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जिस भांजी को मामा ने सब कुछ मानकर पाला, उसी ने बनाया बंधक
Sat, 14 Sep 2019 11:01 PM IST
Abhishek Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Published by: Abhishek Singh
Updated Sat, 14 Sep 2019 11:01 PM IST
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भांजी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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परिवार न होने पर एक लेक्चरर ने भांजी को ही अपना सब कुछ मानकर पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया, लेकिन रुपयों के आगे वह सब छोटा पड़ गया। मामा को एटीएम मशीन समझने वाली भांजी और उसके परिवार को रुपये मिलने बंद हुए तो बुजुर्ग को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उन्हें बंधक बनाकर भी रखने लगे। किसी तरह बदायूं निवासी बुजुर्ग लेक्चरर जान बचाकर भागे तो तीन दिन भटकने के बाद शहर कोतवाली पहुंचे। पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण कराकर देखभाल के लिए उन्हें एक वृद्ध आश्रम भिजवा दिया।
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कोतवाली में शुक्रवार सुबह एक बुजुर्ग वॉकर के सहारे घसीटते हुए पहुंचे। बुजुर्ग ने अपनी पहचान जिला बदायूं के मोजमपुर छज्जू निवासी रिटायर्ड लेक्चरर जादौ सिंह (77) बताई। वह दातागंज स्थित गंगादीन इंटर कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाते थे।
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शादी न करने के कारण उनका कोई परिवार नहीं है। अपनी भांजी को ही परिवार मानकर वह साथ ले आए थे। उसका पालन-पोषण किया। पढ़ा-लिखाकर शादी कराई और एक घर भी बनवाकर दिया। इतना सब करने के बावजूद सारी मेहनत और प्यार रुपयों तक ही सीमित रह गया। रुपये न देने पर अभद्रता और बदतमीजी की जाने लगी।
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उनके मुताबिक भांजी ने उनके पेंशन के खाते से जुड़ी चेक बुक और एटीएम कार्ड छीन लिया। इससे नाराज होकर कुछ दिन पहले उन्होंने एटीएम कार्ड बंद करा दिया तो परिवार उनसे मारपीट करने लगा। बुजुर्ग ने बिलखते हुए बताया कि पिछले दो हफ्तों से भांजी के परिवार ने उन्हें बदायूं की दुर्गा कॉलोनी में बंधक बनाकर रखा था। बुरी तरह मारपीट करते थे। किसी तरह तीन दिन पहले वहां से छिपकर निकल आए। बताया कि दो दिन पड़ोस के शेखूपुर में छिपे रहे फिर शुक्रवार को बस से आगरा पहुंचे। वहां से देर रात बस से बरेली पुराना रोडवेज पहुंचे। यहां रात भर बेंच पर काटने के बाद सुबह कोतवाली पहुंच गए।
अब कुछ बचा नहीं इसलिए रिश्तेदारों ने भी नजरें फेरीं
बुजुर्ग ने बताया कि अब उनके पास पेंशन के सिवा कुछ नहीं बचा। सब कुछ भांजी और उसके परिवार को दे दिया। इस वजह से बाकी रिश्तेदारों ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया। बताया कि रिश्तेदार बोलते हैं कि सब कुछ तो तुमने भांजी को दे दिया। हमारे लिए क्या बचा, क्यों मदद करें हम।