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एनजीटी का आदेशः प्रदूषण फैला रहे होटल और मैरिज हॉल, कसा जाए शिकंजा

Sat, 24 Oct 2020 01:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 24 Oct 2020 01:52 AM IST
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NGT order: hotels and marriage halls spreading pollution, screws should be tightened
demo photo - फोटो : अमर उजाला

हवा, पानी, भूगर्भ जल और ध्वनि प्रदूषण में होटल, रेस्टोरेंट, मोटल्स, बैंक्वेट हॉल की भी भूमिका मानी

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बरेली। निर्माण कार्य, वाहनों से निकले धुएं, कचरा और पराली प्रदूषण की मुख्य वजह रहे हैं। अब प्रदूषण फैलाने वाले कारकों में होटल, रेस्टोरेंट, मोटल्स, बैंक्वेट हॉल भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शामिल कर दिए हैं। ट्रिब्यूनल के मुताबिक मानकों के विपरीत निर्माण समेत प्रदूषण फैलाने की तमाम गतिविधियां इनमें होती हैं। इन पर रोक लगाने के लिए स्थानीय निकाय और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए हैं।
एनजीटी के आदेश पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी गाइडलाइन को बीते शुक्रवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सार्वजनिक नोटिस के जरिये जारी कर दिया है। इसमें होटलों, रेस्टोरेंट पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई निर्देश दिए गए हैं, जिनका पालन उन्हें करना होगा। इसके तहत साल में दो बार नियमों के पालन के लिए राज्य बोर्ड जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे। बरेली में करीब पांच सौ से ज्यादा होटल, मैरिज लॉन, बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट हैं, जिन्हें प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई उपाय करने होंगे। छोटे होटलों, रेस्टोरेंट, मैरिज होम आदि के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा तय मानकों में एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाने के निर्देश दिए गए हैं। एनजीटी की ओर से निर्देश जारी होने के बाद संचालकों में खलबली मची हुई है। उन्होंने आदेश के अनुपालन में प्रशासन से सहयोग मांगा है।
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एसटीपी और ईटीपी लगाना भी अनिवार्य

जारी निर्देशों के तहत होटल, मोटल में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाना अनिवार्य है। 20 या इससे कम कमरों वाले होटल, 100 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले बैंक्वेट हॉल और 36 लोगों की क्षमता वाले रेस्टोरेंट को ईटीपी लगाना होगा। ईटीपी से होने वाले डिस्चार्ज में पर्यावरणीय मानकों का पालन करना होगा। जिसकी जांच संबंधित विभाग निर्धारित अलग-अलग समय पर करेंगे।
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यूपीपीसीबी की वेबसाइट पर है गाइडलाइन

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रोहित सिंह के मुताबिक एनजीटी के आदेश पर तैयार गाइडलाइन सार्वजनिक कर दी गई है। यूपीपीसीबी की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। नियमानुसार इसी गाइडलाइन का पालन कराया जाएगा। होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज होम को अनुमति देने से पूर्व संबंधित विभागों को गाइडलाइन के मानकों पर ध्यान देने को कहा है।

प्रयास करेंगे मगर कठिन है नियमों का पालन

टेंट हाउस, मैरिज एवं बैंक्वेट हॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपेश कुमार अग्रवाल ने एनजीटी की नई गाइडलाइन की जानकारी से इनकार किया है। उनके मुताबिक परिसर में आयोजनकर्ता की ओर से ही व्यवस्थाएं रहती हैं। मैरिज या बैंक्वेट हॉल संचालक की ओर से किसी तरह का प्रदूषण नहीं किया जाता। जो संभव होगा उसका पालन किया जाएगा। सभी व्यवस्थाएं करना संभव नहीं है।

जल प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियम

  • - एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) से किचन, लॉन्ड्री और घरेलू सीवेज का शोधन होगा।
  • - शोधित सीवेज का उपयोग टॉयलेट फ्लशिंग, फर्श धोने और बगीचे में किया जा सकेगा।
  • - पानी की खपत के लिए मीटर लगाना होगा। ईटीपी पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ्लो मीटर जरूरी।
  • - भूगर्भ जल के लिए बोरिंग की अनुमति लेनी होगी। बिना अनुमति जल दोहन पर कार्रवाई।
  • - रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। जिसकी रिपोर्ट विभाग को देनी होगी।

वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियम

  • - जेनरेटर में उसी ईंधन का उपयोग होगा, जिसके लिए अनुमति होगी।
  • - खाना पकाने से होने वाला वायु प्रदूषण रोकने के लिए इंतजाम जरूरी।
  • - कमरों में रोशनी, पानी गर्म करने में सौर ऊर्जा का उपयोग करना होगा।
  • - पर्यावरण क्षति पहुंचाने पर सीपीसीबी और यूपीपीसीबी जुर्माना कर सकेंगे।
  • - पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी ताकि वाहनों का जाम कम से कम हो।

कूड़ा निस्तारण के लिए नियम

  • - प्रतिदिन सौ किग्रा कूड़ा जेनरेट करने वाले मैरिज होम बल्क वेस्ट जेनरेटर की श्रेणी में दर्ज होंगे।
  • - बगीचे के कचरे को अलग करना होगा। बाहर फेंकने के बजाय अपने परिसर में ही एकत्र करेंगे।
  • - खाद्य सामग्री के कचरे से खाद बनानी होगी। डिस्पोजेबल प्लास्टिक की रिसाइकिलिंग करनी होगी।
  • - नगर निगम और नगर निकायों को कूड़ा लेने और निस्तारण की समुचित व्यवस्था करनी होगी।
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