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Bareilly News: नंदगोपाल पहनेंगे राजस्थानी पगड़ी, झूलेंगे चांदी के पालने में
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बरेली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हर्षोल्लास के साथ शनिवार को मनाई जाएगी। लड्डू गोपाल को निखारने के लिए वस्त्र, बांसुरी, पालना, मालाएं आदि की खरीदी जा रही हैं। इस बार बाजार में चांदी के पालने और राजस्थानी पगड़ी की ज्यादा डिमांड है। दुकानदारों ने भी दिल्ली समेत कई शहरों से सामान मंगवाया है।
बड़ा बाजार में दुकान चलाने वाले श्रीनाथ अग्रवाल बताते है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल लड्डू गोपाल की पोशाकों की डिमांड काफी बढ़ गई है। पालना, शृंगार का सामान, श्रीकृष्ण एवं राधारानी की मूर्ति की भी मांग है। पोशाक की कीमत 50 रुपये से शुरू हो रही है। जबकि लड्डू गोपाल की जरी और स्टोन वाली पोशाक की कीमत 200 से 5000 रुपये तक है। पोशाक के काम व साइज के अनुसार कीमत में वृद्धि होती है। वहीं, लकड़ी के पालने की कीमत 800 से 2000 रुपये तक, स्टील के पालने की कीमत 1000 रुपये से 3000 रुपये तक है। चांदी के पालने की कीमत 10 हजार से शुरु हो रही है। वहीं राजस्थानी पगड़ी की भी मांग ज्यादा है।
स्थानीय कारीगरों को मिल रहा रोजगार
- भगवान कृष्ण से पोशाक व शृंगार का सामान दिल्ली, राजस्थान के अलावा अब शहर में भी बन रहा है। स्थानीय स्तर पर घरेलू महिलाएं भगवान कृष्ण की पोशाक बना रही है। बताया कि पुराना शहर, सीबीगंज, आलमगिरी गंज समेत अन्य जगह पोशाक बनाने का काम होता है। पहले मथुरा वृंदावन से भी सामान आता था, लेकिन अब अन्य शहरों से भी शामिल हो गए है। जन्माष्टमी पर बाजार में लाखों रुपये का कारोबार होता है।
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मंदिर सजाने के लिए आई जयपुरी चुनरी
जन्माष्टमी पर मंदिर को सजाने के लिए जयपुरी प्रिंट की चुनरी मांग बाजार में ज्यादा है। दुकानदार विनीत कुमार बताते है कि इस बार जयपुरी प्रिंट की चुनरी लाल, हरा, पीला, नारंगी समेत कई रंग मौजूद है। इसी के साथ साटन के कपड़े की मांग भी है। बाजार में बासुरी, घुघरू, माला आदि की ग्राहक पसंद कर रहा है। संवाद
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बड़ा बाजार में दुकान चलाने वाले श्रीनाथ अग्रवाल बताते है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल लड्डू गोपाल की पोशाकों की डिमांड काफी बढ़ गई है। पालना, शृंगार का सामान, श्रीकृष्ण एवं राधारानी की मूर्ति की भी मांग है। पोशाक की कीमत 50 रुपये से शुरू हो रही है। जबकि लड्डू गोपाल की जरी और स्टोन वाली पोशाक की कीमत 200 से 5000 रुपये तक है। पोशाक के काम व साइज के अनुसार कीमत में वृद्धि होती है। वहीं, लकड़ी के पालने की कीमत 800 से 2000 रुपये तक, स्टील के पालने की कीमत 1000 रुपये से 3000 रुपये तक है। चांदी के पालने की कीमत 10 हजार से शुरु हो रही है। वहीं राजस्थानी पगड़ी की भी मांग ज्यादा है।
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स्थानीय कारीगरों को मिल रहा रोजगार
- भगवान कृष्ण से पोशाक व शृंगार का सामान दिल्ली, राजस्थान के अलावा अब शहर में भी बन रहा है। स्थानीय स्तर पर घरेलू महिलाएं भगवान कृष्ण की पोशाक बना रही है। बताया कि पुराना शहर, सीबीगंज, आलमगिरी गंज समेत अन्य जगह पोशाक बनाने का काम होता है। पहले मथुरा वृंदावन से भी सामान आता था, लेकिन अब अन्य शहरों से भी शामिल हो गए है। जन्माष्टमी पर बाजार में लाखों रुपये का कारोबार होता है।
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मंदिर सजाने के लिए आई जयपुरी चुनरी
जन्माष्टमी पर मंदिर को सजाने के लिए जयपुरी प्रिंट की चुनरी मांग बाजार में ज्यादा है। दुकानदार विनीत कुमार बताते है कि इस बार जयपुरी प्रिंट की चुनरी लाल, हरा, पीला, नारंगी समेत कई रंग मौजूद है। इसी के साथ साटन के कपड़े की मांग भी है। बाजार में बासुरी, घुघरू, माला आदि की ग्राहक पसंद कर रहा है। संवाद