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बेपरवाही : तीन हजार मरीजों में मिले हाइपरटेंशन के लक्षण, 566 की ही हुई जांच
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बरेली। हाइपरटेंशन कई गंभीर बीमारियों की वजह है। लिहाजा शासन ने एनसीडी क्लिनिक शुरू कराई। इसके बाद भी हालात यह हैं कि स्क्रीनिंग में संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों की जांच तक नहीं कराई जा रही। इसको लेकर शासन ने पत्र जारी कर संदिग्ध मरीजों की जांच की हिदायत दी है।
गैर संचारी रोग (एनसीडी) क्लीनिक पर शासनादेश के तहत डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीजों की जांच कराई जाती है। अप्रैल से जुलाई तक सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे करीब तीन हजार मरीजों में हाइपरटेंशन के लक्षण मिले थे, लेकिन डॉक्टरों ने सिर्फ 566 मरीजों की ही जांच की।
स्क्रीनिंग और जांच संबंधी आंकड़े जब शासन तक पहुंचे तो चिकित्सकों की बेपरवाही सामने आ गई। शासन ने इस पर नाराजगी जताते हुए क्लीनिक के डॉक्टरों को दी गई जिम्मेदारी निभाने में सुधार की हिदायत दी है। अब संदिग्धों की जांच का दावा चिकित्सक कर रहे हैं।
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बरेली मंडल के आंकड़ों पर गौर करें तो पीलीभीत में 1131 मरीजों में हाइपरटेंशन के लक्षण मिले लेकिन जांच सिर्फ 350 की हुई। बदायूं में आठ सौ मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद 70 जांच हुई। शाहजहांपुर में 41 सौ मरीजों में संदिग्ध लक्षण मिलने पर जांच सिर्फ चार सौ मरीजों की ही हुई।
हाइपरटेंशन बन सकता है हृदयाघात की वजह
हाइपरटेंशन से मानसिक तनाव बढ़ने के साथ ही हृदय की धमनियों पर अतिरिक्त दबाव होता है। जिससे हृदय संबंधी बीमारियों की आशंका होती है। समय पर इलाज न हो तो हृदयाघात की वजह भी बन सकता है। इसी वजह से शासन ने जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले 30 से अधिक उम्र वाले सभी मरीजों की एनसीडी क्लीनिक पर हाइपरटेंशन की स्क्रीनिंग के निर्देश दिए थे। ब्यूरो
हाइपरटेंशन के लक्षण
सिरदर्द, चक्कर आना, सांस लेने में घबराहट, नाक से खून आना, सीने में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आदि हाइपरटेंशन के लक्षण हैं।
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एनसीडी क्लीनिक पर मरीजों की ब्लड प्रेशर, डायबिटीज समेत अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग हो रही है। संदिग्ध लक्षण मिलने पर जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि रोग की पुष्टि पर इलाज शुरू हो सके। चिकित्सा अधिकारियों से नियमित रिपोर्ट ली जा रही है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
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गैर संचारी रोग (एनसीडी) क्लीनिक पर शासनादेश के तहत डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीजों की जांच कराई जाती है। अप्रैल से जुलाई तक सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे करीब तीन हजार मरीजों में हाइपरटेंशन के लक्षण मिले थे, लेकिन डॉक्टरों ने सिर्फ 566 मरीजों की ही जांच की।
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स्क्रीनिंग और जांच संबंधी आंकड़े जब शासन तक पहुंचे तो चिकित्सकों की बेपरवाही सामने आ गई। शासन ने इस पर नाराजगी जताते हुए क्लीनिक के डॉक्टरों को दी गई जिम्मेदारी निभाने में सुधार की हिदायत दी है। अब संदिग्धों की जांच का दावा चिकित्सक कर रहे हैं।
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बरेली मंडल के आंकड़ों पर गौर करें तो पीलीभीत में 1131 मरीजों में हाइपरटेंशन के लक्षण मिले लेकिन जांच सिर्फ 350 की हुई। बदायूं में आठ सौ मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद 70 जांच हुई। शाहजहांपुर में 41 सौ मरीजों में संदिग्ध लक्षण मिलने पर जांच सिर्फ चार सौ मरीजों की ही हुई।
हाइपरटेंशन बन सकता है हृदयाघात की वजह
हाइपरटेंशन से मानसिक तनाव बढ़ने के साथ ही हृदय की धमनियों पर अतिरिक्त दबाव होता है। जिससे हृदय संबंधी बीमारियों की आशंका होती है। समय पर इलाज न हो तो हृदयाघात की वजह भी बन सकता है। इसी वजह से शासन ने जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचने वाले 30 से अधिक उम्र वाले सभी मरीजों की एनसीडी क्लीनिक पर हाइपरटेंशन की स्क्रीनिंग के निर्देश दिए थे। ब्यूरो
हाइपरटेंशन के लक्षण
सिरदर्द, चक्कर आना, सांस लेने में घबराहट, नाक से खून आना, सीने में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आदि हाइपरटेंशन के लक्षण हैं।
एनसीडी क्लीनिक पर मरीजों की ब्लड प्रेशर, डायबिटीज समेत अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग हो रही है। संदिग्ध लक्षण मिलने पर जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि रोग की पुष्टि पर इलाज शुरू हो सके। चिकित्सा अधिकारियों से नियमित रिपोर्ट ली जा रही है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ