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नोट ही बंद हुए, नेट नहीं वरना मर ही जाते

Mon, 14 Nov 2016 12:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Mon, 14 Nov 2016 12:29 AM IST
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Note the closed, or else die, not net
Note the closed, or else die, not net - फोटो : बरेली, अमर उजाला
500 और हजार की नोटबंदी पर सोशल साइट्स पर बहस जारी है। कोई लिख रहा है -वो तो अच्छा हुआ नोट ही बंद कराए हैं मोदी  नेट बंद करा देते तो जीते जी मर जाते। तो कोई निर्मल बाबा को याद कर रहा है। कालेधन वालों की परिभषा दी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी का फैसला टॉप ट्रेंड में  बना हुआ है। पहले दिन तो खूब मजाकिया संदेशों ने फेसबुक, ट्वीटर और व्हाट्सएप पर कब्जा कर लिया। लेकिन अब  संदेशाें का कलेवर चेंज हो रहा है। इसमें पॉजीटिव और निगेटिव दोनों तरह की बात सामने आ रहीं हैं। इमेज के साथ पोस्ट है-उठाएि दो दिन परेशानी देश हित में। आप सीमा पर बंदूक लिए नहीं खड़े हैं और गोली के बदले गोली नहीं नोट के बदले नोट ही मिल रहे हैं।  
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मैसेज चल रहा है कि बैंकाें में लाइन में लगने वाले सिर्फ आम आदमी ही दिख रहा है, जबकि नेता, मंत्री, उद्योगपति और अफसर नहीं दिख रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि कालाधन इन्हीं के पास है। जवाब है कि-जनता इसीलिए लाइन में हैं क्याेंकि उनके पास कालाधन नहीं है।  कुछ लोग कह रहे हैं कि पूंजीपति कभी अपना कालाधन घर पर नहीं रखता। वह सोना, चांदी और विदेशों में इंवेस्ट करता है। एक ने तो यहां तक कहा अगर नोट बदलने के साथ वोट डालने की भी छूट होती तो पीएम बदल गए होते। कुछ और रोचक पोस्ट इस तरह हैं-
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-दो दिन से लग रहा है इंडियन करेंसी लेकर विदेश में घूम रिए हैं।
- सुंदर कन्या-आप बैंक में हैं क्या? आइए ने कभी चाय पर, मैं पास में ही रहती हूं।
पेट्रोल पंप में छुट्टा नहीं तो और भरा लें लेकिन सुलभ शौचालय में छुट्टा नहीं तो कहां खाली करें।
स्विस बैंक का काला धन लाने वालों ने घर घर गुल्लक फुड़वा दिए।
जब निर्मल बाबा कहते थे कि 10 रुपये की गड्डी रखो तो हंसते थे। देखा कितने दूरदर्शी हैं बाबा?
आज इतने भी नहीं खजाने में जितने छोड़ देते थे पजामे में
अब ये कौन अफवाह फैला रहा है कि अंबानी और मोदी में शर्त लगी थी कि कौन सबसे लंबी लाइन लगा सकता है।
किडनैपर- अबे, हम एक करोड़ हम भेज रहे हैं तुझे बस खुल्ले कराने हैं।
दामादों का कड़ा फैसला जब तक 2000 के नोट नहीं आते ससुराल नहीं जाएंगे।
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