नगर निगम में ये क्या हो रहा है
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नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सिंधू ने 23 जुलाई 2014 को नगर आयुक्त के आदेश का हवाला देते हुए तीन गैराजों को जोन में बांटकर प्रत्येक गैराज प्रभारी को अपने अधीन आने वाले वार्डों की सफाई का निरीक्षण करने के आदेश जारी किए थे। जेडएसओ आरके पाराशर को सीआई पार्क गैराज के अलावा वार्ड छह, सात, आठ, मुख्य सफाई निरीक्षक विमल मिश्रा को सिविल लाइंस गैराज के अलावा वार्ड तीन, चार, नौ व 10, सीआई एके त्यागी को किला गैराज के अलावा वार्ड एक, दो और पांच की सफाई व्यवस्था के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी दी गई थी। इसी बीच मुख्य सफाई निरीक्षक और सफाई निरीक्षक ने डॉ. सिंधू की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनके अंडर में काम करने से मना कर दिया। नगर आयुक्त के हस्तक्षेप से यह मामला सुलझा। 10 मार्च 2015 को डॉ. सिंधू ने एके त्यागी और विमल मिश्रा से सिविल लाइंस और किला गैराज का चार्ज लेकर सफाई निरीक्षक एमसी राना और दीपक कुमार को दे दिया। इन दोनों को वार्ड एक और वार्ड आठ की सफाई की जिम्मेदारी दे दी। पहले यह काम सफाई निरीक्षक कर रहे थे। हाल ही में डॉ. सिंधू ने वार्ड आठ में गंदगी पाए जाने की बात कहकर विमल मिश्रा से स्पष्टीकरण मांगा तो उन्होंने अपर नगर आयुक्त सच्चिदानंद सिंह से शिकायत कर इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर और मानसिक उत्पीड़न करने वाला बताकर खुद को कार्यालय से संबद्ध करने की मांग की है।
मैं चीफ सेनेट्री इंस्पेक्टर होकर सेनेट्री इंस्पेक्टर का काम करूं। सफाई निरीक्षकों को गैराज इंचार्ज बनाकर मेरे ऊपर बिठा दिया गया। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह कार्रवाई की है। मैं इसके विरोध में उच्चाधिकारियों के अलावा शासन तक जाऊंगा। वहां भी नहीं सुनी गई तो न्यायालय की शरण लूंगा। -विमल कुमार मिश्र, मुख्य सफाई निरीक्षक
मैं जिसे चाहूं गैराज पर तैनात करूंगा और जिसे चाहूं वार्ड की सफाई में लगाऊंगा। यह मेरे अधिकार क्षेत्र में है। मुख्य सफाई निरीक्षक काम से बचने के लिए मेरी शिकायतें कर रहे हैं। -डॉ. एसपीएस सिंधू, नगर स्वास्थ्य अधिकारी