में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वहीं बस गए हैं। इन दिनों वह अपने गांव बहिर जागीर में छुट्टी पर आए हुए हैं। इससे पहले जनवरी में वह गांव आए थे तो उन्होंने अपने खर्च से गांव में सौ मीटर से अधिक सीसी रोड बनवाया था।
हालत भी बिगड़ी
लगातार दूसरे दिन धरने पर बैठने से अनंत की हालत गुरुवार शाम काफी बिगड़ गई थी। हालांकि समय रहते धरना समाप्त होने पर ग्रामीणों ने राहत महसूस की।
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बहिर जागीर की राशन कोटेदार पर राशन वितरण में घोटाले का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने पांच महीने पहले तत्कालीन डीएम पंकज यादव से शिकायत की थी। तब डीएम ने इस मामले की जांच तत्कालीन वित्त एवं लेखाधिकारी को सौंप दी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि बीडीओ और लेखाधिकारी ने जांच में लीपापोती कर कोटेदार को बचा दिया। ग्रामीणों ने दोबारा राशन न मिलने की शिकायत की तो सुनवाई नहीं हुई।
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छुट्टी में जर्मनी से अपने गांव आए साफ्टवेयर इंजीनियर अनंत कुमार को ग्रामीणों ने समस्या बताई तो वह ग्रामीणों के साथ जाकर बुधवार को ब्लाक कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। गुरुवार शाम चार बजे यहां पहुंचे एसडीएम विवेक श्रीवास्तव ने अनंत और अन्य ग्रामीणों से धरना समाप्त करने की अपील की लेकिन यह लोग कोटेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जिद पर अड़े रहे। एसडीएम की यहां मौजूद पूर्व ब्लाक प्रमुख नरोत्तम गंगवार से नोकझोंक भी हुई। लंबी वार्ता के बाद शाम छह बजे एसडीएम ने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह में जांच करके दोषी मिलने पर कोटेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ग्रामीण मान गए और एसडीएम ने उन्हें जूस पिलाकर धरना समाप्त कराया।
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गांव में सड़क भी डलवा चुके हैं अनंत
धरने का नेतृत्व कर रहे अनंत कुमार जर्मनी में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वहीं बस गए हैं। इन दिनों वह अपने गांव बहिर जागीर में छुट्टी पर आए हुए हैं। इससे पहले जनवरी में वह गांव आए थे तो उन्होंने अपने खर्च से गांव में सौ मीटर से अधिक सीसी रोड बनवाया था।
हालत भी बिगड़ी
लगातार दूसरे दिन धरने पर बैठने से अनंत की हालत गुरुवार शाम काफी बिगड़ गई थी। हालांकि समय रहते धरना समाप्त होने पर ग्रामीणों ने राहत महसूस की।