Bareilly Accident: हर कदम पर लापरवाही... अभियंताओं की हवाबाजी से लटक रहा 'मौत का पुल'
Bareilly News: बरेली और बदायूं जिलों को जोड़ने के लिए रामगंगा नदी पर बनाया गया पुल लापरवाही का शिकार हो गया। इस लापरवाही से तीन लोगों की जान चली गई।
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बदायूं के समरेर और बरेली के फरीदपुर को आपस में जोड़ने के लिए रामगंगा नदी पर बनाया गया पुल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अभियंताओं की हवाबाजी का शिकार हो गया। इसके निर्माण में हर कदम पर देरी और लापरवाही हुई। नतीजा, अधूरे पुल से कार 20 फुट नीचे जा गिरी, जिससे तीन लोगों की जान चली गई।
पहले नदी के रुख का अध्ययन किए बिना ही इसका निर्माण कराया गया। खल्लपुर की ओर संपर्क मार्ग को पक्का कराए बिना ही अप्रैल 2023 में इस पुल को आवागमन के लिए खोल दिया गया। पांच माह बाद ही 12 सितंबर 2023 में नदी ने अपना रुख बदला तो कच्चा संपर्क मार्ग बह गया। तब से अब तक 14 माह बीत चुके हैं, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अभियंता इसे बनाने का निर्णय नहीं ले सके। पुल का एक सिरा हवा में लटक रहा है। नतीजा, तीन लोगों की जान चली गई।
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वर्ष 2016 में मंजूरी के बाद 2017 में पुल का निर्माण शुरू हुआ था। वर्ष 2018 से 2021 तक काम ठप रहा। मार्च 2023 में पुल बनकर तैयार हुआ। आपाधापी के बीच अप्रोच रोड को पक्का कराए बिना ही अप्रैल 2023 में इसे आवागमन के लिए खोल दिया गया। संपर्क मार्ग बह जाने के बाद पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम के अभियंताओं ने संयुक्त तौर पर निरीक्षण कर शासन को रिपोर्ट भेजी।
आईआईटी की विशेषज्ञ कमेटी से पुल का हाइड्रोलिक सर्वे कराने के लिए 30 लाख रुपये का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी के मुख्यालय को भेजा गया, पर धन का आवंटन नहीं हो सका। इसलिए अभी तक यह तय ही नहीं हो सका कि संपर्क मार्ग कहां से बनाया जाए।
- दातागंज की ओर दीवार इतनी कमजोर बनाई गई कि लोगों ने तोड़ दिया।
- जहां दीवार बनाई गई, वहां कोई संकेतक भी नहीं लगाया गया, जिससे लोग सचेत हो सकें।
- फरीदपुर की ओर कटे पड़े संपर्क मार्ग पर भी संकेतक नहीं लगाए गए।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता नरेश कुमार ने रविवार को अपराह्न तीन बजे बताया कि डीएम के निर्देश के बाद अभियंताओं को मौके पर भेजकर सुरक्षा दीवार फिर से बनवाई गई है, लेकिन शाम पांच बजे जब अमर उजाला ने ग्रामीणों से बातचीत की तो उन्होंने मौके के फोटो भेजे। फोटो में स्पष्ट नजर आ रहा है कि टूटी दीवार की जगह सिर्फ ईंटों का चट्टा लगाया गया है।
पुल सेतु निगम ने बनाया था। पीडब्ल्यूडी जब संपर्क मार्ग बना रहा था, तभी नदी की धारा बदलने लगी और दूसरी ओर का अप्रोच रोड कट गया। आईआईटी रुड़की के अभियंताओं की टीम को अध्ययन करके बताना है कि पुल को आगे बढ़ाया जाए या धारा को रोकने के उपाय किए जाएं। मॉडल स्टडी के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। स्वीकृति मिलने पर अगली कार्रवाई होगी। अप्रोच रोड बहने के बाद पुल पर आवागमन रोकने के लिए दीवार बनाई गई थी। संकेतक भी लगाए गए थे। - नरेश कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
आंकड़ों की नजर से
- 30 लाख रुपये का प्रस्ताव पीडब्ल्यूडी के मुख्यालय में है लंबित
- 42 करोड़ रुपये की लागत से बना था करीब 700 मीटर लंबा पुल
- 14 माह में अप्रोच रोड बनाने का निर्णय नहीं ले सका पीडब्ल्यूडी