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Bareilly News: सरकारी विभाग नहीं... रियल एस्टेट फर्म की तर्ज पर काम कर रहा बीडीए

Mon, 08 Sep 2025 02:40 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 08 Sep 2025 02:40 AM IST
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Not a government department... BDA is working on the lines of a real estate firm
बरेली। उद्यमियों की जरूरत को भांपकर बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने औद्योगिक पार्क योजना शुरू की, लेकिन किसानों से चंद रुपयों में जमीन खरीदकर रियल एस्टेट कारोबारी की तरह मुनाफा कमा रहा है। 70 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर से ज्यादा कीमत पर जमीन बेच रहा है। अमर उजाला कार्यालय में रविवार को आयोजित संवाद में ये बातें शहर के उद्यमियों ने कही। इस दौरान उद्यमियों ने बीडीए और अन्य विभागों से जुड़ीं समस्याएं गिनाईं।
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उद्यमियों ने कहा कि जिले में एक अदद परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के अलावा अन्य निजी स्तर पर स्थापित औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें जो क्षेत्र बीडीए के दायरे में आ गए हैं, वहां प्रति वर्गमीटर करीब डेढ़ हजार रुपये विकास शुल्क मांगा जा रहा है। फैक्टरी के लिए भूमि खरीदने के बाद निर्माण कार्य उद्यमी की सहूलियत के मुताबिक होना चाहिए, पर बीडीए नक्शा पास करने के बदले परेशान करता है। पूर्व में बनी फैक्टरियों को भी नोटिस थमा रहा है।
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उद्यमियों ने कहा कि नियमानुसार बीडीए का कार्य निगरानी का होना चाहिए, लेकिन यह रियल एस्टेट कारोबारी की तर्ज पर कार्य कर रहा है। इससे जिले में रियल एस्टेट कारोबार 80 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। बीडीए अफसर बैंकों में करोड़ों का फिक्स डिपॉजिट दिखाकर पीठ थपथपा रहे हैं।
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पोर्टल दिखावा, विभागों के चक्कर काटे बगैर नहीं होते काम
उद्यमियों ने कहा कि अग्निशमन, प्रदूषण, वन विभाग व अन्य जरूरी अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने समेत विभागीय समस्याओं से निजात के लिए शासन ने पोर्टल लांच किया है, पर विभागों के चक्कर लगाए बिना कोई कार्य नहीं होता। मंत्री, सांसद, विधायक आदि समस्या के निदान का दावा करते हैं, पर धरातल पर नतीजा सिफर रहता है। जिला व मंडलीय बैठक में उठे मुद्दों पर भी तत्काल कोई कार्रवाई नहीं होती। बिजली निगम की बदहाल आपूर्ति से कारोबार प्रभावित हो रहा है। जीएसटी जमा करने में जरा सी चूक पर उद्यमियों से अपराधी की तरह व्यवहार किया जाता है।

ये रहे प्रमुख मुद्दे और सुझाव
- प्रत्येक फैक्टरी में 30 से 50 हजार लीटर पानी की टंकी, ईटीपी, एसटीपी के बजाय ओवरहेड टैंक और औद्योगिक क्षेत्र स्थित उद्योगों की संख्या के क्षमतानुसार ईटीपी, एसटीपी लगें।
- फ्री होल्ड भूमि उपलब्ध कराई जाए। हस्तांतरण, नामांतरण में अव्यवहारिक नियम हटाए जाएं। मनमाना विकास शुल्क न्यूनतम लिया जाए। उद्यमियों को रियायत दी जानी चाहिए।
- जीएसटी, अग्निशमन, प्रदूषण समेत उद्योगों से संबंधित अन्य विभागाें के रवैये और कार्यों की सघन निगरानी की जाए। उद्यमियों से फीडबैक लेकर उचित कार्रवाई की व्यवस्था हो।
- औद्योगिक डेडिकेटेड फीडर से बाहरी कनेक्शन हटें। निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए पेड़ों की छंटाई हो। जर्जर तार दुरुस्त हों। बेवजह माल लदे ट्रकों के चालान न काटे जाएं।


ये उद्यमी रहे मौजूद
सेंट्रल यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सिंघल, सचिव अल्पित अग्रवाल, लघु उद्योग भारती के संयुक्त कोषाध्यक्ष मानस बंसल, निशांत अग्रवाल, मीडिया प्रभारी माधव खंडेलवाल, सचिव विशाल अग्रवाल, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव रजत मेहरोत्रा, संदीप मेहरा, संयुक्त सचिव रिषभ दीक्षित, भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र से सुशील अग्रवाल, फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह, अस्मित, अभिनव कटरू व अन्य उद्यमी मौजूद रहे। ब्यूरो
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